डाॅ. पूनियां ने मोदी सरकार की लोककल्याणकारी नीतियों को विधानसभा में प्रखरता से उठाया

-भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां का विधानसभा में गहलोत सरकार के खिलाफ आक्रामक सम्बोधन। डाॅ. पूनियां ने गहलोत सरकार को सम्पूर्ण किसान कर्जमाफी, बेरोजगारी, बिगड़ी हुई कानून व्यवस्था, लम्बित भर्तियां सहित विभिन्न जनहित के मुद्दों पर आक्रामक अंदाज में घेरा।

जयपुर। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार की लोककल्याणकारी नीतियों को प्रखरता से उठाया और गहलोत सरकार को सम्पूर्ण किसान कर्जमाफी, बेरोजगारी, बिगड़ी हुई कानून व्यवस्था, लम्बित भर्तियां, राज्य की ग्राम पंचायतों के विकास हेतु रूके हुए बजट, कोटा के सरकारी अस्पताल में सैकड़ों नवजात बच्चों की मौत सहित विभिन्न जनहित के मुद्दों पर आक्रामक अंदाज में घेरा।

इस दौरान सदन में मौजूद सभी भाजपा विधायकों ने गहलोत सरकार के खिलाफ सम्पूर्ण किसान कर्जमाफी सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी भी की।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि जब भी भारत में कोरोना की त्रासदी का जिक्र होगा तो कांग्रेस पार्टी के असहयोग और भारतवर्ष को बदनाम एवं नीचा दिखाने का चरित्र हमेशा याद रहेगा।

कांग्रेस ने लाॅकडाउन में लोगों को डराने लगाने की कोशिश की, मास्क और पीपीई किट पर झूठ बोला, दीया और थाली का मजाक बनाया, मजदूरों के माइग्रेशन पर घटिया राजनीति की, वैक्सीन पर झूठ फैलाया, पीएम केयर्स फण्ड को बिना तथ्य के कठघरे में खड़ा किया। आत्मनिर्भर भारत के आँकड़ों पर भ्रम फैलाया।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत उस स्वाभिमान के साथ खड़ा हो चुका है, जिस स्वाभिमान के साथ उसे खड़ा होना चाहिए था। विदेशों से हथियार लेने वाला भारत अब लगभग 83 देशों को हथियार सप्लाई कर रहा है। विदेशों से टीके मंगाने वाला भारत अब दुनिया को वैक्सीन देने वाला देश बन गया।

डाॅ. पूनियां ने सदन में कहा कि मुख्यमंत्री महोदय ने बजट 2021-22 पेश कर खडे़ रहने, भाषण देने, पानी पीने सहित 2 घण्टे 46 मिनट का रिकाॅर्ड बनाया।

सरकार मुस्कुरा रही थी और मुस्कुराहट के पीछे प्रदेश की जनता देख रही थी कि सूर्यगढ़ में कव्वाली का दौर चला ‘‘बेवफा तेरा मुस्कुराना-भूल जाने के काबिल नहीं…’’ फिर सरकार 27 फरवरी को हैलिकाॅप्टर में मुस्कुरायी… राजस्थान की जनता को मुख्यमंत्री ने जो बजट पेश किया, उम्मीद थी कि जुगाड़ की सरकार जुगाड़ का बजट पेश करेगी, लेकिन इसके पैसे का जुगाड़ कैसे होगा, इस पेपरलेस बजट में इस बात का कहीं उल्लेख नहीं था।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि बजट एक गोपनीय दस्तावेज होता है और भारत के संसदीय परम्परा के इतिहास में कदाचित कभी ऐसे अवसर आये होंगे, या तो मुख्यमंत्री अतिउत्साहित थे या उन्हें भूलने की आदत है।

यह भी पढ़ें :  राजस्थान विश्वविद्यालय काटता है हर साल 20 हरे पेड़, कोई पेड़ नहीं लगाता

24 फरवरी 2021 को थोथी घोषणाओं, चुनावी घोषणाओं, असत्य के पुलिंदे जैसी घोषणाएं करते-करते मुख्यमंत्री पन्ना नं 10 भूल गए, यह मानवीय भूल भी हो सकती है, लेकिन मुख्यमंत्री संसदीय परम्पराओं को भंग करने के दोषी हैं।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि इस बजट की शक्ल ठीक रखने की कोशिश की हैे, लेकिन नीयत ठीक नहीं हैं, काॅस्मेटिक बजट है, सिर्फ चेहरा लिपा पुता है। यह बजट कट, काॅपी, पेस्ट है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि बजट के बाद मुख्यमंत्री कहते हैं कि हमारे पास कर्जा लेने की गुंजाइश है वित्तीय प्रबन्धन बेहतर करेंगे, लीकेज रोकेंगे ओर राजस्व अर्जन बढ़ाएंगे और घोषणाओं को पूरा करेंगे।

