ग्रेटर निगम में ठेकेदारों को जल्द होगा करोड़ों रुपयों का भुगतान, ACB नजर रखें: डॉ. सौम्या गुर्जर

-ग्रेटर निगम की महापौर ने एसीबी महानिरीक्षक को पत्र लिखकर अफसरों की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।

जयपुर। ग्रेटर नगर निगम में ठेकेदारों के भुगतान में भ्रष्टाचार का चेहरा उजागर करने के लिए महापौर डॉ. सौम्या गुर्जर ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को पत्र लिखा है। नगर निगम के इतिहास में यह पहला मामला है, जब किसी महापौर ने अपने ही अधिकारी-कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल उठा कर जांच की मांग रखी है।

मेयर के इस पत्र के बाद मुख्यालय में से लेकर जोन ऑफिस में भी खलबली मची हुई है। दरअसल, डॉ. सौम्या गुर्जर ने एसीबी के महानिरीक्षक बीएल सोनी को पत्र लिखकर कहा है कि नगर निगम में जल्द ही ठेकेदारों, निजी फर्मों, एजेंसियों को करोड़ों रुपए का भुगतान होने वाला है।

बिलों की भुगतान में बड़े स्तर पर गड़बड़ी होने का अंदेशा है, इसलिए एसीबी इसकी जांच करें और दोषियों को ट्रैक करें। हालांकि, अभी तक एंटी करप्शन ब्यूरो के पास यह पत्र पहुंचा नहीं है। महापौर के इस पत्र ने उन आरोपों को जिंदा कर दिया है, जो पट्टे आवंटन बिल भुगतान और टेंडर प्रक्रिया को लेकर नगर निगम के अवसरों पर लगाए जाते रहे हैं।

महापौर डॉ सौम्या गुर्जर ने बताया कि आमजन को भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने के लिए एंटी करप्शन ब्यूरो से सहयोग मांगा गया है। प्लानिंग शाखा में पट्टे आवंटन और नामांतरण की फाइलें बीते 10-10 सालों से अटकी पड़ी हैं, आखिर इतने लंबे समय तक फाइलों को रोकने का क्या कारण है?

पीड़ित लोगों को बेवजह चक्कर कटवा रहा है। कई शिकायतें मिली हैं कि अधिकारी और मिले हुए हैं, जो फाइल क्लियर करने की एवज में पैसे मांगते हैं। ऊंचे रसूख के बलबूते ये लोग कुर्सी पर बैठे हुए हैं।

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बता दें कि वर्ष 2017 में निगम के अधिकारी ट्रेप हुए थे। उस समय सामने आया था कि किस तरह यहां भ्रष्टाचार फैला हुआ था। निगम के बाबू से लेकर सर्किल ऑफिसर तक कितना-कितना कमीशन बंटा हुआ था, जिससे निगम की हिसाब खराब हुई है।

पहले ही दिन इरादे स्पष्ट कर चुकी हैं महापौर

आपको बता दें कि डॉ. सौम्या गुर्जर ने जब महापौर का कार्यभार संभाला था, उसी वक्त पत्रकारों से बात करते हुए अपने इरादे स्पष्ट किए थे। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तर्ज पर “ना तो खाएंगी, और ना किसी को खाने देंगी”, भ्रष्टाचार मुक्त निगम के संकल्प रखेगी उन्होंने महाराणा प्रताप के रणभूमि से लाई गई मिट्टी माथे से लगाई थी।

अवैध निर्माण की फाइलें दबाने वाले जेईएन के खिलाफ हुई कार्रवाई

ग्रेटर नगर निगम के मालवीय नगर जोन में जिस कनिष्ठ अभियंता अनिल बेरवा ने अवैध अतिक्रमण की 40 फाइलें बीते तीन-चार महीने से दबा रखी थीं। उसके खिलाफ महापौर द्वारा कार्रवाई के निर्देश के बावजूद भी कमिश्नर जगमित्र सिंह देव ने कोई एक्शन नहीं लिया।

सूत्रों के मुताबिक डॉ सौम्या गुर्जर ने गत गुरुवार को जब मालवीय नगर जोन का औचक निरीक्षण किया था, तब जेईएन के पास 40 पत्रावली अमित मिली थीं। बैरवा खुद भी सीट से गायब था, जब फोन करके इसकी लोकेशन मंगवाई तो वह राजापार्क निकला, जबकि वह खुद दुर्गापुरा किसी का सर्वे करने की बात कहकर गया था। बाद में उसने कहा कि अतिक्रमण चिन्हित करने गया था।

बिना पैसे दिए प्लानिंग शाखा से कोई फाइल नहीं निकलती है

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महापौर डॉ. सौम्या गुर्जर के साथ-साथ कांग्रेस नेता और नगर निगम मुख्य सचेतक रहे गिर्राज खंडेलवाल ने भी अफसरों पर खुलेआम आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि प्लानिंग शाखा के अधिकारी और बाबू मिले हुए हैं, यहां बिना पैसे दिए कोई फाइल नहीं निकलती, चाहे पट्टा आवंटन का मामला हो या फिर नाम है स्थानांतरण, भूखंड विभाजन का, अधिकारी-बाबू भू पट्टों में गड़बड़ी कर रहे हैं।

लगातार इसकी शिकायतें आई हैं। पहले भी फर्जी पट्टे दिए जाने का मामला सामने आ चुका है, जब अफसरों की पोल खुली तो उन्होंने अपने आप को सही साबित करने के लिए फर्जी पट्टे निरस्त किए थे। प्लानिंग साथ में 8-10 साल पुरानी फाइलें लंबित पड़ी हुई हैं।

अधिशासी अभियंता व ठेकेदार को टाइप कर चुकी है एसीबी

हेरिटेज नगर निगम में पिछले साल अधिशासी अभियंता शेर सिंह चौधरी और ठेकेदार गोपी अग्रवाल गिरफ्तार हुए थे। शेर सिंह ने यह रिश्वत ठेकेदारों को बिल फाइल करवाने की एवज में ली थी। यह मामला काफी चर्चाओं में रहा था।

सूत्रों के मुताबिक इस तरह ACB ने पहले भी शहर नगर निगम में उद्यान शाखा और विद्युत शाखा की फाइलें जप्त की थीं। विद्युत शाखा द्वारा एयर कंडीशनर बाजार कीमत से काफी ज्यादा रेट पर ठेकेदार से खरीदे गए थे, इस मामले की जांच अभी भी पेंडिंग ही है।