मुख्यमंत्री बनाने के सवाल पर सतीश पूनियां ने क्या दिया जवाब?

मैं अपने मिजाज से काम करूंगा, आलाकमान करेगा फैसला बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तीन दिवसीय प्रवास पर मेवाड़ संभाग में थे। सतीश पूनियां ने कहा कि मैं अपने मिजाज से काम करूंगा। मेरे काम का फैसला आलाकमान करेगा। सतीश पूनियां की मेवाड़ संभाग की यात्रा के दौरान जब प्रेस वार्ता के दौरान वक्त मुख्यमंत्री का चेहरा किसको बनाया जाएगा, का सवाल पूछा गया तो उन्होंने बेहद संजीदगी से जवाब दिया।

सवाल: 4 सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं। बीजेपी की कैसी स्थिति है ?

भारतीय जनता पार्टी ने उपचुनाव की तैयारियां बहुत पहले ही शुरू कर दी थीं। हमारे जमीनी स्तर पर काम करने वाले संगठन इस बार पूरी तरह सक्रिय है। मैं खुद भी चारों विधानसभा क्षेत्रों में जाकर आया हूं। जहां मैंने देखा है कि आम जनता के बीच कांग्रेस के खिलाफ भारी आक्रोश है। इसे देख मैं आश्वस्त हूं, कि इस बार बीजेपी को चारों सीटों पर जीत मिलेगी।

सवाल: वसुंधरा राजे जन्मदिन के नाम पर शक्ति प्रदर्शन कर रही हैं। भाजपा के सांसद-विधायक भी उसमें शामिल हैं, क्या कहेंगे ?

मुझे कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि राजनीति में काफी लोग अपना जन्मदिन मनाते हैं। अपने शुभचिंतकों को बुलाते हैं। जन्मदिन मनाना सियासी काम नहीं है।

सवाल: कुछ नेता वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है ऐसा नहीं करने पर बीजेपी सत्ता में नहीं आएगी ?

मुख्यमंत्री के नाम का फैसला करने के लिए भाजपा नेतृत्व सक्षम है। फिलहाल राजस्थान में चुनाव बहुत दूर है। जब भी राजस्थान में चुनाव होंगे तो मुख्यमंत्री कौन होगा, उसका फैसला आलाकमान लेगा।

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सवाल: भाजपा में गुटबाजी शुरू हो गई है। आपके नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं ?

मैं खुद नहीं पार्टी ने मुझे प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। मैं अपने मिजाज से काम करूंगा। मेरे काम से कौन राजी, कौन नाराज और कौन सवाल उठाएगा इसका फैसला आलाकमान करेगा। जो सवाल उठा रहे हैं आगे उन पर भी सवाल उठेंगे। मैं तो संगठन का कार्य करता हूं और पूरी शिद्दत से काम कर रहा हूं। मेरा टाइटल बदला है, काम नहीं बदला है। मैं संगठन के लिए काम कर रहा था हूं और करता रहूंगा।

सवाल: गोविंद सिंह डोटासरा बोल रहे हैं, भाजपा में रायता फैल चुका है?

डोटासरा गलतफहमी में है, वो रायता नहीं रसमलाई थी। हमारे यहां अपने से बड़ों का सम्मान करने की परंपरा है। इस तरह के संस्कार को सियासी तौर पर नहीं देखना चाहिए। रायता तो कांग्रेस में फैल रहा है, जिसे फैले हुए 20 साल हो गए। कश्मीर से कन्याकुमारी तक उनका रास्ता बिखर ही रहा है। रायता हमारे यहां नहीं कांग्रेस में इस्तेमाल होता है, जो अब बस फैलता जा रहा है।

राजस्थान की जनता ने देखा है उनकी पार्टी में किस तरह से प्रदेश अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री को बर्खास्त किया गया। विग्रह का प्रमाण उनके यहां है। हमारे यहां सब कुछ ठीक है, जो बाकी चीजें हैं। वो सिर्फ सियासी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक सीमित है।

सवाल: उपचुनाव में क्या भाजपा परिवारवाद हावी रहेगा या पार्टी कार्यकर्ता को मौका मिलेगा ?

टिकट वितरण रंगबिरंगा काम है। इसमें कोई निश्चित पैरामीटर नहीं है, लेकिन भाजपा कोशिश करती है, पार्टी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता मिले। अंत पंत जब चुनाव होता है, तब जीतने की संभावना किस में ज्यादा है, उस आधार पर योग्य उम्मीदवार को टिकट दिया जाता है।

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