सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाना ही चाहिए, यह उनका हक है: आचार्य प्रमोद

राजस्थान में सचिन पायलट मुख्यमंत्री बनाने की मांग एक बार फिर से तेज हो गई है। इस बार उन को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कांग्रेस के कार्यकर्ता है या सचिन पायलट के समर्थक विधायक नहीं बोले हैं, बल्कि प्रियंका गांधी वाड्रा के राजनीतिक सलाहकार आचार्य प्रमोद कृष्णम के अलावा राजस्थान के कद्दावर नेता राजेंद्र चौधरी ने भी पायलट मुख्यमंत्री बनाने की मांग की है।

दूसरी तरफ से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को कांग्रेस पार्टी में रहकर उचित सहयोग करने की सलाह पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने स्पष्ट किया है कि अशोक गहलोत राजस्थान को संभालें और वहां पर 2018 में कांग्रेस पार्टी को जिताने वाले सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनने दें। इधर, सचिन पायलट ने गुरुवार शाम को विधानसभा स्पीकर डॉ. सीपी जोशी से उनके सरकारी बंगले पर जाकर मुलाकात की।

अचानक हुई इस मुलाकात से सियासी हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। लंबे अरसे बाद पायलट ने जोशी से मुलाकात की है। कांग्रेस के बीच चल रही खींचतान के बीच इस मुलाकात के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। कांग्रेस के अंदरुनी सियासी समीकरणों के हिसाब से सचिन पायलट और सीपी जोशी दो विपरीत ध्रुव माने जाते रहे हैं।

सचिन पायलट के कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष बनने से लेकर अब तक ऐसा बहुत कम हुआ है, जब दोनों की इस तरह मुलाकात हुई हो। कांग्रेस में जब शक्ति परीक्षण का वक्त आया, तब जोशी पायलट के खिलाफ खड़े थे।

अब अचानक सचिन पायलट का सीपी जोशी के घर मिलने जाना कांग्रेस के नए सियासी समीकरणों की तरफ इशारा माना जा रहा है। इससे पहले 17 सितंबर को सचिन पायलट ने राहुल गांधी के साथ मुलाकात कर प्रदेश के सियासी माहौल और आगे की रणनीति पर चर्चा की है।

माना जा रहा है कि जल्द प्रदेश में सत्ता संगठन में बदलावों की शुरूआत होगी। बदलावों में सबसे पहले मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक नियुक्तियों का काम होगा। कांग्रेस सूत्रों का कहना है 2023 को देखते हुए सचिन पायलट को मुख्यमंत्री, राजस्थान कांग्रेस का अध्यक्ष या केंद्रीय संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देने की चर्चा है।

माना जा रहा है कि यह काम मंत्रिमंडल विस्तार और जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के बाद होगा। सीपी जोशी से मुलाकात को भी सचिन पायलट को भविष्य में मिलने वाली जिम्मेदारी से पहले की एक्सरसाइज के तौर पर ही देखा जा रहा है।

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सीपी जोशी ने हाल ही विधानसभा की कार्यवाही के दौरान मंत्रियों के उकसाने वाले आचरण पर भारी नाराजगी जताकर बीच में ही सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी थी। ऐसा तब किया जाता है, जब सत्र का अवसान होता है, लेकिन राजस्थान के इतिहास में पहली बीच में सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित की गई।

ससंदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल के सदन में किए गए उकसाने वाले एक्शन पर जोशी इस कदर नाराज हुए थे कि विधानसभा की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया था। बाद में नए सिरे से बुलेटिन जारी करना पड़ा था। कांग्रेस में पंजाब को लेकर उठा विवाद बढ़ता ही जा रहा है।

पंजाब विवाद में अब राजस्थान के नेता भी निशाने पर आने लगे हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की नसीहत का कैप्टन अमरिंदर सिंह ने करारा जवाब दिया है। अमरिंदर सिंह ने गहलोत को पंजाब की बजाय राजस्थान पर ध्यान देने की सलाह दी है।

