सरकार ने माना: गहलोत-पायलट की लड़ाई में विधायकों के फोन टैप किये थे

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच जुलाई और अगस्त के महीने में जो राजनीतिक संकट खड़ा हुआ था। उस दौरान खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बार-बार कहा था कि सचिन पायलट और भाजपा नेताओं के बीच संबंध हैं, इसके उनके पास पुख्ता सबूत हैं।

भाजपा के द्वारा तभी अवैध रूप से फोन टाइपिंग करने के आरोप लगाए गए थे लेकिन सरकार ने कभी नहीं माना था। अब सरकार के द्वारा विधानसभा में लिखित जवाब दिया गया है कि सक्षम अधिकारी की अनुमति के बाद फोन टेप किए गए थे।

लिखित में नहीं मिला है जवाब

पूर्व मंत्री कालीचरण सराफ के द्वारा अगस्त में विधानसभा सत्र के दौरान सवाल लगाया गया था, जिसका जवाब अभी तक कालीचरण को लिखित में नहीं दिया गया है, लेकिन विधानसभा की वेबसाइट पर डाला गया है, जिसमें स्वीकार किया गया है कि सरकार के द्वारा फोन टेप किए गए थे।

हमसे बात करते हुए पूर्व मंत्री और माली नगर विधायक कालीचरण सराफ ने कहा है कि उनके पास अभी तक लिखित में कोई जवाब नहीं आया है, ऐसे में इस मामले पर वह कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं।

गहलोत ने जोर देकर दवा किया था

आपको बता दें कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जुलाई और अगस्त के महीने में जब कांग्रेस पार्टी में राजनीतिक संकट खड़ा हुआ था, तब पत्रकारों के सामने बार-बार बयान दिया था और कहा था कि भाजपा नेताओं और सचिन पायलट के समर्थकों के बीच संबंध है, इसके पुख्ता सबूत उनके पास हैं, अगर सबूत नहीं हुए तो वह राजनीति छोड़ देंगे। तब ऐसा माना जा रहा था कि सरकार फोन टेप करवा रही है।

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पायलट के मीडिया मैनेजर पर मुकदमा दर्ज हुआ था

हालांकि, इस मामले में सचिन पायलट के मीडिया मैनेजर लोकेंद्र सिंह और एक अन्य पत्रकार के खिलाफ सरकार के द्वारा मुकदमा दर्ज करवाया गया था। कहा गया था कि इन दोनों के द्वारा गलत तरीके से खबरें प्रसारित की गई है, क्योंकि फोन टैपिंग जैसा कोई मामला नहीं हुआ है। बाद में सरकार ने दोनों के खिलाफ करवाया गया मुकदमा भी वापस ले लिया था।

राजनीति और होगी गरम

फोन टैपिंग का यह प्रकरण खुलने के बाद राजस्थान की राजनीति में और विवाद बढ़ने की संभावना है। माना जा रहा है कि विधानसभा सत्र चल रहा है। ऐसे में सत्र के दौरान भाजपा सरकार को घेरने का काम करेगी।

कालीचरण सराफ का सवाल:

कालीचरण सराफ ने पूछा था कि क्या यह सही है कि विगत दिनों में फोन टेप किए जाने के प्रकरण सामने आए हैं? यदि हां तो किस कानून के अंतर्गत और किसके आदेश पर पूरा विवरण सदन की मेज पर रखें।

इसके जवाब में सरकार ने कहा कि लोगों की सुरक्षा या कानून व्यवस्था को खतरा होने पर सक्षम अधिकारी की अनुमति लेकर फोन सर्विलांस पर टाइप किए जाते हैं। भारतीय तार अधिनियम 1885 की धारा 5(2) और आईटी एक्ट की धारा 69 में दिए गए प्रावधानों के अनुसार फोन टेप किए जाते हैं।

राजस्थान पुलिस ने इन प्रावधानों के तहत ही सक्षम अधिकारी से मंजूरी लेकर फोन टेप किए हैं। सर्विलांस पर लिए गए फोनों की मुख्य सचिव के स्तर पर बनी समिति समीक्षा करती है। अब तक नवंबर के फोन सर्विलांस और टाइपिंग के मामलों की समीक्षा की जा चुकी है।

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केंद्रीय मंत्री और राजस्थान के मंत्रियों की फोन टेप हुए

गौरतलब है कि सरकार के ऊपर जब संकट आया था, तब केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और के साथ ही राजस्थान के पर्यटन मंत्री रहे विश्वेंद्र सिंह के साथ विधायक भंवरलाल शर्मा के फोन टेप हुए थे, उनके ऑडियो जारी किए गए थे।