सवा 2 सालों की बकाया सब्सिडी राशि प्रदेश के किसानों को कब लौटाएगी गहलोत सरकार: डाॅ. पूनियां

महंगी बिजली से राज्य के किसानों और आमजन के साथ कुठाराघात कर रहे हैं मुख्यमंत्री गहलोत। प्रदेश के सभी बिजली उपभोक्ताओं को 2 माह में बिल आने का प्रावधान करे गहलोत सरकार। बिजली छीजत रोकने में पूरी तरह विफल राज्य सरकार : डाॅ. पूनियां

जयपुर। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने कहा कि गहलोत सरकार ने सवा 2 सालों से जो ₹833 प्रतिमाह की किसानों की सब्सिडी बंद की थी, अब यह सवा 2 सालों की बकाया राशि सरकार किसानों को कब लौट आएगी?

डाॅ. पूनियां ने कहा कि बिजली छीजत रोकने में गहलोत सरकार पूरी तरह नाकाम है, विद्युत विभाग की प्रशासनिक लापरवाही की वजह से छीजत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

यहां तक की रबी की फसल की सिंचाई के लिए किसानों को दिन में बिजली देने में सरकार विफल रही, जिससे रात में कड़ाके की ठंड में सिंचाई करने के दौरान प्रदेश में कई किसानों की मौत हो गई थी।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि राज्य सरकार ने निर्णय लिया 150 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को 2 माह में बिल आएगा, जबकि बाकि उपभोक्ताओं के साथ कुठाराघात क्यों किया जा रहा है, प्रदेश में सभी उपभोक्ताओं के प्रति 2 माह में ही बिल आने का प्रावधान सरकार क्यों नहीं कर रही है?

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सौर ऊर्जा के नाम पर अपनी झूठी पीठ थपथपा रही है, जबकि सौर ऊर्जा के प्रोत्साहन में केंद्र सरकार की बड़ी भूमिका है। वहीं प्रदेश में ऊर्जा के स्रोतों को विकसित करने के लिए राज्य सरकार को जिस तरीके से काम करने की जरूरत है वह धरातल पर नहीं हो पा रहा है, सिर्फ सरकार झूठी वाहवाही लूट रही है।

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उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने पीएम कुसुम योजना के अंतर्गत सौर पंपों को रियायत पर किसानों को उपलब्ध करा रही है, जिससे किसानों को बड़ा संबल मिल रहा है।

साथ ही मोदी सरकार किसानों की बंजर जमीनों पर सोलर प्लांट लगाने में मदद कर रही है, जिससे किसान स्वयं भी बिजली का उपयोग कर रहे हैं और अधिक बिजली उत्पादन होने पर ग्रिड को भी बेच सकेंगे।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि गहलोत सरकार बिजली बिलों में फ्यूल सरचार्ज सहित विभिन्न शुल्क लगाकर महंगी बिजली से प्रदेश के किसानों और आमजन के हितों के साथ खिलवाड़ कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में 96 प्रतिशत बिजली का उत्पादन होने के बावजूद भी प्रदेश सरकार के द्वारा 3 बार बिजली दरों में बढ़ोतरी की है, साथ ही टैरिफ, फ्यूल सरचार्ज, फिक्स चार्ज, सेस आदि में बढ़ोतरी कर कोरोनाकाल में आम उपभोक्ता एवं किसानों पर आर्थिक बोझ डालकर उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि पड़ोसी राज्यों के मुकाबले सबसे महंगी बिजली राजस्थान में उपभोक्ताओं को दी जा रही है, जिससे आमजन परेशान है। राज्य सरकार से मांग है कि कोरोनाकाल के दौरान के तीन माह के बिजली के बिलों को राज्य सरकार ने स्थगित किया गया था उन बिलों को माफ कर आमजन को राहत प्रदान की जाये।