सुकैत की घटना के षडयंत्र में शामिल सभी लोगों पर कार्यवाही करे पुलिस: डाॅ. पूनियां

-महिला अपराधों में राजस्थान देश में दूसरे नम्बर पर, जिनकी गूंज सड़क से सदन तक: डाॅ. सतीश पूनियां

जयपुर। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने राजस्थान विधानसभा के बाहर मीडिया डेस्क पर मीडिया से बातचीत में कहा कि पिछले सवा दो साल से राजस्थान में कानून व्यवस्था सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

6 लाख 14 हजार से अधिक मुकदमे ये अपने आप में एक प्रमाण है, लेकिन इसमें भी दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक स्थिति है महिलाओं के प्रति अपराधों में राजस्थान अब देश में दूसरे नम्बर पर है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि 84 हजार से भी ज्यादा मुकदमे महिला अपराधों से सम्बन्धित हैं, जिनकी गूंज सड़क से लेकर सदन तक हुई है। आज भी हमारी पार्टी के विधायकों मदन दिलावर, संदीप शर्मा, प्रताप सिंह सिंघवी, चन्द्रकान्ता मेघवाल ने सुकैत (कोटा) की घटना को पुरजोर तरीके से सदन में उठाया, जिस घटना का ताल्लुक झालावाड़ से भी है।

इस मामले में पुलिस ने 20 लोगों को गिरफ्तार किया है और भी जानें कितने लोग होंगेा। इस घटना को लेकर मैंने राष्ट्रीय महिला आयोग के संज्ञान में लाने के लिए पत्र लिखा है और प्रदेश में अन्य दुष्कर्म की घटनाओं का भी उसमें उल्लेख किया है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि ये ठीक है कि अभियुक्तों की गिरफ्तारियां हुई है, लेकिन इस पूरी घटना का ताल्लुक पूरे कोटा सम्भाग से है और उन स्थानों को चिन्हित करके इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे, जिनके वाहन इस्तेमाल हुए, जिन होटलों में यह घटना हुई इसके अलावा जो लोग इस षडयंत्र में शामिल थे, उनको भी पुलिस उजागर करे और उनके खिलाफ कार्यवाही करे।

यह भी पढ़ें :  फोन टैपिंग को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने झूठ बोला, नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दें, सीबीआई जाँच हो: डाॅ. सतीश पूनियां

डाॅ. पूनियां ने कहा कि 18 मार्च को हमारी पार्टी की एक कमेटी ने राष्ट्रीय मंत्री डाॅ. अलका गुर्जर की अगुवाई में मौके पर जाकर पीड़िता, परिजनों एवं प्रशासन से बात की, आज इस कमेटी ने मुझे रिपोर्ट दी है।

महिला दुष्कर्म के मामलों को लेकर ये कमेटी और पार्टी के दूसरे लोग भी, प्रमुख लोग राष्ट्रीय महिला आयोग से भी मिलेंगे, क्योंकि इन महिला दुष्कर्म की घटनाओं में अनुसूचित जाति की भी महिलाएं और बालिकाएं थीं, लिहाजा अनुसूचित जाति आयोग को भी हमारे प्रमुख लोग ज्ञापन देंगे।

हम लोग ऐसे मामलों को लेकर मानवाधिकार से लेकर तमाम जो संवैधानिक संस्थाएं हैं उनसे भी संज्ञान लेने के लिए निवेदन करेंगे, जिससे ऐसी घटनाओं की पुनरावृति ना हो।

ऐसी घटनाओं को रोकने और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकार को गम्भीरता से ठोस कार्ययोजना बनाने की आवश्यकता है।