21वीं पुण्यतिथि: राजेश पायलट दूधिया थे, सांसद बने और आखिर केंद्रीय मंत्री भी रहे

जयपुर। पूर्व केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट उर्फ राजेश्वर प्रसाद सिंह बिधूड़ी की आज 21वीं पुण्यतिथि है। भरतपुर, दौसा के सांसद रहे स्व पायलट के लिए दोसा के भड़ाना में प्रतिवर्ष की तरह आज एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया है।

हालांकि, सभा काफी छोटी है। बीते 2 साल से लगातार कोरोना की गाइडलाइन के चलते आम सभा नहीं हो पा रही है, किंतु सचिन पायलट और उनके समर्थकों के संग पहुंचे हैं। सचिन पायलट ने हर वर्ष की भांति उन्होंने अपने पिता को श्रद्धांजलि देने का कार्य किया है। राजेश पायलट 1979 तक एयर इंडिया में पायलट थे। उसी वर्ष उन्होंने एयर इंडिया से इस्तीफा दिया था।

इस दौरान वो राजीव गांधी के सम्पर्क में आये और इंदिरा गांधी ने उनको भरतपुर से टिकट देकर सांसद का चुनाव लड़ाया। उस दौर में राजेश्वर प्रसाद सिंह बिधूड़ी भरतपुर पहुंचे तो लोगों कहा कोई पायलट चुनाव लड़ने का रहा है। यह बात राजेश्वर प्रसाद सिंह बिधूड़ी के पास पहुंची तो उन्होंने चुनाव से पहले अपना नाम बदलकर राजेश पायलट रख लिया।

बाद में राजेश पायलट दौसा से भी सांसद रहे। वर्ष 1997 के वक्त सीताराम केसरी के साथ अध्यक्ष चुनाव को लेकर राजेश पायलट की भिड़ंत हो गई थी। पायलट को पता था कि वह नहीं जीत पाएंगे, किन्तु पीछे नहीं हटे।

20 साल सांसद रहे, पायलट की छोड़ी थी नौकरी

राजेश पायलट ने पहली बार 1980 में भरतपुर से सांसद का चुनाव लड़ा और जीते। इसके बाद लगातार 1984, 1991, 1996, 1998 और 1999 में दौसा से सांसद रहे। वर्ष 2000 की 11 जून को राजेश पायलट का भड़ाना में ही एक सड़क हादसे में निधन हो गया था।

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1971 के भारत-पाक युद्ध में थे पायलट

राजेश पायलट राजनीति में आने से पहले एयर इंडिया में लड़ाकू विमान उड़ाते थे। उन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी। इसके 3 साल बाद, यानी 1974 में रमा पायलट के साथ शादी हुई थी। साल 1980 में राजीव गांधी के आग्रह पर राजेश पायलट राजनीति में कूद पड़े।

“राम राम सा” प्रसिद्ध टैगलाइन बनी

कहते हैं कोई भी व्यक्ति की अपनी एक खास पहचान बन जाती है। राजेश पायलट ने चुनाव के वक्त केवल अपना नाम ही नहीं बदला, अपितु नई टैगलाइन भी अपनाई। भरतपुर चुनाव में “राम राम सा” के संबोधन से लोगों का अभिवादन करने वाले पायलट ने इस टैगलाइन को आजीवन धारण किये रखा।

दूधिया थे, पायलट बने, सांसद-मंत्री बने

राजेश पायलट जब आपने लोगों में बैठते थे तो वह कहा करते थे कि एयर इंडिया में पायलट बनने से पहले उन्होंने दूध बेचने का काम किया है। कहते थे, जब वह वायुसेना के अधिकारियों के घरों में दूध बेचने जाया करते थे, तभी उनको एयर इंडिया में पायलट बनने की प्रेरणा मिली थी।

सोनिया गांधी से टकरा गए

साल 2000 के दौरान जब उत्तर प्रदेश के जितेंद्र प्रसाद सोनिया गांधी के विरुद्ध अध्यक्ष पद के चुनाव में उतरे तो राजेश पायलट ने गांधी परिवार के विरुद्ध जाकर जितेंद्र प्रसाद का खुलकर समर्थन किया। चुनाव सोनिया गांधी जीतीं, लेकिन राजेश पायलट अपनी निडरता के लिए लोगों में खुद प्रसिद्ध हुए।

पायलट-सिंधिया-प्रसाद का निधन एक ही जैसे क्यों हुआ?

सबसे बड़ा और अहम सवाल यह है कि राजेश पायलट, माधवराव सिंधिया और जितेंद्र प्रसाद तीनों ही के द्वारा कहीं ना कहा सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने का समर्थन करने का काम किया गया था। गंभीरता यह है कि वर्ष 2000 में जब सोनिया गांधी ने चुनाव लड़ा तो उसके कुछ ही समय उपरांत तीनों नेताओं का अलग-अलग हादसों में निधन हो गया।

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सोनिया के सियासी विरोधियों एक ही वर्ष में निधन कैसे हुआ?

माधवराव सिंधिया का विमान हादसे में 30 सितम्बर 2001, जितेंद्र प्रसाद का आश्चर्यजनक रूप रूप से मस्तिष्कीय रक्तस्राव से 16 जनवरी 2000 को और राजेश पायलट का सड़क हादसे में 11 जून 2000 को निधन हुआ। यही सवाल आज भी अनसुलझा है कि तीन कदावर नेताओं का अलग-अलग हादसों में एक वर्ष की भीतर कैसे निधन हुआ?

दो के बेटे भाजपा में एक लड़ रहे हैं अपनों से लड़ाई

माधवराव सिंधिया के बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया पिछले वर्ष कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए हैं, जबकि जितेंद्र प्रसाद के बेटे जितिन प्रसाद ने भी 2 दिन पहले ही भाजपा ज्वाइन की है।

राजेश पायलट के बेटे सचिन पायलट राजस्थान में अभी भी अशोक गहलोत की सरकार से सत्ता और संगठन में भागीदारी की लड़ाई लड़ रहे हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि सचिन पायलट को भी आज नहीं तो कल भाजपा में जाना ही होगा।