NPCDCS परियोजना में कार्यरत भीलवाड़ा जिले के सैंकड़ों स्वास्थ्यकर्मियों की 30 अप्रैल को सेवा समाप्त

-भारत सरकार के आयुष मंत्रालय का आयुर्वेद पर एक और प्रहार,
NPCDCS बन्द होने की कगार पर, पिछले साल कोरोना का मॉडल बने भीलवाड़ा जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होने की सम्भवना। इससे राज्य में बेरोजगारी भी बढ़ेगी, जबकि अधिकांश स्वास्थ्यकर्मी COVID-19 केयर सेंटर में दे रहे हैं सेवाएं।

भीलवाड़ा/जयपुर। देशभर में बढ़ते हुए शुगर, BP, मोटापा, कैंसर आदि की रोकथाम के लिए भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के सयुंक्त तत्वावधान से राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के साथ ही देश के 6 अन्य राज्यों में चल रही NPCDCS परियोजना का सेवा विस्तार नहीं होने के कारण यह स्कीम 30 अप्रैल 2021 को बन्द हो रही है।

इस बात की जानकारी मिलने पर NPCDCS कार्यक्रम में कार्यरत चिकित्सकों, फार्मासिस्ट योग शिक्षकों में आक्रोश और भय का माहौल है। इन स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार पिछले 12 महीने से ये लोग कोरोना महामारी में फ्रंट लाइनर के रूप में चेक पोस्ट से COVID-19 डेडिकेटेड सेंटर तक सेवा दे रहे हैं।

एक तरफ देश मे स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी है तो दूसरी ओर भारत सरकार का आयुष मंत्रालय दोहरा रवैया अपनाते हुए इन सैंकड़ों स्वास्थ्यकर्मियों को सेवा से पृथक कर रहा है।

मोदी सरकार के इस फैसले के बाद स्वास्थ्यकर्मियों के साथ-साथ आम जनता में भी भारी आक्रोश है। इस सेवा से जुड़े सभी स्वास्थ्यकर्मियों ने इस फैसले की निंदा की है।

सभी स्वस्थ्यकर्मियों ने आयुष मंत्रालय, PM नरेंद्र मोदी, स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और BJP प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया को पत्र के माध्यम से अति शीघ्र सेवा विस्तार जारी करवाने की मांग की है, किन्तु अभी तक इसपर कोई फैसला नहीं हुआ है।

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