राजेन्द्र राठौड़ ने कहा: वसुंधरा की यात्रा में नहीं जाएंगे, मोक्ष के समय निकाली जाती हैं धार्मिक यात्राएं: कल्ला

जयपुर। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया की धार्मिक यात्राओं ने सियासी तूल पकड़ लिया है। धर्म के सहारे सियासत साधने के लग रहे आरोपों के बीच अब बीजेपी और कांग्रेस में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है।

उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने वसुंधरा राजे की धार्मिक यात्रा को बेहद निजी यात्रा करार दिया, तो वहीं साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि वे खुद इस यात्रा में शामिल नहीं होंगे।

दूसरी ओर सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉक्टर बी डी कल्ला ने वसुंधरा की धार्मिक यात्रा पर यह कहते हुए निशाना साधा है कि धार्मिक यात्राएं तो मोक्ष के लिए निकाली जाती हैं, इसके लिए उन्होंने भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण भी दे डाला और कहा उन्होंने भी अपने गुजरने से 2 महीने पहले सन 84 में राजस्थान के माउंट आबू में एक गुप्त रुद्राभिषेक किया था।

राजस्थान में दो बार मुख्यमंत्री रह चुकी वसुंधरा राजे सिंधिया तीसरी बार फिर से अपना सियासी धरातल तलाशने में जुटी हैं और हर बार की तरह इस बार भी वसुंधरा राजे देव दर्शन यात्रा करने जा रही हैं। जिसकी शुरुआत उन्होंने विभिन्न मंदिरों में देव दर्शन से कर दी है।

गोविंददेवजी मंदिर से इसकी शुरुआत भी हो गई है। 8 मार्च से वसुंधरा राजे ब्रज चौरासी क्षेत्र से देव दर्शन की बड़ी यात्रा निकालने जा रही हैं । गोवर्धन परिक्रमा क्षेत्र में वसुंधरा राजे के पूर्व मुख्यमंत्री काल में काफी विकास हुआ था। ऐसे में वसुंधरा को उम्मीद है कि वहां की धार्मिक यात्रा से उन्हें जो अपार जन समर्थन मिलेगा, उससे जनाधार भी पार्टी आलाकमान और वरिष्ठ नेताओं को दिख जाएगा। ताकि राजे की सूबे में आगामी सियासी राह आसान हो सके।

अबकी बार वसुंधरा काफी पहले से सक्रिय होने जा रही हैं। यह भी चर्चा का विषय बन गया है। वसुंधरा राजे की धार्मिक यात्रा को लेकर उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ का कहना है कि देव दर्शन
हमारी संस्कृति है,हम सब लोग देवताओं के दर्शन करते हैं।

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ये यात्रा वसुंधरा राजे का निजी कार्यक्रम है और किसी भी व्यक्ति को अपना निजी कार्यक्रम करने का पूरा हक है । जब मीडिया ने पूछा कि अब बीजेपी नेताओं, सांसदों, विधायकों ने उनसे क्यों दूरी बना ली है।

तो राठौड़ बोले वो कहां हमसे दूर हैं। यह सवाल कहाँ से पैदा हो गया। वे भारतीय जनता पार्टी में हैं और भाजपा की नेता हैं.. जब राठौड़ से पूछा गया कि क्या आप भी उनके साथ धार्मिक यात्रा में शामिल होंगे। तो राजेन्द्र राठौड़ ने स्पष्ट किया- नहीं मैं उनके साथ नहीं जाऊंगा

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने मामले में चुटकी लेते हुए कहा- यह बीजेपी का अंदरूनी मामला है ,लेकिन अब चाहे वसुंधरा राजे धार्मिक यात्रा करें या जेपी नड्डा आएं, कुछ नहीं होने वाला ।

बीजेपी राजस्थान में आपसी खींचतान के चलते ही सतीश पूनिया को भी बीजेपी आलाकमान ने तलब कर लिया है। राजस्थान में फिर से कांग्रेस की ही सरकार आएगी।

उन्होंने बीजेपी में अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी को लेकर भी राजेंद्र राठौड़ पर निशाना साधते हुए कहा- वसुंधरा राजे की धार्मिक यात्रा में राठौड़ शामिल नहीं होने की बात कह रहे हैं। राठौड़ को क्या वसुंधरा राजे ने यात्रा के लिए आमंत्रित किया है। वे पहले यह तो स्पष्ट करें।

