अस्मत मांगने वाले आरपीएस अधिकारी बोहरा को दिए अनिवार्य सेवानिवृत्ति लाभ

-निलंबित आरपीएस कैलाशचन्द बोहरा को दी अनिवार्य सेवानिवृत्ति अनुच्छेद 311 व अनिवार्य सेवानिवृत्ति के तहत बर्खास्तगी की प्रक्रिया होगी शुरू।

जयपुर। बीते दिनों आरपीएस अधिकारी कैलाश चंद द्वारा के द्वारा रेप पीड़िता की अस्मत मांगने के मामले में राज्य सरकार के द्वारा विधानसभा में घोषणा की गई थी कि आर्टिकल 311 के तहत बोहरा को बर्खास्त किया जाएगा, लेकिन इस प्रकरण को लेकर राज्य सरकार ने शनिवार को यू-टर्न ले लिया।

उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ के द्वारा सदन में यह मामला उठाया गया था और तब यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने जवाब देते हुए कहा था कि यह प्रकरण रेयरेस्ट ऑफ रेयर है, ऐसे में आर्टिकल 311 के तहत बोहरा को बर्खास्त किया जाएगा।

राठौड़ का कहना है कि सरकार ने यू-टर्न लिया है और एक ऐसे अधिकारी को राज्य सरकार अनिवार्य सेवानिवृत्ति के तमाम परीलाभ देकर सम्मानित कर रही है। ऐसे में सरकार खुद एक तरह से बलात्कारियों के हौसले बुलंद कर रही है।

इस मामले में भाजपा की तरफ से सरकार के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।

इधर, सरकार ने एक आदेश जारी कर कहा है कि ‘राजस्थान पेंशन नियम 1996 के नियम 53(1) अन्तर्गत 15 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके अथवा 50 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके राजकीय कार्मिक को उसकी अक्षमता के आधार पर लोकहित में अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिये जाने का प्रावधान है।

इस प्रावधान में बोहरा को तत्काल अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है। उल्लेखनीय है कि संविधान के आर्टिकल 311 में प्रत्येक राजकीय कर्मचारी को सेवा से पृथक करने से पूर्व सुनवाई का अवसर दिया जाना आवश्यक है।

यह भी पढ़ें :  अल्पमत में आई गहलोत सरकार, कल भाजपा में शामिल होंगे पायलट

बोहरा के इस प्रकरण को समग्र रूप से देखते हुए सीसीए नियम 19 की कार्यवाही विचाराधीन रखते हुए अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है। अनिवार्य सेवानिवृत्ति के पश्चात सीसीए नियमों में कार्यवाही जारी कर नियमों के तहत बर्खास्तगी की कार्यवाही की जाएगी।

चूंकि बोहरा ने 24 वर्ष 7 माह की सेवा पूर्ण की है एवं 52 वर्ष की आयु भी पूरी कर चुके हैं। अतः ऎसी परिस्थिति में अनिवार्य सेवानिवृत्ति होने के बाद बर्खास्तगी की कार्यवाही शुरू होगी।’