आईएएस-आईपीएस पा रहे हैं नियुक्तियां: गहलोत सरकार से इसलिये नाराज हैं पायलट कैम्प के विधायक!

जयपुर।
एक दिन पहले ही बाड़मेर के गुढामलानी विधानसभा क्षेत्र से विधायक हेमाराम चौधरी (Congress MLA Hemaram choudhary) के द्वारा इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस सरकार में सियासी भूचाल खड़ा हो गया है। कांग्रेस के ही कई अन्य विधायकों ने दबी जुबान में गहलोत सरकार (Ashok gehlot govt) के खिलाफ बगावती तेवर अख्तियार कर लिये हैं।

कांग्रेस विधायक मुरारी लाल मीणा (MLA Murari lal meena) ने भी हेमराम चौधरी के इस्तीफे को दुरभाग्यपूर्ण करार देते हुये उनकी पीड़ा पर गहलोत सरकार द्वारा विचार करने का आग्रह किया है। इसी क्रम में कांग्रेस के चाकसू से विधायक वेदप्रकाश सोलंकी (Chaksu MLA Vedprakash solanki) ने भी कहा है कि हेमराम चौधरी जैसे 6 बार के ईमानदार विधायक को क्षेत्र में काम नहीं होने के कारण यदि इस्तीफा देने की नौबत आ गई है तो समझ सकते हैं कि सत्ता का केंद्रीयकरण कितना खतरनाक हो चुका है।

जिन विधायकों के अब इस्तीफे या धमकी देने की बातें सामने आई हैं, वे सभी सचिन पायलट कैम्प के हैं। इधर, पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट खुद दिल्ली में हैं। बताया जा रहा है कि पायलट कोरोना से निपटने के लिये संसाधन जुटाने के लिये दिल्ली गये हुये हैं। दूसरी ओर गहलोत कैम्प के लोगों का मानना है कि पायलट का दिल्ली जाना उनकी रणनीति का अहम हिस्सा है।

पायलट कैम्प के विधायक सोलंकी ने गहलोत सरकार द्वारा मंत्रीमंडल विस्तार नहीं करने और राजनीतिक नियुक्तियों में पायलट गुट को दरकिनार करने को लेकर साफ शब्दों में कहा है कि ऐसा तो है नहीं कि कोरोना के कारण कोई काम हो ही नहीं रहे हैं। उनका कहना है कि कई राजनीतिक नियुक्तियां हाल ही में हुई हैं, ऐसे में सरकार में मंत्रीमंडल विस्तार नहीं होने के कोई कारण नहीं बचते हैं।

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एमएलए सोलंकी ने कहा है कि मंत्री नहीं होने से कई विभागों में अफसरशाही हावी हो गई है। एक तरह से सोलंकी ने साफ कर दिया है कि कोरोना चलता रहेगा, लेकिन सरकार को मंत्रीमंडल विस्तार करना चाहिये, राजनीतिक नियुक्त्यिां होनी चाहिये और अगर ऐसा नहीं होता है, उनके काम नहीं होते हैं तो वह खुद भी इस्तीफा दे देंगे।

मजेदार बात यह है कि एक ओर जहां पायलट कैम्प के विधायक मंत्री बनने और राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार कर रहे हैं, वहीं अशोक गहलोत सरकार सभी बड़ी राजनीतिक नियुक्तियों में रिटायर्ड आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को नियुक्त करती जा रही है। इसके चलते पायलट कैम्प के साथ ही गहलोत के करीबी निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा, बाबूलाल नागर, बसपा से कांग्रेस में आये राजेंद्र गुढ़ा जैसे विधायक भी नाराज बताये जा रहे हैं।

इन रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों को राजनीतिक नियुक्तियां

1. बीएन शर्मा— चेयरमैन विद्युत विनियामक आयोग
2. डीबी गुप्ता— मुख्य सूचना आय़ुक्त
3. एनसी गोयल— चेयरमैन, रीयल स्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी, यानी रेरा
4. प्रेम सिंह मेहरा— आयुक्त, निर्वाचन आयोग
5. गोविंद शर्मा— मुख्यमत्री के सलाहकार
6. रामलुभाया— चेयरमैन जवाबदेही कानून कमेटी
7. अरविंद मायाराम— उपाध्यक्ष, मुख्यमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद
8. जी.एस. संधू— चेयरमैन, पट्टा वितरण अभियान की आय कमेटी
9. जगरूप सिंह— सदस्य़, सिविल सेवा अपील अधिकरण
10. मातादीन शर्मा— सदस्य़, सिविल सेवा अपील अधिकरण
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इन रिटायर्ड आईपीएस अधिकारियों को राजनीतिक नियुक्तियां

1. भूपेंद्र सिंह यादव— चेयरमैन, राजस्थान लोक सेवा आयोग
2. हरिप्रसाद शर्मा— चेयरमैन, राज्य कर्मचारी चयन बोर्ड
3. आलोक त्रिपाठी— वीसी, सरदार पटेल पुलिस विश्वविद्यालय