7 मार्च को भाजपा नेता दिखाएंगे अपनी-अपनी ताकत

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां 06, 07 एवं 08 मार्च को उदयपुर, प्रतापगढ़ एवं बाँसवाड़ा प्रवास पर

07 मार्च को वसुंधरा राजे भरतपुर में पूजा-अर्चना करेंगी और डॉ. सतीश पूनियां बाँसवाड़ा में त्रिपुरा सुन्दरी माताजी मन्दिर में पूजा-अर्चना करेंगे।


जयपुर। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां का 06, 07 एवं 08 मार्च को उदयपुर, प्रतापगढ़ एवं बाँसवाड़ा जिलों में प्रवास कार्यक्रम रहेगा। प्रदेश की सियासत में 7 मार्च को लेकर खूब चर्चायें हैं, इस दिन वसुंधरा राजे भरतपुर में पूजा अर्चना करेंगी और सतीश पूनियां बांसवाडा जिले में त्रिपुरा सुंदरी में पूजा अर्चना करेंगे।


डॉ. पूनियां 06 मार्च को प्रातः 8.00 बजे जयपुर से वायुयान द्वारा उदयपुर के लिए प्रस्थान कर प्रातः 10.30 बजे वल्लभनगर (उदयपुर) में संगठन के प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे एवं दोपहर 12.00 बजे युवा मोर्चा कार्यकर्ता सम्मेलन को सम्बोधित करेंगे।

उसके बाद अपरान्ह 4.00 बजे कपासन में नगर पालिकाध्यक्ष के पदभार ग्रहण कार्यक्रम को सम्बोधित करेंगे एवं रात्रि विश्राम प्रतापगढ़ में करेंगे।


07 मार्च को डॉ. पूनियां प्रातः 11.00 बजे प्रतापगढ़ में नगर परिषद प्रतापगढ़ के नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों के सम्मान समारोह को सम्बोधित करेंगे।

उसके बाद दोपहर 12.30 बजे घाटोल में डॉ. पूनियां कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों से संवाद करेंगे। उसके बाद डॉ. पूनियां अपरान्ह 3.00 बजे बाँसवाड़ा में त्रिपुरा सुन्दरी माताजी मन्दिर में पूजा-अर्चना करेंगे।

उसके बाद अपरान्ह 3.30 बजे बाँसवाड़ा में कार्यकर्ताओं के साथ चाय पर चर्चा करेंगे एवं रात्रि विश्राम उदयपुर में करेंगे। 08 मार्च को डॉ. पूनियां प्रातः 9.20 बजे उदयपुर से वायुयान द्वारा प्रस्थान कर जयपुर पहुँचेंगे।


कोरोनाकाल में जनता और कार्यकर्ताओं से दूर रहने वाली वसुंधरा राजे की राजनीतिक नींद अब टूटी और इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां ने अपनी जान जोखिम में डालकर पार्टी में नेतृत्व की शून्यता को अपनी सक्रियता से भर दिया और वे जनता एवं कार्यकर्ता और पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व की निगाहों में भी आ गए, जिसकी प्रशंसा स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा कर चुके हैं।

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सियासी गलियारों में चर्चा है कि अपने जन्मदिवस पर राजनीतिक सलाहकारों की सलाह पर महारानी को सक्रिय होने की विनाशकारी सलाह दे डाली और केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश की अवहेलना के बाद भी राजे शक्ति प्रदर्शन की कोशिश कर केन्द्रीय नेतृत्व को खुली चुनौती दे रही हैं।

उधर स्थापित हो चुके पूनियां ने वसुंधरा के शक्ति प्रदर्शन को नजरअंदाज करते हुए अपनी रणनीति बदली है और वे विधानसभा सत्र के अवकाश का उपयोग आदिवासी क्षेत्र के दौरे पर निकल कर रहे हैं, जहां वे पार्टी कार्यक्रमों को संबोधित करेंगे, कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे और रात्रि विश्राम कर कार्यकर्ताओं के बीच में रहेंगे।


