अमित शाह और अशोक गहलोत की लड़ाई है, सचिन पायलट केवल मोहरा हैं

जयपुर। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के द्वारा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ओएसडी लोकेश शर्मा के खिलाफ दिल्ली में तुगलक रोड स्थित थाने में मुकदमा दर्ज करवाया गया है। अवैध रूप से फोन टेप करने के मामले को लेकर गजेंद्र सिंह शेखावत के द्वारा मुख्यमंत्री के ओएसडी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा दर्ज कराए गए इस मुकदमे में राजस्थान सरकार की वीडियोस मंत्री शांति धारीवाल का भी नाम है, जिनके द्वारा पिछले दिनों मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की जगह विधानसभा में फोन टैपिंग मामले में जवाब दिया गया था।

वैसे तो गजेंद्र सिंह शेखावत के द्वारा दर्ज करवाएंगे इस मुकदमे से साफ होता है कि राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार और राज्य भाजपा इकाई के द्वारा इस मामले में लड़ाई लड़ी जा रही है, किंतु इस प्रकरण की असलियत कुछ और ही है।

माना जा रहा है कि वर्ष 2017 से लेकर अब तक तत्कालीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई चल रही है। दोनों नेताओं के बीच यह लड़ाई तब शुरू हुई जब अगस्त 2017 में सोनिया गांधी के तत्कालीन राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल राज्यसभा का चुनाव लड़ रहे थे।

उसी वक्त भाजपा की तरफ से खुद अमित शाह केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और गुजरात भाजपा नेता बलवंत राजपूत मैदान में थे। सामने अहमद पटेल के साथ कांग्रेस के दो अन्य उम्मीदवार भी थे, लेकिन लड़ाई केवल अहमद पटेल और बलवंत राजपूत के नाम पर हो रही थी।

अमित साहब को भाजपा का चाणक्य ही नहीं, बल्कि देश की राजनीति का चाणक्य भी कहा जाता है। दूसरी तरफ कांग्रेस में अहमद पटेल को चाणक्य कहा जाता था। अगस्त 2017 के उस राज्यसभा चुनाव में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जोकि तब कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव थे और उनको उस चुनाव में अहमद पटेल का सहयोग करने के लिए कांग्रेस के द्वारा भेजा गया था।

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हालांकि खुद अमित शाह और स्मृति ईरानी चुनाव जीते, लेकिन भाजपा का तीसरा उम्मीदवार, यानी बलवंत राजपूत अहमद पटेल के सामने चुनाव हार गए थे। कहा जाता है कि अमित शाह के द्वारा तभी इस बात की शपथ ले ली गई थी कि मौका मिलते ही अशोक गहलोत को मात देने से नहीं चूकेंगे।

जुलाई 2020 में भाजपा के नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पास पहली बार ऐसा अवसर आया, जब अशोक गहलोत को हराने के लिए उनके पास सीधा मौका था। यह अवसर था, प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट खेमे के द्वारा बगावत का।

तभी खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा आरोप लगाए गए थे कि अमित शाह राजस्थान के कांग्रेस विधायकों को ₹35 करोड़ में खरीद रहे हैं। कांग्रेस के कई नेताओं के द्वारा यह भी कहा गया कि अमित शाह के द्वारा राजस्थान में कांग्रेस विधायकों को खरीदने के लिए सचिन पायलट को 200 करोड़ में दिए गए हैं।

अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच जुलाई और अगस्त 1 महीने तक राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई चलती रही। बाद में कांग्रेस आलाकमान के द्वारा बीच-बचाव किया गया और दोनों नेताओं के बीच समझौता करवाया गया। कांग्रेस की अशोक गहलोत वाली सरकार के द्वारा राजस्थान विधानसभा में विश्वास मत हासिल किया गया।

कांग्रेस के लोगों का आज भी यह कहना है कि अमित शाह के द्वारा सचिन पायलट को तक 200 करोड़ पर दिए गए थे वह रुपए वापस नहीं लिए थे, क्योंकि अमित शाह ने यह कहा था कि जब तक अशोक गहलोत की सरकार नहीं गिरेगी, तब तक वह चैन से बैठेंगे नहीं।

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फोन टाइपिंग करने का प्रकरण पिछले दिनों का और इस मामले में खुद अशोक गहलोत के मंत्री शांति धारीवाल और अशोक गहलोत की ही ओइसडी लोकेश शर्मा हंसते हुए नजर आ रहे हैं। इसी सिलसिले में गजेंद्र सिंह शेखावत के द्वारा अशोक गहलोत के ओएसडी लोकेश शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया गया।

इसे साफ हो रहा है की लड़ाई अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच में नहीं है, बल्कि असली राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई अमित शाह और अशोक गहलोत के बीच में है। अब यह समय ही साबित करेगा कि अमित शाह राजनीति के चाणक्य हैं या फिर अशोक गहलोत राजनीति के जादूगर हैं।