राजस्थान में कांग्रेस की सरकार एवं कांग्रेस का संगठन अंतिम सांस ले रहे है

जयपुर। राजस्थान कांग्रेस के भीतर मची खलबली और खेमेबाजी का लाभ सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां के द्वारा आज एक लिखित बयान जारी कर कहा गया है कि “राजस्थान में कांग्रेस की सरकार एवं कांग्रेस का संगठन अंतिम सांस ले रहे है।”

भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनियां के द्वारा अपने फेसबुक वॉल पर एक लाइन के इस बयान से काफी कुछ समझने/ समझाने को मिल जाता है। खासतौर से जब पिछले दिनों विधानसभा के भीतर बैठक की व्यवस्था को लेकर सचिन पायलट गुट के विधायकों के द्वारा खुलेआम बगावती तेवर दिखाए गए हैं।

माना जा रहा है कि जिस तरह से राजस्थान की कांग्रेस के भीतर कर वक्त पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की निराशापूर्ण बयानबाजी और संगठन को लेकर किसी भी तरह की कोई हलचल पैदा नहीं करना सीधे तौर पर भाजपा को फायदा दिलाता हुआ नजर आ रहा है।

क्या मायने हो सकते हैं इस बयान के

अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच कांग्रेस की एक बार फिर से खुलकर सामने आए गुटबाजी के बाद भाजपा के अध्यक्ष सतीश पूनिया का यह बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, किंतु राजनीति के जानकारों का कहना है कि सतीश पूनिया बेवजह इस तरह का बयान जारी नहीं कर सकते हैं, इसके पीछे कोई बड़ा आधार ह।

रविवार को दोपहर करीब 1:00 बजे सतीश पूनिया के द्वारा जब अपने फेसबुक वॉल पर यह बयान लिखा गया, तो उसके बाद से ही कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी, विधायक मंत्री और कार्यकर्ता भी अपनी-अपनी तरह से इसको समझने का प्रयास कर रहे हैं।

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विधानसभा में कांग्रेस आपस में लड़ती है

विधानसभा के भीतर विधायकों के बैठने की नई व्यवस्था को लेकर जिस तरह से सचिन पायलट के समर्थक विधायक रमेश मीणा, मुरारी लाल मीणा और वेद प्रकाश सोलंकी के द्वारा आपत्ति जताते हुए बयानबाजी की गई है, उसके बाद कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर से खुलकर सामने आ गई है।

अभी तक की खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत या फिर सचिन पायलट की तरफ से किसी तरह का कोई बयान नहीं दिया गया है, किंतु इसके बावजूद सतीश पूनिया के द्वारा लिखी गई एक लाइन के कई मायने निकलते हैं। खासतौर से इसलिए भी, क्योंकि पिछले दिनों वसुंधरा राजे के द्वारा शक्ति प्रदर्शन किया करने का प्रयास किया गया था, लेकिन नहीं हो पाने के चलते इससे न केवल वसुंधरा राजे के खेमे को, बल्कि अशोक गहलोत को भी बड़ा झटका लगा है।

गहलोत वसुंधरा का गठजोड़ सामने

राजनीति के जानकारों का कहना है कि पिछले एक साल के दौरान जब से वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत के कथित गठजोड़ की बातें खुलकर सार्वजनिक हुई हैं, उसके बाद से वसुंधरा राजे की हार अशोक गहलोत की हार और अशोक गहलोत की हार वसुंधरा राजे की हार के रूप में देखी जाने लगी हैं।

इस्तीफा देने को तैयार विधायक

ऐसे में सतीश पूनिया के द्वारा दिए गए इस बयान को अशोक गहलोत की हार के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि सचिन पायलट का खेमा वैसे ही बगावती तेवर अपनाए हुए है और आगामी दिनों में रमेश मीणा के द्वारा राहुल गांधी से समय मांगा गया है। रमेश मीणा ने कहा है कि अगर उनको समय नहीं दिया गया तो वह इस्तीफा दे सकते हैं।

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सतीश पूनिया सचिन पायलट के गहरे संबंध

मामला चाहे जो भी हो लेकिन सतीश पूनिया के द्वारा कम शब्दों में लिखी गई बात राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार और संगठन दोनों के लिए चिंताजनक है। खास तौर से इसलिए, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि सतीश पूनिया और सचिन पायलट के अच्छे संबंध होने के कारण कांग्रेस की कई बातें ऐसी हैं, जो सतीश पूनिया को पता चल जाती हैं, इसके चलते इस बयान को भी उसी तरह से लिया जा रहा है।

कांग्रेस के लोग भाजपा में शामिल हो सकते हैं

पिछले एक साल के समय की बात की जाए तो देश भर में कांग्रेस के 170 विधायक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टियों में शामिल हुए हैं, जिनमें से सर्वाधिक भाजपा में गए हैं। ऐसे में कुछ लोगों का यह भी मानना है कि आने वाले दिनों में राजस्थान में भी अगर कोई बड़ा परिवर्तन हो जाए तो आश्चर्यजनक बात नहीं होनी चाहिए।