मुख्यमंत्री अशोक गहलोत में थोड़ी सी शर्म बाकी है, तो उनको तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए: पूनियां

– जनप्रतिनिधियों के फोन टैपिंग मामले में भाजपा ने सीबीआई जांच की मांग की है।

पिछले साल जुलाई-अगस्त के महीने में जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच में राजनीतिक तौर पर लड़ाई शुरू हुई थी, उस वक्त कई विधायकों के और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का फोन टैपिंग होने का मामला सामने आया था।

लेकिन तब राजस्थान की सरकार और खुद मुख्यमंत्री ने भी विधानसभा के भीतर दावा किया था कि किसी भी जनप्रतिनिधि का फोन टैपिंग नहीं हुआ है लेकिन अब राज्य सरकार के द्वारा पूर्व मंत्री और मालवीय नगर विधायक कालीचरण सराफ के अगस्त 2020 में लगे सवाल का जवाब देते हुए कहा है कि सक्षम अधिकारी की अनुमति के बाद फोन टेप किए गए थे।

हालांकि, यह नहीं बताया गया है कि जनप्रतिनिधियों के फोन टेप हुए थे और इसमें कितने लोगों के नाम हैं। जैसे ही इस सवाल का जवाब सामने आया उसके बाद से भाजपा आक्रामक हो गई है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के द्वारा जयपुर स्थित भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से इस मामले पर नैतिकता के नाते इस्तीफा मांगा है।

सतीश पूनिया ने बहन-बेटियों के साथ हो रहे बलात्कार, गैंगरेप और शारीरिक उत्पीड़न को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सतीश पूनिया ने कहा कि राजस्थान भारतभर में अपराधों की राजधानी बन गया है और बेटियां राजस्थान में सुरक्षित नहीं हैं, आए दिन महिलाओं के साथ सड़क पर और यहां तक थानों में भी बलात्कार हो रहे हैं।

इसके साथ ही सतीश पूनिया ने कहा कि पिछले साल जब यह मामला तूल पकड़ा था, तभी खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सदन के भीतर वक्तव्य दिया था कि किसी भी जनप्रतिनिधि का फोन टेप नहीं किया गया है, किंतु अब सरकार के द्वारा ही लिखित जवाब दिया गया है, जिसमें सरकार ने स्वीकार किया है कि फोन टैपिंग किये गए थे।

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सतीश पूनिया ने इस मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सवालों के घेरे में लेते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री गहलोत में अगर थोड़ी सी भी शर्म बची है, तो तुरंत प्रभाव से गृह मंत्री और मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

इसके साथ ही सतीश पूनियां ने कहा है कि इस पूरे प्रकरण का दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए मामला सीबीआई के सुपुर्द कर देना चाहिए, ताकि असलियत सामने आ सके। सतीश पूनिया ने कहा है कि इस मामले को लेकर प्रदेश इकाई केंद्रीय नेतृत्व के साथ लगातार संपर्क में है और जल्द ही उचित निर्णय लिया जाएगा।

एक सवाल के जवाब में सतीश पूनियां ने कहा है कि पार्टी की मंगलवार को विधायक दल की बैठक है और उस बैठक में इसके ऊपर चर्चा की जाएगी। साथ ही आगे इस मामले में किस स्तर पर क्या कदम उठाए जाना है, इसको लेकर भी निर्णय लिया जाएगा।

महिला उत्पीड़न को लेकर बढ़ रहे है मामलों को देखते हुए उन्होंने कहा है कि आने वाले दिनों में भाजपा राज्य सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरेगी और बड़ा आंदोलन करेगी।

इससे पहले फोन टैपिंग के मामले को लेकर भाजपा की तरफ से राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली में भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई है, जिसमें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की गई है।

गौरतलब है कि जुलाई और अगस्त के महीने में जब अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंदी शुरू हुआ था, तब फोन टैपिंग होने के कई मामले सामने आए थे।

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मीडिया में चली खबरों के बाद सरकार के द्वारा सचिन पायलट के मीडिया मैनेजर लोकेंद्र सिंह और एक टीवी चैनल के संवाददाता के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करवाया गया था, जिसको सरकार ने बाद में वापस भी ले लिया था।

विधानसभा में फोन टैपिंग का सवाल लगाने वाले मालवीय नगर विधायक कालीचरण सराफ का कहना है कि जो जवाब उनके द्वारा मांगा गया था, उसका उत्तर नहीं दिया गया है और सरकार के द्वारा जो जवाब दिया गया है, वह सब गोलमाल है।

सियासी गलियारों में चर्चा है कि अब, जबकि सचिन पायलट समर्थकों के द्वारा विधानसभा के भीतर सरकार के खिलाफ बगावती तेवर दिखाए जा रहे हैं, तब जानबूझकर सरकार के द्वारा इस सवाल का जवाब दिया गया है, ताकि फोन टैपिंग की संभावना जिंदा होने के कारण सचिन पायलट खेमे के विधायक दबाव में रहे हैं और सरकार के खिलाफ बोलने से बचें।

माना जा रहा है फोन टैपिंग मामला फिर से सामने आने के बाद राज्य की अशोक गहलोत सरकार को सदन के भीतर और सदन के बाद भी जवाब देना मुश्किल हो जाएगा।