अशोक गहलोत ने सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और चुनाव आयोग पर सवाल खड़े कर अपमान किया है: राठौड़

-ट्विटर पर अशोक गहलोत के बयानों ने राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है। गहलोत के ट्वीट्स से न केवल सुप्रीम कोर्ट का अपमान माना जा रहा है, वरन चुनाव आयोग पर भी सीधा सवाल खड़ा किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा बुधवार को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट और इसके साथ ही चुनाव आयोग के द्वारा हाल ही में चुनाव से संबंधित लिए गए फैसलों को लेकर सवाल खड़े किए।

अशोक गहलोत के द्वारा एक के बाद एक कई ट्वीट करके ना केवल हाई कोर्ट के ऊपर सवाल खड़े करते हुए कहा गया है कि राज्य सरकारों द्वारा तमाम दलीलें दी जाने के बाद भी चुनाव करवाए जाने जारी रखे गए हैं। पंचायत चुनाव से लेकर निकाय चुनाव तक ने भी हाईकोर्ट ने अनुमति दी है। इसी तरह से सुप्रीम कोर्ट पर भी सवाल खड़े किए हैं।

साथ ही कहा है कि चुनाव आयोग की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि कोरोनावायरस की वैश्विक महामारी के बावजूद चुनाव आयोग अपनी जिम्मेदारियां के बहाने चुनाव कराने पर आमादा है, जिसके चलते लोगों की जान अटकी हुई है।

अशोक गहलोत के द्वारा देश की सुप्रीम न्याय व्यवस्था के साथ ही इलेक्शन कमीशन पर सवाल खड़े किए जाने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इसको लेकर राजस्थान में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए अशोक गहलोत को अपनी जिम्मेदारियों याद दिलाई है।

राजेन्द्र राठौड़ ने वक्तव्य जारी कर कहा कि राज्य में तेजी से पैर पसारती वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण को रोकने में विफल साबित हो रहे राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कोरोना कुप्रबंधन, अव्यवस्थाओं व अपनी नाकामी को छिपाते हुए केन्द्र सरकार के बाद अब उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर दोषारोपण कर रहे हैं।

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यह देश की पहली घटना होगी जब कोई मुख्यमंत्री ऐसी बेतुकी दलीलें पेश कर संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा कर रहा है, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण व शर्मनाक है।

राठौड़ ने कहा कि कोरोना संक्रमण फैलने के बाद अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बयान ”पर उपदेश कुशल बहुतेरे, जे आचरहिं ते नर न घनेरे” को चरितार्थ कर रहा है अर्थात् दूसरों को उपदेश देना तो बहुत आसान है लेकिन स्वयं उन उपदेशों पर अमल करना कठिन है।

शायद मुख्यमंत्री जी भूल गए हैं कि राजस्थान विधानसभा उपचुनावों में नरेगा व दूसरे मजदूरों की भीड़ लाकर कांग्रेस प्रत्याशियों की विशाल नामांकन रैलियां शुरु करने का काम तो खुद उन्होंने ही प्रारंभ किया था।

राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ जिस तरह की शब्दावली का प्रयोग कर रहे हैं वह मुख्यमंत्री पद की गरिमा का अपमान है।

राजस्थान में चुनाव प्रचार के साथ ही बाहर असम में भी रैलियों को संबोधित कर कोविड गाइडलाइन्स का खुद उल्लंघन करने वाले मुख्यमंत्री जी का अब यह वक्तव्य संवैधानिक संस्थाओं को कुचलने वाला व हास्यापद है।

राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत जी द्वारा सोशल मीडिया पर महज बयानबाजी करने से कोरोना संक्रमण की भयावहता खत्म नहीं होगी इसके लिए राज्य सरकार के मुखिया को अनर्गल आरोप-प्रत्यारोप लगाने की बजाय कोरोना रोकथाम के लिए ठोस व प्रभावी रणनीति के तहत काम करना होगा।