दरअसल, सीएम गहलोत ने कहा था कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ऐसा कोई कदम नहीं उठाएं, जिससे कांग्रेस पार्टी को नुकसान हो। कांग्रेस अध्यक्ष कई नेताओं की नाराजगी मोल लेकर मुख्यमंत्री का चयन करते हैं।

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गहलोत की नसीहत के बारे में पूछे गए सवाल पर एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा, ‘वो अपना राजस्थान संभालें, हमारे पंजाब को छोड़ें। उन्हें पंजाब को छोड़कर राजस्थान में जो कुछ हो रहा है उसे देखना चाहिए।

अशोक गहलोत मेरे दोस्त हैं, गहलोत को विधानसभाचुनाव में जिस कमेटी ने टिकट दिए थे, वे उसके चैयरमेन थे। वे बहुत अच्छे आदमी हैं, लेकिन उन्हें अपनी परेशानियों को देखना चाहिए। उनके सामने बहुत सी समस्याएं हैं।

हमारे सामने राजस्थान में समस्याएं हैं, छत्तीसगढ़ में दिक्कतें हैं। तीन तो स्टेट रह गए हैं कांग्रेस के पास। आप पंजाब खराब कर ही रहे हो।’ गौरतलब है कि रविवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बयान जारी कर कहा था- मुझे उम्मीद है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे, जिससे कांग्रेस पार्टी को नुकसान हो।

कैप्टन साहब ने खुद कहा कि पार्टी ने उन्हें साढे़ नौ साल तक मुख्यमंत्री बनाकर रखा है। उन्होंने अपनी सर्वोच्च क्षमता के अनुरूप कार्य कर पंजाब की जनता की सेवा की है। गहलोत ने कहा था कि हाईकमान को कई बार विधायकों और आमजन से मिले फीडबैक के आधार पर पार्टी हित में निर्णय करने पड़ते हैं।

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मेरा व्यक्तिगत भी मानना है कि कांग्रेस अध्यक्ष कई नेता, जो मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में होते हैं, उनकी नाराजगी मोल लेकर ही मुख्यमंत्री का चयन करते हैं। मुख्यमंत्री को बदलते वक्त पुराने मुख्यमंत्री हाईकमान के फैसले को गलत ठहराने लग जाते हैं। ऐसे क्षणों में अपनी अन्तरात्मा को सुनना चाहिए।

कैप्टन साहब पार्टी के सम्मानित नेता हैं। मुझे उम्मीद है कि वो आगे भी पार्टी का हित आगे रखकर ही कार्य करते रहेंगे। कैप्टन अमरिंदर सिंह और अशोक गहलोत के बीच दोस्ताना संबंध माने जाते हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव के वक्त अशोक गहलोत को स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था।

पंजाब चुनाव में पूरा टिकट वितरण गहलोत की देखरेख में हुआ था, इसलिए पंजाब कांग्रेस की सियासी तासीर और वहां के विधायकों के बारे में उन्हें पूरी जानकारी है। हाल के पंजाब के घटनाक्रम में नवजोत सिंह सिद्धू को अहमियत मिलने और खुद को हटाए जाने से कैप्टन अमरिंदर नाराज हैं।

पंजाब की तरह राजस्थान कांग्रेस में भी कलह कम नहीं है। ऐसे वक्त में अशोक गहलोत की सलाह कैप्टन को नागवार गुजरी और अपने दोस्त को खरी-खरी सुना दी। पंजाब में मुख्यमंत्री बदलने के बाद अब उसका असर राजस्थान की सियासत पर भी पड़ने लगा है।

पंजाब में हुए बदलाव के बाद राजस्थान में अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विरोधी खेमे को मुखर होकर आवाज उठाने का मौका दे दिया है। प्रियंका गांधी के नजदीकी यूपी कांग्रेस के नेता और कल्कि पीठाधीश आचार्य प्रमोद कृष्णम ने पंजाब की तर्ज पर राजस्थान में भी सीधे मुख्यमंत्री बदलने की मांग की है।