पिछले बजट की 28 जिलों की 61 घोषणाएं ऐसी हैं जो अभी तक पूरी नहीं हुई है, जयपुर-सिविल लाइन फाटक पर आरओबी की घोषणाएं अभी तक भी पूरी नहीं हुई हैं। आप घोषणाएं करते हैं और भूल जाते हैं, 9 साल पहले 2012-13 में दवा जाँच, ड्रग टेस्टिंग लैब जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर में खोलने की घोषणा की थी, जो आज तक पूरी नहीं हुई, इस दौरान सैंपल जयपुर लाने पड़ते हंै।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि इस बजट में मध्य प्रदेश और कर्नाटक के बजट की नकल जरूर की गई, लेकिन ‘‘नकल में भी अकल चाहिए’’ उन्होंने घोषणाओं के साथ रोडमैप भी पेश किया, लेकिन राजस्थान के बजट में 90 प्रतिशत घोषणाएं हैं, 10 प्रतिशत साॅर्सेज पर बात हुई है, कोई रोडमैप नहीं है।

बजट प्रदेश को आर्थिक आपातकाल की ओर ले जा रहा है। “Government is pushing State towards financial emergency” जब किसी प्रदेश का बजट असन्तुलित होता है तो आपातकाल की स्थिति बनती है। इस बजट का पहला असत्य यह है कि एफआरबीएम एक्ट का सीधे-सीधे उल्लंघन किया गया है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि एफआरबीएम एक्ट के अन्तर्गत राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 3 प्रतिशत होना चाहिये जो पूर्व निर्धारित था और 2020-21 में 2.99 प्रतिशत होगा, सरकार की तरफ से रिवाइज्ड एस्टीमेट 6.12 प्रतिशत हुआ, यानि दोगुना लेकिन राजकोषीय घाटे की मर्यादा कोराना के कारण 4 प्रतिशत कर दिया तो सरकार का मानना है कि यह 3.98 प्रतिशत होगा अर्थात 47 हजार 653 करोड होगा और यही इसको दोगुना करेंगे तो राजकोषीय घाटे की लिमिट क्या होगी आप अंदाजा लगा सकते हैं।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि आपातकाल इसलिए भी होगा कि यह बजट बता रहा है कि खर्चा 8 प्रतिशत बढ़ है और संशोधित अनुमानों के अनुसार प्राप्तियां 15 प्रतिशत कम होंगी और उधारियां 102 प्रतिशत होंगी, तो यह बजट घोषणाएं पूरी कैसे होगी?

यह भी पढ़ें :  भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को दिये महत्वपूर्ण सुझाव

इस बजट की देश के प्रमुख 30 राज्यों के बीच तुलना करें तो 2021-22 में कृषि के लिए बजट का 5.1 प्रतिशत हिस्सा आवंटित किया है जो अन्य राज्यों के औसत आंवटन से 6.3 प्रतिशत कृषि का बजट कम है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि राज्य बजट मंे ग्रामीण विकास के लिए 5.4 प्रतिशत किया है जो अन्य राज्यों से 6.1 प्रतिशत कम है। प्रदेश की बुनियादी व्यवस्था के लिए सबसे जरूरी सड़क और पुलों के निर्माण के लिए हिस्सा 3.4 प्रतिशत है जो अन्य राज्यों की तुलना में 4.3 प्रतिशत कम है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की हर विधानसभा क्षेत्र में 10 ट्यूबवैल और 40 हैण्डपम्प की पूर्ति हो सकती है तो राज्य सरकार इस बारे में बताये। वैट कम करने के बारे में सरकार ने कुछ नहीं कहा, निष्क्रिय सम्पŸिायों के बारे में कुछ नहीं कहा, शोध एवं वैज्ञानिक अनुसंधान के बारे में सरकार का कोई ध्यान नहीं है, इसको लेकर आपके बजट में मात्र 0.01 प्रतिशत प्रावधान है। ई-व्हीकल का जमाना है पेरिस एग्रीमेंट के मुताबिक, लेकिन आपने इस बजट में ई-व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए कुछ नहीं किया है।

मुख्यमंत्री को ‘‘मोदी फोबिया’’ है उनकी गुड माॅर्निंग और गुड नाइट मोदी सरकार को कोसने में जाती है, वे चतुराई से सियासी बयानबाजी से राज्य की जनता की सहानुभूति हासिल कर लेंगे लेकिन असत्य के पांव नहीं होते, जिस मोदी सरकार को कोसते हैं उसी सरकार की जन-धन, उज्जवला, पीएम आवास, पीएम किसान, फसल बीमा जैसी बुनियादी विकास योजनाओं से प्रदेश एवं देश की जनता और किसानों को लाभ मिल रहा है। पूरे कोरोना के कालखण्ड में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के साथ राशन सहित अनेकों योजनाओं से प्रदेश को ताकत और सम्बल दिया है।

