रेसला एक मार्च देगा विधानसभा के बाहर धरना

-पांच मार्च को करेंगे विधानसभा का घेराव

जयपुर। स्कूली शिक्षा व्याख्याताओं के शिक्षक संगठन (रेसला) द्वारा शनिवार को अपनी एकसूत्री मांग को लेकर राजस्थान विवि के देराश्री शिक्षक सदन में प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। रेसला के पदाधिकारियों का कहना है कि पिछले दिनों आहूत की गई कैबिनेट की बैठक में शिक्षा विभाग के नियम संशोधन के मुद्दे को डैफर किया गया, जिसमें प्रधानाचार्य पदोन्नति से संबंधित अनुपात परिवर्तन का मुद्दा भी शामिल था, लेकिन सरकार ने वादा खिलाफी करते हुये कैबिनेट की बैठक से एनवक्त पहले उसे डैफर कर दिया। इसलिए शिक्षक संगठन रेसला अपने हक व अधिकार की लड़ाई के लिये 1 मार्च 2021 से जयपुर में धरना दे रहा है और मांग नहीं माने जाने तक यह धरना जारी रहेगा।

संगठन के महामंत्री सुमेर खटाना ने बताया कि इसी क्रम में 5 मार्च को सभी जिलों से सरकार से नाराज व्याख्याता जयपुर पहुंचेंगे और सरकार को यह बताएंगे कि सरकार 54000 लोगों के साथ उनकी वाजिब मांग नहीं मानकर न्याय नहीं कर रही है।

खटाना ने बताया कि मांगे नहीं मानने से नाराज शिक्षक संगठन रेसला ने आगामी संघर्ष की रूपरेखा तैयार कर ली है। इसके लिए 21 फरवरी को ही संगठन द्वारा जिलाध्यक्ष व जिला मंत्रियों की प्रांतीय कार्यकारिणी के साथ एक बैठक रखी थी, जिसमें प्रांतीय संघर्ष समिति का भी गठन किया गया है।

क्या है मामला?
दरअसल, राजस्थान में स्कूल व्याख्याताओं की संख्या 54000 है। दूसरी ओर हेड मास्टरों की संख्या लगभग 3500 है। संगठन के प्रवक्ता व संघर्ष समिति के सह संयोजक डॉ. अशोक जाट ने बताया कि व्याख्याता एवं प्रधानाध्यापक दोनों ही ग्रुप एफ से संबंधित है एवं दोनों समकक्ष हैं व दोनों ही राजपत्रित हैं।

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दोनों ही पदों पर 50% पद सीधी भर्ती व 50% पद द्वितीय श्रेणी अध्यापकों से भरे जाते हैं। दोनों पदों की अगली पदोन्नति प्रधानाचार्य पद पर होती है और जिस समय 67:33 लागू किया गया, उस समय व्याख्याता 23000 व प्रधानाध्यापक 9000 की संख्या में थे, इसलिए उस समय की स्थिति में यह अनुपात सही था, लेकिन वर्तमान में व्याख्याताओं की संख्या 54000 हो जाने व प्रधानाध्यापक के पद घटकर 3500 हो जाने से यह अनुपात अव्यवहारिक हो गया है।

डॉ. अशोक ने रेसा (हेडमास्टर्स का संगठन) पर सरकार को गुमराह करने का आरोप लगाते हुये कहा कि रेसा भ्रामक प्रचार करके सरकार को गुमराह कर रहा है और यह तर्क दिया जा रहा है कि इससे सरकार पर वित्तीय भार पड़ेगा, लेकिन यहां मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि यह फाइल वित्त विभाग से स्वीकृति के बाद ही कैबिनेट तक पहुंची है।

रेसा द्वारा गलत तथ्यों द्वारा सरकार को गुमराह करने से सरकार महत्वपूर्ण निर्णय को करते-करते अपने कदम पीछे खींच लेती है और इस वजह से पूरे शिक्षक समुदाय में सरकार के प्रति नाराजगी फैलने से सरकार को विरोध का सामना करना पड़ता है, लेकिन हम आज भी मुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री से अनुरोध कर रहे हैं कि व्याख्याताओं के आक्रोश से पहले ही संख्यात्मक अनुपात की इस फाइल को आप यथाशीघ्र अपनी कैबिनेट से पारित करवाएं अन्यथा राजस्थान के व्याख्याता अपने लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन से अपनी नाराजगी जाहिर करेंगे।

पूर्व में भी जब कभी मुख्यमंत्री ने कैबिनेट से इस मुद्दे को पारित करवाने का प्रयास किया, तब रेसा द्वारा भ्रामक प्रचार करके रोकने का प्रयास किया और परिणाम स्वरूप सरकार को व्यापक विरोध का सामना करना पड़ा था। आज फिर वही स्थिति बन रही है। प्रदेश के व्याख्याता हर ब्लॉक व जिला प्रशासन द्वारा सरकार को ज्ञापन के माध्यम से पहले बता चुके, लेकिन अब मुद्दे को डैफर करने से सड़कों पर उतरेंगे।

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इस अवसर पर सह संयोजक डॉ पंकज ओसवाल, सहसंयोजक ओमप्रकाश शर्मा, डॉ रामस्वरूप चौधरी, बृजेश पुंडीर, दीनदयाल सैनी, डॉ बंशीलाल भहडा, चेतन कुमावत, धर्मेंद्र शेखावत आदि संघर्ष समिति के सदस्य उपस्थित रहे।