इससे सियासी हलचल बढ़ गई है। पायलट खेमे के नेता दबी जुबान में मुख्यमंत्री बदलने की मांग करते रहे हैं, लेकिन आचार्य प्रमोद खुलकर पायलट की पैरवी कर रहे हैं। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा- मैं कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भावनाओं की बात कर रहा हूं।

राजस्थान के कार्यकर्ताओं में यह चर्चा आम है कि पायलट के साथ नाइंसाफी हुई। सचिन पायलट ने नेतृत्व का आश्वासन मान कर काम किया। आज तक पायलट ने हाईकमान के हर निर्देश का पालन किया है। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने भास्कर से कहा कि सचिन पायलट ने राहुल गांधी से तीन घंटे मुलाकात की है, यह बहुत कुछ कहती है।

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पूरे देश में बदलाव की बयार है, यह रुकनी नहीं चाहिए और रुकेगी भी नहीं। परिवर्तन संसार का नियम है, न कोई हमेशा सीएम बना रह सकता है न ही पीएम। लोग आते जाते रहते हैं। बीजेपी जब पांच-पांच मुख्यमंत्री बदल सकती है तो कांग्रेस क्यों नहीं? अशोक गहलोत बहुत सम्मानित नेता हैं।

उन्होंने खुद कहा था कि नए लोग आगे आएं, गहलोत को अब अपने बयान का मान रखना चाहिए। प्रमोद कृष्णम ने कहा कि राजस्थान में 2018 का विधानसभा चुनाव हुआ था तो सचिन पायलट राजस्थान कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष थे। अशोक गहलोत भी उस वक्त पार्टी में बड़े और जिम्मेदार ओहदे पर थे।

वे वरिष्ठ नेता हैं, आज मुख्यमंत्री हैं, अशोक गहलोत की कार्यप्रणाली में कहां गुरेज है? 2018 में पायलट राजस्थान कांग्रेस के तो मध्यप्रदेश में कमलनाथ, छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल प्रदेशाध्यक्ष थे, पंजाब चुनाव से पहले कैप्टन अमरिंदर प्रदेशाध्यक्ष थे। सचिन पायलट को छोड़कर सारे राज्यों में उस समय के प्रदेशाध्यक्षों को मुख्यमंत्री बनाया।

राजस्थान में सचिन पायलट का हक था।
प्रमोद कृष्णम ने कहा कि विधानसभा चुनावों की जीत के बाद मुख्यमंत्री बनना सचिन पायलट का हक था। सचिन पायलट ने कांग्रेस नेतृत्व की बात मानकर उस समय त्याग किया। यह सचिन पायलट का बलिदान था, उस वक्त उनके साथ नाइंसाफी हुई।

आज कांग्रेस के कार्यकर्ता मानते हैं कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनना चाहिए। प्रमोद कृष्णम ने सचिन पायलट के जन्मदिन पर भी 7 सितंबर ट्वीट कर इशारों में उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग की थी। उस समय लिखा था परिवर्तन की बयार है, उपहार तैयार है, शुभ घड़ी का इंतजार है।
पंजाब के बाद अब राजस्थान में भी खेमेबंदी तेज होने के आसार हैं। राजस्थान में बदलावों की शुरूआत मंत्रियों और पार्टी पदाधिकारियों से होने की संभावना है। पहले मंत्री बदलेंगे और पार्टी में खाली पदों पर नियुक्तियां होंगी। इसके बाद टॉप लेवल पर बदलाव की संभावना है। सरकार और संगठन में पदों को लेकर आगे खींचतान और बढ़ने के आसार बन रहे हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खेमा राजस्थान के सियासी हालात को अलग बताकर किसी भी तरह के बदलाव को सिरे से नकार रहा है, तो दूसरी ओर राजस्थान में सचिन पायलट समर्थक नेता बदलाव की पैरवी कर रहे हैं।