दो साल में एक फूटी कौड़ी का काम नहीं किया पंचायतों में

जयपुर। ग्राम पंचायतों के खाते में सरकार के द्वारा पैसा नहीं डालने को लेकर सदन में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने अशोक गहलोत सरकार को आड़े हाथों लिया। राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि प्रदेश के 12344 निर्वाचित सरपंच पंचायत समिति के समक्ष धरना दे रहे हैं।

5 तारीख को पूरे राजस्थान में सारे सरपंच जिला कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन करेंगे और उसके बाद 8 मार्च से विधानसभा के सामने अनिश्चितकालीन धरना प्रारंभ करेंगे।

आपको ध्यान होगा 73वें संविधान संशोधन के पश्चात आर्टिकल 246 में व्यापक संशोधन करके एक युग प्रारम्भ हुआ था पंचायत राज संस्थाओं के आर्थिक रूप से स्वायत्त का। इसीलिए इस आर्टिकल में जो संशोधन हुआ, उसमें केंद्र सरकार और राज्य सरकार के वित्त आयोगों के माध्यम से एक निश्चित अपने शुद्ध राजस्व के अंदर ग्राम पंचायतों के खाते में सीधे पंचायतों के क्षेत्र का पैसा डाला जाएगा।

आर्टिकल 243 एक (आई) प्रावधान किया गया कि राज्यपाल प्रत्येक 5 वर्ष के लिए राज्य वित्त आयोग का गठन करेंगे। राज्य वित्त आयोग राज्य के शुद्ध राजस्व आयके अंदर पंचायत राज संस्थाओं के लिए जाने वाले पैसों के लिए एक निश्चित प्रतिशत प्रावधान करेंगे।

5वां वित्त आयोग बना 1 अप्रैल 2015 को जो प्रावधान हुआ, उसका समय समाप्त हो गया कि 30 मार्च 2020 को। दुर्भाग्य है राजस्थान में पहली बार संविधान में प्रदत्त जो प्रावधान किए हैं, उसको धता बताकर 6ठा वित्त आयोग बना रहे हैं।

इसी कारण से वर्ष 2020-21 और 2021 के अंदर एक फूटी कौड़ी भी राजस्थान के पंचायत राज संस्थाओं के खाते में नहीं गई। बात यहीं खत्म नहीं हुई, आर्थिक समीक्षा 2021 में प्रस्तुत 57, जिसमें आपने कहा कि राज्य के कुल राजस्व के शुद्ध राजस्व में 7.08% राजा संस्थाओं को स्थानीय निकाय को 75% और 25% क हिसाब से वितरित की जाएगी।

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2019-20 के अंदर जो पैसे पंचायतों को मिलना चाहिए था, वह 2021 में जारी किया गया और किस-किस का 2019-20 का पैसा किसका जारी होने पर 2019-20 में जारी किया, मैं नहीं कह रहा कि आर्थिक समीक्षा की है।

आपने जारी की और उसमें 31 दिसंबर तक खर्च 2267 करोड़ जारी किए, खर्च हुए 434 करोड़ रुपये, उसमें भी ग्राम पंचायतों में एक पैसा खर्च नहीं हुआ। 293 करोड़ रुपये पंचायत सहायकों को मानदेय दिया और 49 करोड़ रुपये आपने जो कोविड-19 स्पेशल हो गया दो वर्षों में एक काम नहीं हुआ।

ग्राम पंचायतों में एक पैसा नहीं गया और इसी कारण से आज किसी भी गांव के अंदर एक भी काम अगर इस सरकार के आने के बाद बता दो तो आपको मैं सजा खाने के लिए तैयार हूं।

उसमें 2020 में क्योंकि आपने खाते के अंदर तक ट्रेजरी के खाते में राशि जमा कराने का फैसला कर लिया, मैं समझता हूं जिस पंचायत संस्थानों का शुभारंभ जिला नागौर से हुआ, उसको आप खत्म करने पर तुले हो।

आप जवाब मत दो, लेकिन कम से कम जीरो हावर में सदन में मौजूद रहो। 8 मार्च को सरपंच अनिश्चितकालीन के लिए धरना देंगे और आपको धत्ता बताएंगे।