मुख्यमंत्री आवास के बाहर पुजारी की लाश, सांसद, विधायक, पूर्व मंत्री बैठे धरने पर

जयपुर। राजस्थान की राजधानी के बीचोंबीच, जहां पर मुख्यमंत्री, राज्यपाल से लेकर तमाम मंत्रियों के बंगले हैं, वहीं पर स्थित सिविल लाइन फाटक के पास पहली बार किसी मृतक का शव रखकर धरना दिया गया है।

दौसा जिले के महुआ तहसील में 6 दिन पहले, यानी 2 अप्रैल को एक पुजारी की 18 बीघा जमीन पर कब्जा करने के बाद भू माफियाओं द्वारा उसकी हत्या कर दी गई है। जानकारी में आया है कि 25 मार्च को ही जमीन की अवैध तरीके से रजिस्ट्री करवा ली गई थी। बाद में पुजारी की तरफ से मुकदमा दर्ज करवाया गया, लेकिन पुलिस की नाकामी का नतीजा यह है कि 2 अप्रैल को उसकी माफियाओं द्वारा हत्या कर दी गई।

पुजारी शंभू की हत्या के 6 दिन बाद भी जब राज्य सरकार की तरफ से भू माफियाओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई तो राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा के नेतृत्व में भाजपा के जयपुर शहर से लोकसभा सांसद रामचरण बौहरा, पूर्व मंत्री व विधायक कालीचरण सराफ, सांगानेर से विधायक अशोक लाहोटी समेत भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच, प्रदेश मंत्री जितेंद्र गोठवाल, पूर्व प्रदेश प्रवक्ता लक्ष्मीकांत भारद्वाज, पूर्व मंत्री अरुण चतुर्वेदी सब को लेकर सिविल लाइन फाटक पर बैठ गए।

भाजपा के नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार तुरंत प्रभाव से मृतक पुजारी शंभू के परिजनों को कम से कम 5000000 रुपए और एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दे। इसके साथ ही यह भी मांग की जा रही है कि राज्य में 28000 बीघा जमीन मंदिर माफी की ज़मीन है, जो सभी पुजारियों के नाम की जाए और प्रदेशभर के पुजारियों को सरकार ₹10000 महीने तनख्वाह भी दे।

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पार्टी के धरने पर बैठे नेताओं का कहना है कि राज्य में भू माफियाओं के खिलाफ कानून बनाया जाए, ताकि मंदिर माफी की जमीनों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके और सभी जमीनों को चिन्हित कर उनको पूजा पाठ करने वाले पुजारियों के नाम की जाए।

आपको बता दें कि यह पहला मामला है जब राजधानी जयपुर में और खासतौर से मुख्यमंत्री आवास के 100 मीटर के दायरे में किसी शव को रखकर धरना दिया जा रहा है, जबकि राज्य सरकार की तरफ से अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।