डाॅ. पूूनियां ने कहा कि केन्द्र से पैसे का रोना रोने वाले मुख्यमंत्री के संज्ञान में रहे कि राजस्व प्राप्तियों का 42 प्रतिशत अर्थात् 76,582 करोड़ रूपये केन्द्रीय हस्तांतरण के रूप में प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त भारतमाला में 39,600 करोड़ रूपये, नेशनल हाईवे एथाॅरिटी के अनेक प्रोजेक्ट के लिए 15,880 करोड़ रूपये, रेलवे के लिए 4686 करोड रूपये, यह 2009-2014 की यूपीए सरकार का 587 प्रतिशत ज्यादा है। गरीब कल्याण रोजगार अभियान के लिए 8,715 करोड़ रूपये, 2020-21 के लिए जल जीवन मिशन के लिए 2523 करोड़ रूपये प्रधानमंत्री मोदी ने तो दे दिया, लेकिन आपने क्या दिया? भाषण, वादा, घोषणा, मुझे लगता है कि मुख्यमंत्री जादूगर के साथ-साथ घोषणाजीवी’’ हो गये।

यह भी पढ़ें :  सीमाएं सील करने के आदेश के मामले में 2 घंटे में पलट गई राजस्थान सरकार

डाॅ. पूनियां ने कहा कि कांग्रेस के 2018 के घोषणा पत्र एवं जनसभाओं में सम्पूर्ण किसान कर्जा माफी की बात कही गई, राजस्थान के दर्जनों किसानों ने कर्जमाफी से परेशान होकर आत्महत्याएं की, राज्य के बेरोजगार एवं संविदाकर्मी सड़कों पर है, कानून व्यवस्था चैपट है, हत्या, लूट, डकैती, दुष्कर्म, गैंगरेप इत्यादि 6 लाख 14 हजार मुकदमे राज्य सरकार की बानगी है, लेकिन सरकार सफाई दे रही है कि हमने एफआईआर को प्रोत्साहित किया है। 12 लाख बेरोजगार पंजीकृत हैं और आपके आँकड़ों के अनुसार 2,49,433 युवाओं को भŸाा दिया और 2,15,390 युवा बेरोजगारी भŸो के इंतजार में हैं।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि ये सरकार सिर्फ वादाखिलाफी के लिए याद की जायेगी। ‘‘राज्य के अस्पताल बीमार हंै, युवाओं में नशे का कारोबार है, स्कूल-काॅलेज बिना बजट बेकार हैं, लगता है सरकार लचर और लाचार है’’। मुख्यमंत्री ने कहा कि निगाहों में मंजिल थी, गिरे और गिर कर सम्भलते रहे, हवाओं ने बहुत कोशिश की, मगर चिराग आँधियों में जलते रहे’’। लेकिन मुझे लगता है कि इस सरकार के दीये टिम-टिमा रहे हैं और इनके बजट से स्पष्ट है कि कोई मध्यावधि चुनाव का बजट पेश कर रहे हैं।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि किसी भी सरकार के खिलाफ एन्टी इंकम्बेंसी 4-5 साल में शुरू होती है, लेकिन दो साल में ही राजस्थान की जनता ने पंचायतीराज चुनाव मंे गहलोत सरकार को आईना दिखा दिया, इसलिए सरकार को तकलीफ होगी लेकिन इसका जवाब हमारे पास नहीं है। मुख्यमंत्री हमें टोकते थे कि किस तरह भाजपा का आंदोलन होगा, लेकिन मैं आपको कहना चाहता हूँ कि अब आप आ जाइये मैदान में 06 से लेकर 14 मार्च तक प्रदेश के हर उपखण्ड स्तर पर राजस्थान की जनता का मुकाबला करने के लिए तैयार हो जाइये और अप्रैल-मई में लगभग 2 लाख लोग आपकी छाती पर राजधानी जयपुर में खड़े होकर रैली और आंदोलन करेंगे। इसलिए मैं आपको कहना चाहता हूँ कि यह आपका थोथी घोषणाओं का बजट है और ये आपकी विदाई की तैयारी है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि आपने (मुख्यमंत्री) कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि ‘‘सम्भव की सीमा जाने का एक ही तरीका है, असम्भव की सीमा से भी आगे निकल जाना’’। लेकिन मैं आपको कहना चाहता हूँ कि स्वामी विवेकानन्द ने ही कहा कि, जिस समय, जिस काम के लिए प्रतिज्ञा करो, ठीक उसी समय उसे समय पर करना चाहिए नहीं तो लोगांे का विश्वास उठ जाता है’’ ये बात मैं आपके (मुख्यमंत्री) लिए कह रहा हूँ।

( कार्यालय प्रभारी )