मंच पर सचिन पायलट का फोटो नहीं लगाते, मंत्री-विधायक नाम लेने से डरते हैं, फिर भी भीड़ से नारे पायलट के लगते हैं

जयपुर। राजस्थान में होने वाले चार विधानसभा सीटों के उपचुनाव की तैयारी के लिए कांग्रेस ने किसान सम्मेलनों के जरिए अपनी बिसात बिछाई है।

इससे भी ज्यादा राजनीतिक रूप से कांग्रेस ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने एकता का संदेश देने का प्रयास भी किया है।

इस प्रयास के तहत प्रदेश प्रभारी अजय माकन की ओर से किए गए सुलह के प्रयासों के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट लोकसभा चुनाव के बाद पहली बार एक साथ एक हेलिकॉप्टर से उड़ान भरकर किसान सम्मेलन में पहुंचे और दोनों ने एक साथ में मंच भी साझा किया।

हालांकि, दोनों ही मंचों पर सचिन पायलट के फोटो तो नदारद थी, लेकिन सम्मेलनों में सचिन पायलट के नारे हर सम्मेलन की तरह की तरह लगे। वैसे तो श्री डूंगरगढ़ और चित्तौड़ के मातृकुंडिया में कांग्रेस की ओर से 2 किसान सम्मेलनों का आयोजन किया गया था, लेकिन मुख्य रूप से सरकार का जोर मातृकुंडिया में था।

वहां पर लोगों की भीड़ जुटाने के लिए प्रयास भी कुछ हदतक सफल हुए और मेवाड़ की 3 विधानसभा सीटों सहाड़ा, वल्लभनगर और श्री राजसमंद के लिए चुनावी श्रीगणेश किया गया।

यहां हुए सम्मेलन की खास बात यह रही कि एक और जहां कांग्रेस के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की सुलह के प्रयासों में सफलता मिलने लगी है तो दूसरी और इनके मंच पर आने से पहले जितने भी मंत्री और विधायकों ने संबोधन दिया, उनमें से किसी ने भी सचिन पायलट का नाम नहीं लिया या फिर यूं कहें कि सचिन पायलट का नाम लेने से मुख्यमंत्री नाराज हो जाएंगे।

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हालांकि, इस बात पर उन्हें भीड़ की नाराजगी का सामना करना पड़ा और मातृकुंडिया में जो समूह में सचिन पायलट का नाम नहीं लिया गया तो युवाओं ने सचिन पायलट के पक्ष में जमकर नारेबाजी की।

ऐसे में मंच का संचालन कर रहे विधायक रामलाल जाट ने बड़े ही बचकाना तरीके से उनको चुप कराने के लिए माता, पिता और पत्नी तक की सौगंध मंच से नहीं खिलाई। साथ ही धमकीभरे अंदाज ने यह भी कहा कि पीछे वाले उठ गए तो क्या होगा?

मतलब कि सचिन पायलट को लेकर मंच पर अजीब से डर का माहौल से नजर आया। जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रभारी अजय माकन, पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा मंच पर आए तो स्वागत भाषण देने आए सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना अत्यधिक उत्साहित नजर आए।

उन्होंने कहा कि अब तक लोगों को कुछ भ्रम देख रहा था, वह भी दूर हो गया है। इस सम्मेलन में एक बार फिर से यह नजर आया है कि भीड़ इकट्ठी करने वाला चाहे कोई भी हो या फिर कोई भी नेता मंच पर बैठा हो, इसके बावजूद जनता ने सचिन पायलट का प्रेम लगातार बना हुआ है।

मातृकुंडिया में भी यह स्पष्ट रूप से नजर आया। यहां ना तो सचिन पायलट के फोटो थे, ना होल्डिंग्स में और ना ही मन से नाम लिया गया था, लेकिन जनता की भीड़ ने लगातार सचिन पायलट के लिए नारेबाजी होती रही।

इतना ही नहीं, मंच पर सचिन पायलट के संबोधन के बाद भीड़ में अधिकांश लोग उठकर जाने लगे और सचिन पायलट के बाद गोविंद सिंह डोटासरा और प्रभारी अजय माकन का संबोधन हुआ, उसके बाद जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की तरफ से संबोधन शुरू हुआ तो पांडाल लगभग खाली हो चुका था, महिलाएं जा चुकी थीं ।

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इसके चलते अशोक गहलोत का संबोधन भी काफी छोटा कर दिया गया। इसके अलावा बात की जाए तो किसान सम्मेलन में दिए गए संदेश और भीड़ की तो सरकार की ओर से इस किसान सम्मेलन में भीड़ जुटाने और मेवाड़ से यह संदेश देने के लिए कि लोग कांग्रेस के साथ हैं।

चार मंत्रियों और कई विधायकों को यहां लगाया गया था, इसके बावजूद कार्यक्रम को सुनने आए लोगों की गणना की जाए तो भले ही सफल आयोजन रहा हो, लेकिन पंडाल की क्षमता और तमाम स्थितियां देखने के बाद लग रहा था कि मंत्रियों की ओर से जो प्रयास किए गए हैं, वह रंग नहीं ला पाए।

मातृकुंडिया में उतनी ही भीड़ जुट सकी जितनी आमतौर पर पब्लिक मीटिंग में जुटती है। मतलब कि तीन विधानसभा क्षेत्रों और चार जिलों की कांग्रेस मिलकर भी यह प्रभाव नहीं छोड़ पाए, जिसके लिए सरकार ने उन्हें जिम्मेदारी दी थी।

इतना सब कुछ होने के बावजूद कांग्रेस के लिए अगर कोई सुखद तस्वीर यह रही कि लंबे समय बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री सचिन पायलट एक साथ जयपुर से पहले श्रीडूंगरगढ़ और उसके बाद चित्तौड़गढ़ के मातृकुंडिया में आए और किसान सम्मेलन को संबोधित किया।

बताया जा रहा है कि ऐसा इसलिए हुआ कि राहुल गांधी के 12 और 13 फरवरी के राजस्थान दौरे के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के नजदीकी आचार्य प्रमोद कृष्णम की ओर से एक ट्वीट आया था, जिसमें लिखा था कि “किसान नेता को मंच से दूर रख कर किसानों का भला कैसे हो पाएगा”

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इस ट्वीट का मतलब यह था कि सचिन पायलट के साथ उस दौरान जो कुछ हुआ, उसका संदेश कांग्रेस के नेताओं में अच्छा नहीं गया और उसी संदेश को सुधारने के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा ने राजस्थान के प्रभारी अजय माकन को निर्देश दिए थे कि सचिन पायलट को साथ लिया जाए।

उसके बाद पायलट को राजी करने के प्रयास किए और ये प्रयास रंग भी लाए। सचिन पायलट और अशोक गहलोत की इस साझेदारी को देखने के बाद यहां सम्मेलन में आए लोगों से बात करने पर एक ही बात निकल कर सामने आई कि “अब देखना यह है कि भले ही मन ना मिले हो और दिखावा ही सही, लेकिन यदि यह दोनों साथ चले तो कांग्रेस को फायदा भले ही ना मिले, लेकिन भविष्य में नुकसान कम ही होगा।”