डॉ. पूनियां विधानसभा में भी बजट भाषण के दौरान भी संकेत दे चुके हैं कि वे आगामी सत्र से राज्य सरकार के खिलाफ भाजपा के एक बड़े जन आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं और उपखंड स्तर पर जन समस्याओं के लिए हल्ला बोल आंदोलन का संकेत दे चुके हैं।


पूनियां प्रदेशभर में गहलोत सरकार के खिलाफ बड़े प्रदर्शन की बुनियाद रखना चाह रहे हैं, वहीं चार उपचुनाव के लिए भी जमीनी तौर पर पार्टी को तैयार कर रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पूनियां अब भविष्य में बिना तामझाम, बिना दिखावे के प्रदेश के जिलों के प्रवास की योजना भी बना रहे हैं, जहां वे प्रवास के दौरान रात्रि विश्राम को ज्यादा अहमियत देते हुये आमजन एवं कार्यकर्ताओं से संवाद कर सियासी नब्ज टटोलकर भाजपा की अभेद्य मजबूती पर फोकस करेंगे।

प्रदेश की सियासत में 7 मार्च को लेकर खूब चर्चायें हैं, इस दिन वसुंधरा राजे गिर्राज जी एवं भरतपुर में कई मंदिरों में पूजा अर्चना करेंगी और इसी दिन सतीश पूनियां बांसवाडा जिले में त्रिपुरा सुंदरी में पूजा अर्चना करेंगे। उल्लेखनीय है कि पूनियां प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद सबसे पहले गिर्राज जी पूजा-अर्चना करने गये थे।

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कोरोनाकाल में जनता और कार्यकर्ताओं से दूर रहने वाली वसुंधरा राजे की राजनीतिक नींद अब टूटी और इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां ने अपनी जान जोखिम में डालकर पार्टी में नेतृत्व की शून्यता को अपनी सक्रियता से भर दिया और वे जनता एवं कार्यकर्ता और पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व की निगाहों में भी आ गए, जिसकी प्रशंसा स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा कर चुके हैं।


सियासी गलियारों में चर्चा है कि अपने जन्मदिवस पर राजनीतिक सलाहकारों की सलाह पर महारानी को सक्रिय होने की विनाशकारी सलाह दे डाली और केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश की अवहेलना के बाद भी राजे शक्ति प्रदर्शन की कोशिश कर केन्द्रीय नेतृत्व को खुली चुनौती दे रही हैं, उधर स्थापित हो चुके पूनियां ने वसुंधरा के शक्ति प्रदर्शन को नजरअंदाज करते हुए अपनी रणनीति बदली है और वे विधानसभा सत्र के अवकाश का उपयोग आदिवासी क्षेत्र के दौरे पर निकल कर रहे हैं, जहां वे पार्टी कार्यक्रमों को संबोधित करेंगे, कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे और रात्रि विश्राम कर कार्यकर्ताओं के बीच में रहेंगे।


डॉ. पूनियां विधानसभा में भी बजट भाषण के दौरान भी संकेत दे चुके हैं कि वे आगामी सत्र से राज्य सरकार के खिलाफ भाजपा के एक बड़े जन आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं और उपखंड स्तर पर जन समस्याओं के लिए हल्ला बोल आंदोलन का संकेत दे चुके हैं।


पूनियां प्रदेशभर में गहलोत सरकार के खिलाफ बड़े प्रदर्शन की बुनियाद रखना चाह रहे हैं, वहीं चार उपचुनाव के लिए भी जमीनी तौर पर पार्टी को तैयार कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पूनियां अब भविष्य में बिना तामझाम, बिना दिखावे के प्रदेश के जिलों के प्रवास की योजना भी बना रहे हैं, जहां वे प्रवास के दौरान रात्रि विश्राम को ज्यादा अहमियत देते हुये आमजन एवं कार्यकर्ताओं से संवाद कर सियासी नब्ज टटोलकर भाजपा की अभेद्य मजबूती पर फोकस करेंगे।

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