Rajasthan: कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार पर क्या फिर से संकट आ सकता है?

Jaipur.
राजस्थान में पिछले 2 दिन से एक बार फिर से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कैंप और प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सचिन पायलट गुट की तरफ से एक दूसरे पर शब्द बाण शुरू कर दिए हैं। सचिन पायलट का एक अखबार में इंटरव्यू प्रकाशित होने के बाद राज्य की सियासत नया मोड़ लेती हुई नजर आ रही है।

राजनीति के जानकारों के अनुसार अगर सचिन पायलट के पास संख्या बल 30 से अधिक विधायकों की हुई तो राज्य की अशोक गहलोत सरकार अल्पमत में होने के कारण राज्य की सत्ता से बाहर हो सकती है। अगर विधायकों की संख्या इससे कम होगी तो गहलोत सरकार के ऊपर कोई संकट नहीं है।

फिलहाल राजनीतिक समीक्षकों की चिंता यह है कि क्या अशोक गहलोत की सरकार प्रदेश की सीमाओं को एक बार फिर से कोरोनावायरस की दुहाई देकर पिछले वर्ष की तरह सील कर सकती है? सियासी समीक्षक मानते हैं कि किसी भी सरकार को बचाने के लिए यथासंभव साम-दाम-दंड-भेद अपनाने से कोई भी पार्टी नहीं चूकती है। ऐसे में अशोक गहलोत की सरकार भी काफी कुछ करने वाली है।

राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार महेश झालानी के द्वारा फेसबुक पर पोस्ट लिखते हुए अशोक गहलोत की सरकार के ऊपर सचिन पायलट की वजह से किसी तरह के संकट नहीं होने के बारे में कहा है, उनका मानना है कि सचिन पायलट के पास आज की तारीख में इतने विधायक नहीं है कि वह अशोक गहलोत की सरकार को सत्ता से उखाड़ सके।

वरिष्ठ पत्रकार विमल शर्मा का कहना है कि भले ही राजस्थान में पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट कैम्प के द्वारा राज्य की अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ बगावती तेवर दिखाए जा रहे हो, किंतु इससे फिलहाल राज्य की कांग्रेस सरकार के ऊपर किसी तरह के संकट की संभावना नहीं है।

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लंबे समय से राजनीति के ऊपर तीखी नजर रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार विनोद पाठक का कहना है कि सचिन पायलट ने जिस तरह से सार्वजनिक रूप से अखबार में अपना बयान प्रकाशित करने की अनुमति दी है, उससे साफ है कि वह फिलहाल किसी भी तरह की बगावत नहीं करने जा रहे हैं। यदि उनको अशोक गहलोत सरकार से हाथ खींचना होता तो पिछले वर्ष की तरह चुपचाप राजस्थान छोड़कर जा सकते थे।

वैसे भी सचिन पायलट के द्वारा पहली बार इस तरह से खुलकर बयान दिया गया है तो निश्चित रूप से कांग्रेस आलाकमान को इसे नोटिस करना होगा। जिस तरह की बातें हो रही हैं, उससे स्पष्ट है कि सचिन पायलट अब आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में हैं। उन्होंने 1 महीने का समय कांग्रेस आलाकमान को दिया है तो निश्चित ही इस दौरान पार्टी की तरफ से और अशोक गहलोत सरकार की तरफ से भी कोई ना कोई कदम उठाया ही जाएगा।

वरिष्ठ पत्रकार धर्म सैनी का कहना है कि अशोक गहलोत की सरकार के ऊपर 2023 तक कोई संकट नहीं है, क्योंकि सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल है और सत्ता चलाने के लिए विधायकों की संख्या महत्वपूर्ण होती है, उनके नाखुश होने से सत्ता के ऊपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

एक अन्य वरिष्ठ पत्रकार जयराम शर्मा का मानना है कि भाजपा के पास 72 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 126 से ज्यादा विधायक बताए जाते हैं। अगर सचिन पायलट के साथ 30 से ज्यादा विधायक सत्ता का साथ छोड़ देते हैं तो निश्चित है कि सरकार संकट में फंस सकती है, लेकिन उसके लिए विधानसभा का सत्र बुलाकर बहुमत या अल्पमत का फैसला करना होगा।

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राजस्थान से बीबीसी हिंदी के लिए लिखने वाले पत्रकार मोहर सिंह मीणा का कहना है कि विधानसभा के भीतर सब कुछ संख्या बल का मामला है। अगर गहलोत सरकार के पास 100 विधायक लिए होते हैं, तो सरकार के ऊपर कोई संकट नहीं है जो फिलहाल दिखाई दे रहे हैं।

तमाम चीजों को देखने के बाद फिलहाल के लिए कहा जा सकता है कि जब तक सचिन पायलट की तरफ से कम से कम 30-35 विधयकों के साथ कोई कठोर फैसला नहीं लिया जाएगा, तब तक राज्य की अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ भाजपा केवल बयान दे सकती है, उसे सत्ता से बेदखल करने का सपना नहीं देखना चाहिए।