सचिन पायलट के साथ ही 3 विधायकों ने इस्तीफे की धमकी दी है

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच राजनीतिक तौर पर प्रतिद्वंद अभी तक खत्म नहीं हुआ है। करीब 8 महीने बाद दोनों नेताओं के गुट में फिर से टकराव होने की स्थिति सामने आ रही है।

राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र चल रहा है और इस दौरान सचिन पायलट के खेमे से माने जाने वाले रमेश मीणा, मुरारी लाल मीणा, वेद प्रकाश सोलंकी, हरीश मीणा समेत कई विधायकों ने राज्य की अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया।

कोरोनावायरस की वैश्विक महामारी के चलते राजस्थान विधानसभा में बैठक की व्यवस्था बदली गई थी। इसको लेकर सदन में 50 विधायकों को ऐसी जगह पर बैठने की व्यवस्था की गई, जिनकी सीटों पर माइक नहीं लगी हुई है।

इन विधायकों का कहना है कि विधानसभा के माध्यम से राज्य सरकार के द्वारा sc-st और अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले विधायकों की आवाज बंद की जा रही है।

इस प्रकरण को लेकर पूर्व मंत्री, विधायक रमेश मीणा व विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के बीच सदन के भीतर ही तकरार भी हो चुकी है। 2 दिन पहले ही राजस्थान विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान रमेश मीणा को अपनी सीट पर प्रश्न बोलने की अनुमति नहीं दी गई।

रमेश मीणा ने इसको लेकर पहले विधानसभा अध्यक्ष से टकराव किया और उसके बाद सीधा राज्य सरकार के मुख्य सचेतक महेश जोशी को आड़े हाथों लिया है। रमेश मीणा ने इस प्रकरण को लेकर राहुल गांधी से मिलने का समय मांगा है।

रमेश मीणा ने यह भी कहा है कि राहुल गांधी से मिलकर वह अभिव्यक्ति की आजादी दबाने और उनके साथ भेदभाव किए जाने का मामला उठाएंगे और जरूरत पड़ने पर इस्तीफा देंगे।

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रमेश मीणा के साथ ही कांग्रेस के दूसरे विधायक मुरारी लाल मीणा का आरोप है कि राज्य की सरकार में उनके कार्य नहीं हो रहे हैं और उनके इस विधानसभा क्षेत्र में थानेदार भी उनको पूछ कर नहीं लगाए जाते हैं।

विधानसभा के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए चाकसू के विधायक वेद प्रकाश सोलंकी का कहना है कि विधानसभा में जो बैठक की व्यवस्था की गई है, उसको लेकर अब गौर किया गया है, जिसमें सामने आता है कि एससी-एसटी और अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले विधायकों के साथ बैठने की व्यवस्था में भेदभाव किया गया है।

सचिन पायलट के खेमे से माने जाने वाले इन विधायकों के द्वारा राज्य की अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ बागी तेवर दिखाने के बाद राज्य में राजनीति एक बार फिर से गरमा गई है। माना जा रहा है कि 4 सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले अशोक गहलोत की सरकार और कांग्रेस पार्टी दोनों को इसके चलते बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।