लगता है अशोक गहलोत की सरकार के गिरने का समय आ गया है?

-फोन टेपिंग कांड मामले में गतिरोध टूटा, विधानसभा में चल रहा बीजेपी विधायकों का धरना खत्म

जयपुर। राजस्थान सरकार के द्वारा कथित तौर पर जनप्रतिनिधियों के फोन टैपिंग करने के मामले में राजस्थान राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार के गिरने का समय आ गया है? यही सवाल सियासी गलियारों में मंगलवार को सबसे बड़ा रहा।

राजस्थान विधानसभा के भीतर बुधवार को फोन टैपिंग मामले में चर्चा के लिए विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी तैयार हो गए हैं, तो दूसरी तरफ से संसद में भी इसी मामले को लेकर बुधवार को चर्चा होनी है।

मजेदार और गंभीर बात यह है कि भाजपा की तरफ से संसद में सभी सदस्यों को उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी की गई है। इससे स्पष्ट है कि राजस्थान में कोई बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा होने वाला है।

हालांकि, विधानसभा में मंगलवार को दिनभर चला गतिरोध रात को खत्म हो गया। स्पीकर जोशी ने इस मामले में चर्चा का आश्वासन दिया, जिसके बाद भाजपा विधायकों ने सदन में चल रहा धरना खत्म कर दिया।

दूसरी तरफ भाजपा विधायक मदन दिलावर के सात दिन के निष्कासन को लेकर स्पीकर ने उन्हें ‘ना-पक्ष लॉबी’ तक आने की अनुमति दी है। सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद उन्हें सदन में लाने पर फैसला होगा।

धरना खत्म होने के बाद भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनियां ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि स्पीकर सीपी जोशी ने आश्वासन दिया है कि बुधवार को प्रश्नकाल के बाद शून्यकाल में भाजपा नेता फोन टैपिंग पर बोलेंगे। इसके बाद सरकार की ओर से सदन में जवाब दिया जाएगा।

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पूनियां ने कहा कि फोन टैपिंग का मुद्दा तो पहले भी बड़ा था, मगर अगस्त 2020 के सवाल का जवाब अब आया है, जो जवाब मांगा गया था, वैसा सरकार ने नहीं दिया, लेकिन फोन टैपिंग की बात का कबूलनामा सरकार की नीयत पर संदेह पैदा करता है।

उन्होंने कहा कि सरकार के द्वारा दिये गए प्रश्न के जवाब ने फिर से इस मुद्दे को जिंदा किया। पूनिया ने कहा कि हमने यह लाजमी समझा कि सरकार इसका जवाब दे और जवाब भी तब दे, जब चर्चा की जाए। हमने यह मांग की और इस पर स्पीकर जोशी के रिक्वेस्ट करने के बाद गतिरोध हो गया।

इधर, लोकसभा में भी मंगलवार को यह मामला उठा और बुधवार को राज्यसभा में यह मामला गूंजेगा। जिस तरह से भाजपा इस मामले को लेकर आक्रामक रूख अपनाए हुए हैं, उससे स्पष्ट है कि राजस्थान की राजनीति में आने वाले एक-दो दिन में बड़ा राजनीतिक भूचाल खड़ा हो सकता है।

यह भी हो सकता है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को 1988 में कर्नाटक के मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े की तर्ज़ पर इस्तीफा देना पड़ जाए। हालांकि, नेताओं में अब वो नैतिकता नहीं रही है कि इस गंभीर मुद्दे पर इस्तीफा दे दे, किन्तु भाजपा यही मांग कर रही है।