54 हज़ार लेक्चरर, 8 हज़ार पटवारियों के बाद 27 हज़ार पंचायत सहायक भी 21 से धरने पर

जयपुर। राजस्थान की सरकार को अभी केवल सवा 2 साल का वक्त पूरा हुआ है और इस सवा 2 साल के दौरान ही राज्य में anti-incumbency की हालत यह है कि प्रदेश भर के 54,000 से ज्यादा स्कूल लेक्चरर, 8000 से ज्यादा पटवारी, 10 लाख से ज्यादा बेरोजगार धरने प्रदर्शन और अनशन पर बैठे हैं, तो दूसरी तरफ 21 मार्च से राज्य के 27,000 पंचायत सहायक भी जयपुर के शहीद स्मारक पर धरना देने जा रहे हैं।

राजस्थान विद्यार्थी मित्र पंचायती सहायक एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र चौधरी ने बताया कि राज्य सरकार को 27,000 पंचायती सहायकों का वेतनमान ₹6000 से बढ़ाकर ₹12,000 करने के लिए कई बार लिखा जा चुका है, निवेदन किया जा चुका है, लेकिन अभी तक भी इसको लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है।

संगठन के प्रदेश संयोजक अशोक सिहाग का कहना है कि पिछले दिनों ही पंचायती राज विभाग के द्वारा सभी पंचायती सहायकों के लिए करीब 389 करोड रुपए सालाना बजट का प्रावधान करने के लिए वित्त विभाग को लिखा गया था, लेकिन इस बारे में अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।

अशोक सियाग का कहना है कि राज्य की सत्ता में आने से पहले अशोक गहलोत ने खुद मध्य प्रदेश की तर्ज पर संविदा कर्मियों को नियमित करने का वादा किया था किंतु राज्य सरकार के गठन को सवा 2 साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, इसके बावजूद राज्य में अभी तक भी पंचायती सहायक केवल ₹6000 मानदेय पर काम कर रहे हैं, जो भी 3 महीने और 4 महीने के अंतराल में आते हैं।

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इससे पहले जयपुर के शहीद स्मारक पर 54000 से ज्यादा विद्यालय व्याख्याता 8000 से अधिक पटवारियों का धरना और अनशन भी चल रहा है। व्याख्याताओं के धरने में शामिल प्रदेश अध्यक्ष मोहन सियाग और प्रदेश प्रवक्ता अशोक जाट की अनशन के कारण आवेदन तबीयत खराब होने के बाद शनिवार को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।