जयपुर नगर निगम ने रचा इतिहास कांग्रेस भाजपा के पार्षदों के साथ बना सकती है बोर्ड

राम गोपाल जाट

दिसंबर 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान जयपुर के तत्कालीन महापौर अशोक लाहोटी ने सांगानेर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत गए। अशोक लाहोटी के विधायक बनने के बाद भारतीय जनता पार्टी की तरफ से अपने सभी पार्षदों को एक होटल में ले जाया गया, जहां पर मनोज भारद्वाज को महापौर प्रत्याशी बना दिया गया।

इससे नाराज होकर पार्षद विष्णु लाटा के द्वारा बगावत कर दी गई। आधी रात को अवसर मिलते ही विष्णु लाटा होटल से फरार हो गया। उन्होंने कांग्रेस के 9 पार्षदों के साथ मिलकर भाजपा के कई पार्षद साथ लिए और 22 जनवरी 2020 को जयपुर अगले महापौर बन गए।

हालांकि, 91 सदस्यों वाले नगर निगम में भाजपा के पास 63 पार्षद थे, लेकिन कई पार्षदों ने पाला बदल लिया और महापौर के साथ चले गए। विष्णु लाटा दिसंबर 2020 तक, करीब 1 साल जयपुर मेयर रहे।

जयपुर नगर निगम के पिछले काल में पहले निर्मल नाहटा, फिर अशोक लाहोटी, और आखिरी एक वर्ष तक विष्णु लाटा महापौर रहे। जयपुर नगर निगम के दिसंबर 2020 के चुनाव में दो टुकड़े किए गए। पहला जयपुर नगर निगम हेरिटेज बनाया गया और दूसरा जयपुर नगर निगम ग्रेटर बना।

जयपुर नगर निगम हेरिटेज में जहां कांग्रेस का बोर्ड बना, वहीं जयपुर नगर निगम ग्रेटर में भाजपा ने बहुमत के साथ बोर्ड बनाया।

भाजपा ने सौम्या गुर्जर को महापौर बनाया, दूसरी तरफ कांग्रेस में हेरिटेज में मुनेश गुर्जर को महापौर बनाया। महापौर पद की शपथ लेते ही जयपुर नगर निगम ग्रेटर की महापौर सौम्या गुर्जर ने स्पष्ट कर दिया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तर्ज पर ना तो खाएंगी और ना ही किसी को खाने देंगी।

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राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार है, जो कांग्रेस पार्टी की है। माना जा रहा है कि जयपुर ग्रेटर के बोर्ड को हासिल करने के लिए सरकार पहले दिन से ही प्रयास में जुट गई थी। केवल एक अवश्य की तलाश में थी और उसके बहाने महापौर को निलंबित कर दिया गया।

इसी सिलसिले में यूडीएच विभाग द्वारा कमेटियों को भंग किया गया, लेकिन हाई कोर्ट ने स्टे कर दिया। सरकार को इस मामले में मुंह की खानी पड़ी। महापौर लगातार जीरो टॉलरेंस पर काम करने का दावा कर रही थीं, और उन्होंने इस मामले में कुछ माह पूर्व एसीबी को पत्र लिखकर भुगतान सम्बन्धी मामलों पर नजर रखने की अपील की थी।

पिछले दिनों नगर निगम में महापौर सौम्या गुर्जर, 2 कमेटियों के चेयरमैन और एक पार्षद की निगम आयुक्त यज्ञमित्र देवसिंह के बीच नोंकझोंक हुई। इसको लेकर देवसिंह ने ज्योति नगर थाने में मारपीट करने का मुकदमा दर्ज करवाया।

जो घटना हुई, उसके बाद रविवार को आधीरात स्वायत शासन विभाग के द्वारा महापौर को निलंबित किया गया। उनके साथ दोनों चेयरमैन और एक पार्षद को भी सस्पेंड कर दिया गया। यूडीएच सचिव दीपक नंदी के द्वारा कहा गया कि न्यायिक जांच की जा रही है और जांच प्रभावित नहीं हो, इसको देखते हुए महापौर को निलंबित किया गया है।