प्रदेश के काबीना मंत्री डॉक्टर बीडी कल्ला ने भी वसुंधरा राजे की धार्मिक यात्रा को लेकर कहा कि मुझे नहीं पता वसुंधरा राजे किस प्रयोजन से यह यात्रा कर रही हैं । वैसे धार्मिक यात्राएं आध्यात्मिक लाभ और मोक्ष के लिए होती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक यात्राएं तो गुप्त रखी जाती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राजस्थान में ही माउंट आबू में सन 84 में उनके गुज़रने से 2 महीने पहले गुप्त रूप से रुद्राभिषेक किया था। बहुत कम लोगों को ही इसकी जानकारी होगी। हमने भी कभी इस बात का ज़िक्र नहीं किया ।

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इंदिरा गांधी ने भी उसे गुप्त रखा था।वहीं वसुंधरा की देव दर्शन यात्रा को लेकर निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने कहा-यह पहली बार है कि वसुंधरा चुनाव से पहले ही सक्रिय हो गई हैं। इससे पहले के 2 चुनाव में वह हार के बाद दिखती नहीं थीं।

भाजपा हाईकमान ने उन्हें मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने से इनकार किया है।उसके बाद अब वह अपनी साख बचाने यात्रा पर निकल रही हैं।

सियासी गलियारों में चर्चा है कि राजे की यात्रा फार्मूले पर भाजपा आलाकमान ने भी फुलस्टॉप लगा दिया है। वसुंधरा अब केवल गोवर्धन परिक्रमा ही करेंगी। चूंकि राजस्थान में जनाधार तैयार करने के लिए वसुंधरा इस नीति पर काम करती रही हैं।

ऐसे में राज्य में अपनी ताकत दिखाने के लिए 8 मार्च को जन्मदिन पर यात्रा निकालने की रणनीति को वसुंधरा राजे समर्थक नेताओं ने थोड़ा बदल लिया है। पार्टी आलाकमान से इस यात्रा को लेकर हरी झण्ड़ी नहीं मिलने से समर्थक नेता प्लॉन बी पर काम कर रहे है।

प्लॉन बी यानी यात्रा की जगह वसुंधरा राजे के साथ उनके समर्थक पदयात्रा निकालेंगे। मिली जानकारी के अनुसार राजे अपने हजारों समर्थकों के साथ अपने जन्मदिन यानी 8 मार्च को गोर्वधन परिक्रमा करेंगी। इसके लिए तैयारी की जा रही है।

इससे पहले राजे का भरतपुर के बद्री मंदिर से यात्रा शुरु करने का प्लॉन था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राजे अपने जन्मदिन पर हैलीकाप्टर के जरिए गोर्वधन परिक्रमा में आने वाले भरतपुर के इलाके , पूंछरी का लौठा पहुंचेगी।

यहां से अपने वाहन के जरिए गोर्वधन मंदिर जाएंगी । मंदिर से राजे का अपने हजारों समर्थकों के साथ गोवर्धन परिक्रमा का कार्यक्रम रहेगा। इस पदयात्रा के प्रचार—प्रसार का जिम्मा और तैयारियों में भाजपा के वहीं नेता जुटे हैं, जो अब तक राजे की भरतपुर में यात्रा बनाने पर काम कर रहे थे।

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इसमें पूर्व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी,युनूस खान आदि के नाम प्रमुख है। हालांकि वसुंधरा राजे की यात्राओं के जरिए अपने विरोधियों को चित करने की पुरानी रणनीति रही है। यात्रा के जरिए ही राजस्थान में राजे ने अपने राजनीतिक भविष्य की शुरुआत की थी।

2003 में परिवर्तन यात्रा के जरिए राजे ने न केवल गहलोत सरकार को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया था बल्कि उनके नेतृत्व को चुनौती देने वाले भाजपा नेताओं को भी ज़मीन दिखा दी थी।

परिवर्तन यात्रा में राजे की लोकप्रियता का ग्राफ इतना बड़ा था कि राजस्थान में पहली बार 2003 में भाजपा सरकार 120 सीटों के बहुमत के साथ सत्ता में आई थी। इसके बाद 2013 में सुराज संकल्प यात्रा और 2018 में गौरव यात्रा राजे ने निकाली थी।

लेकिन अबकी बार पार्टी आलाकमान की नाराज़गी और खींचतान के कारण राजे की यात्रा में भी खलल हो रहा है। पहले कोटा से यात्रा निकालने की तैयारी धरी रह गई। अब गोवर्धन परिक्रमा में भी पार्टी और पुराने साथी साथ नहीं दे रहे।

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया की धार्मिक यात्राओं ने सियासी तूल पकड़ लिया है। धर्म के सहारे सियासत साधने के लग रहे आरोपों के बीच अब बीजेपी और कांग्रेस में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है ।

उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने वसुंधरा राजे की धार्मिक यात्रा को बेहद निजी यात्रा करार दिया, तो वहीं साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि वे खुद इस यात्रा में शामिल नहीं होंगे।