फोन टैपिंग कांड के बीच वसुंधरा राजे की रहस्यमई चुप्पी!

-केंद्रीय नेतृत्व से लेकर पार्टी के तमाम नेताओं से लेकर राज्य इकाई द्वारा सरकार पर हमला किया जा रहा है।

जयपुर। राजस्थान की सरकार के द्वारा कथित तौर पर जनप्रतिनिधियों की फोन टैपिंग कांड का मामला जहां प्रदेशभर में जबरदस्त तरीके से गूंज रहा है।

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से लेकर तमाम बड़े नेता और राज्य इकाई के अध्यक्ष सतीश पूनिया, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ समेत तमाम लोग सरकार के ऊपर हमलावर हैं।

वहीं, राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे की रहस्यमई चुप्पी सबको अखर रही है। तकरीबन सभी मुद्दों पर ट्विटर और फेसबुक पोस्ट के जरिए सक्रिय रहने वाली वसुंधरा राजे इन दिनों रहस्यमई रूप से बिल्कुल चुप हैं।

वसुंधरा राजे की स्थिति को सीधे तौर पर अशोक गहलोत की सरकार के पक्ष में समझा जा रहा है। राजनीति के जानकारों का कहना है कि वसुंधरा राजे जब भी अशोक गहलोत की सरकार के ऊपर संकट आता है, तभी इसी तरह से सोशल मीडिया से गायब हो जाती हैं।

इससे पहले जब जुलाई अगस्त के महीने में अशोक गहलोत की सरकार गिरने की नौबत आई थी, तब भी वसुंधरा राजे के द्वारा राज्य की अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया गया था।

भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व और राज्य नेतृत्व दोनों ही अशोक गहलोत की सरकार के द्वारा कथित तौर पर करवाई गई विधायकों और सांसदों की फोन टैपिंग को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से इस्तीफा मांग रहा है, तो दूसरी तरफ से वसुंधरा राजे इन दिनों ट्विटर और फेसबुक दोनों से गायब हैं।

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वसुंधरा राजे की इस चुप्पी के कई मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वसुंधरा राजे ऐसे वक्त में कभी नहीं बोलती हैं, जब अशोक गहलोत की सरकार के ऊपर किसी भी तरह का राजनीतिक संकट आता है।

आपको याद होगा नागौर के सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल कई बार कह चुके हैं कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

ऐसे में अगर हनुमान बेनीवाल के इस बयान को वर्तमान संकट से जोड़कर देखा जाए तो सीधे तौर पर यही समझ में आता है कि अशोक गहलोत की सरकार को बचाने के लिए ही वसुंधरा राजे चुप हैं।

बहरहाल, अशोक गहलोत की सरकार के द्वारा विधानसभा में बयान देकर कहा गया है कि किसी भी जनप्रतिनिधि का फोन टेप नहीं किया गया है, बल्कि दो बदमाशों के फोन टेप किए गए थे, जो विस्फोटक ले जाने और तस्करी के मामलों में शामिल हैं।