सतीश पूनिया और वसुंधरा राजे की लड़ाई का क्या परिणाम निकलेगा?

जयपुर। राजस्थान भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राज्य की दो बार मुख्यमंत्री रह चुकीं वसुंधरा राजे इन दिनों भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के साथ राजनीतिक लड़ाई में उलझी हुई हैं।

वैसे तो वसुंधरा राजे सीधे तौर पर कुछ नहीं बोल रही हैं, लेकिन 8 मार्च को भरतपुर में उनका भव्य तरीके से जन्मदिन मनाने के लिए उनके साथी विधायकों के द्वारा जो कार्य किया जा रहा है, साथ ही 20 विधायकों के द्वारा सतीश पूनिया को पत्र लिखकर नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ की शिकायत की गई है, उसके आधार पर कहा जा सकता है कि वसुंधरा राजे राज्य के नेतृत्व को ललकार रही हैं।

सीधी लड़ाई नहीं है पूनियां और वसुंधरा के बीच

यूं तो माना जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के साथ राजनीतिक लड़ाई लड़ रही हैं, किंतु हकीकत यह है कि 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव और उसके बाद भाजपा के पक्ष में आने वाले परिणाम को देखते हुए वसुंधरा राजे अभी से मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार घोषित होना चाहती हैं।

क्या वसुंधरा राजे दे पाएंगी टक्कर

किंतु क्योंकि प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया हैं और सारी जवाबदेही उन्हीं की होती है, ऐसे में सीधे तौर पर लड़ाई वसुंधरा राजे और सतीश पूनिया के बीच में ही चल रही है। हालांकि, फिर भी यह कहा जा रहा है कि वसुंधरा राजे को राजनीतिक तौर पर इतना कमजोर कर दिया गया है कि वह राष्ट्रीय नेतृत्व तो छोड़िए, प्रदेश नेतृत्व को भी चुनौती नहीं दे सकती हैं।

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पार्टी के लिए अगले चुनाव होंगे लिटमस टेस्ट

दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक वर्चस्व की यह लड़ाई ऐसे समय में अपने उच्चतम स्तर की तरफ पहुंचती हुई नजर आ रही है, जबकि राजस्थान में अगले महीने 4 विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव होने की संभावना है।

राजनीति के जानकारों का मानना है कि वसुंधरा राजे और सतीश पूनिया की इस लड़ाई की वजह से पार्टी को बड़े पैमाने पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि पार्टी के लिए राहत की खबर यह है कि राजनीतिक लड़ाई केवल भाजपा में ही नहीं हो रही है, बल्कि कांग्रेस में भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच चल रही है।

दोनों नेताओं का भविष्य तय करेगा यह चुनाव

माना जा रहा है कि अगर सतीश पूनिया 2023 तक पार्टी अध्यक्ष रहते हुए तमाम चुनाव पार्टी के अनुकूल परिणाम वाले कराने में कामयाब होंगे, तो साथ ही जनता के एक बड़े धड़े को रैलियों के माध्यम से एकत्रित करने की क्षमता हासिल कर पाएंगे, तो निश्चित ही 2023 में उनके लिए मुख्यमंत्री बनने के द्वार खुल सकते हैं।

अगर सतीश पूनियां ऐसा करने में कामयाब नहीं होते हैं, तो पक्के तौर पर कहा जा सकता है कि वसुंधरा राजे का गुट एक बार फिर से राजस्थान भाजपा पर हावी होगा और 2023 के चुनाव के बाद वसुंधरा राजे राज्य की तीसरी बार मुख्यमंत्री बन सकती हैं।

गजेंद्र सिंह शेखावत और ओम बिरला भी कतार में

एक और संभावना यह भी बनती है कि सतीश पूनिया सियासी तौर पर अगर उतने मजबूत नहीं होते हैं, जितना कि राष्ट्रीय नेतृत्व उनको मुख्यमंत्री बना दे तो फिर ऐसे में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के बीच भी मुख्यमंत्री बनने की राजनीतिक प्रतियोगिता होनी निश्चित है।

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विपरीत परिणाम पर हावी होंगी वसुंधरा

बहरहाल, अगले महीने होने वाले 4 विधानसभा सीटों के उपचुनाव पर सबकी नजर है। इस चुनाव परिणाम में अगर भाजपा कांग्रेस से आगे रहती है तो फिर अगले ढाई साल का राजनीतिक रास्ता सतीश पूनिया के लिए अनुकूल साबित होगा। अगर परिणाम अनुकूल नहीं आते हैं तो फिर वसुंधरा राजे का खेमा एक बार फिर से हावी होने का प्रयास करेगा।