सचिन पायलट अशोक गहलोत दोनों एक हेलीकॉप्टर में चित्तौड़गढ़ क्यों गए?

जयपुर। लगता है, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच राजनीतिक तौर पर सुलह की कोशिशें शुरू हो चुकी हैं। दोनों नेता शनिवार को एक ही हेलीकॉप्टर में जयपुर से चित्तौड़गढ़ पहुंचे।

अशोक गहलोत और सचिन पायलट के साथ ही पार्टी के प्रदेश प्रभारी अजय माकन और प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा भी उनके साथ गए हैं। चारों नेता चित्तौड़गढ़ के मातृ मुड़िया में एक सभा को संबोधित करेंगे। उसके बाद बीकानेर के डूंगरगढ़ में दूसरी सभा को संबोधित करेंगे।

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि सचिन पायलट को अशोक गहलोत की इन सभाओं में जाने के लिए पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के द्वारा दिशा निर्देश दिए गए थे। हालांकि, पिछले दिनों अजय माकन ने भी सचिन पायलट से मिलकर उनको सभाओं के लिए निमंत्रित किया था।

गौरतलब है कि सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच जुलाई 2020 के दौरान राजनीतिक तौर पर युद्ध चला। जिसके बाद 15 जुलाई को राजस्थान की सरकार से उप मुख्यमंत्री के पद से सचिन पायलट को बर्खास्त कर दिया गया था। इसके साथ ही कांग्रेस आलाकमान के निर्देश के बाद तत्कालीन प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे के द्वारा पीसीसी अध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया था।

सचिन पायलट के साथ ही उनके गुट से माने जाने वाले तत्कालीन पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह और खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री रमेश मीणा को भी मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया गया था। सचिन पायलट के करीबी विधायक, जोकि यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए थे मुकेश भाकर, उनको भी बर्खास्त कर दिया गया था। साथ ही एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष पद से अभिमन्यु पूनिया ने इस्तीफा दे दिया था।

यह भी पढ़ें :  प्रताप जैसे महापुरूषों का अपमान कांग्रेस सरकार की पहचान-देवनानी

तब से लेकर अब तक यह पहला अवसर है जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सचिन पायलट, प्रदेश प्रभारी अजय माकन और पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा चारों नेता एक साथ एक हेलीकॉप्टर में बैठकर किसी जिले की यात्रा पर गए हैं और वहां पर सभाओं को संबोधित करेंगे।

यह घटना को लेकर जहां अशोक गहलोत के समर्थकों के द्वारा सचिन पायलट की हार के रूप में देखा जा रहा है तो सचिन पायलट के सपोर्टर इसको अशोक गहलोत की हार बता रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक तौर पर जुगलबंदी शुरू हो चुकी है। आगामी 4 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी को इस से कितना फायदा मिलेगा, यह अभी भविष्य के गर्भ में है।

मजेदार बात इसलिए भी है, क्योंकि एक तरफ जहां पर अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच में राजनीतिक प्रतिद्वंदिता चल रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा में भी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बीच राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है।