महापौर सौम्या गुर्जर कमिश्नर यज्ञमित्र देव सिंह के बीच में पिछले दिनों ही एक मीटिंग के दौरान नोकझोंक हो गई थी, इसके बाद यज्ञमित्र देव सिंह के द्वारा ज्योति नगर थाने में महापौर और तीन जनों के खिलाफ राजकार्य में बाधा, गाली-गलौज, मारपीट करने का मुकदमा दर्ज करवाया था।

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जब दिसंबर 2020 के दौरान जयपुर के ग्रेटर का मेयर बनने की बारी आई, तब यह माना जा रहा था कि भाजपा की तरफ से किसी वरिष्ठ पार्षद को महापौर का प्रत्याशी बनाया जाएगा, लेकिन पहली बार पार्षद बनी सौम्या गुर्जर को महापौर प्रत्याशी बनाया गया, जिससे पूर्व मेयर शील धाभाई नाराज हो गईं।

जब तक मेयर का चुनाव संपन्न नहीं हुआ तब तक भाजपा के द्वारा शील धाभाई को भाजपा मुख्यालय में रखा गया। उसके बाद उनको घर जाने के लिए छोड़ा गया, लेकिन जब वे कार्यालय से निकलीं, तब रो रही थीं, उनके आंसू टपक रहे थे। शील धाभाई को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की करीबी माना जाता है।

अब कांग्रेस सरकार के द्वारा सौम्या गुर्जर की जगह शील धाभाई को कार्यवाहक महापौर बनाया गया है। माना जा रहा है कि एक बार फिर से राज्य की कांग्रेस सरकार के द्वारा भाजपा के कई पार्षदों को तोड़कर शील धाभाई के नेतृत्व में खुद का बोर्ड बनाया जा सकता है।

न्यायिक जांच के नाम पर सरकार सौम्या गुर्जर को कम से कम 1 महीने तक के लिए सस्पेंड निगम से दूर रख सकती है, उसके बाद समय को 60 दिन और बढ़ाया जा सकता है। इस समय के दौरान भाजपा के कई पार्षद तोड़कर कांग्रेस खुद का बोर्ड बनाने का प्रयास जरूर करेगी।

माना जा रहा है कि निगम कमिश्नर है यज्ञमित्र देव सिंह से खुद कांग्रेस की सरकार के द्वारा ही मुकदमा दर्ज करवा कर महापौर सौम्या गुर्जर को सस्पेंड करने का बहाना ढूंढा गया है, जिसमें वह अभी तक पूरी तरह कामयाब रही है।

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दूसरी तरफ सरकार ने हाईकोर्ट में कैविएट दायर की गई है, ताकि किसी भी तरह से अगर सौम्या गुर्जर या भाजपा कोर्ट में अपील करे तो उससे पहले सरकार का पक्ष सुने और स्टे नहीं करें।

अब यहां पर एक चीज और निकल कर सामने आ रही है। राजनीति के गलियारों में चर्चा है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कैंप के द्वारा ही इस मामले में अशोक गहलोत सरकार की मदद की गई है।

चर्चा है कि सांगानेर विधायक अशोक लाहोटी, मालवीय नगर से विधायक कालीचरण सराफ, झोटवाड़ा से पर्व विधायक राजपाल सिंह शेखावत, विद्याधर नगर से विधायक नरपत सिंह राजवी, आदर्श नगर से पूर्व विधायक अशोक परनामी के करीबी पार्षदों को कांग्रेस पार्टी इन विधायकों के सहारे अपने पाले में ले सकती है, पूर्व की भांति जोड़तोड़ कर ग्रेटर नगर निगम में भी कांग्रेस का बोर्ड बनाया जा सकता है।

महापौर सौम्या गुर्जर को निलंबित किए जाने के बाद पार्टी कार्यालय में जिस बैठक का आयोजन किया गया उसमें विधायक अशोक लाहोटी, कालीचरण सराफ और नरपत सिंह राजवी उपस्थित नहीं हुई है।

इसके बाद यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि इन विधायकों के करीबी पार्षद कभी भी भाजपा से पाला बदलकर कांग्रेस के कैंप में जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो जयपुर नगर निगम का बोर्ड भाजपा लगातार दूसरी बार अपने ही लोगों के द्वारा बगावत करने के कारण मेयर का पद हार जाएगी।