पार्टी से अलग होकर गुलाबचंद कटारिया भी चुनाव लड़े तो जमानत जप्त हो जाएगा: कटारिया

जयपुर। भाजपा में पिछले दिनों लेटर बम फूटने के बाद अब भी मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को भी भाजपा नेताओं ने लेटर बम पर सफाई देते नजर आए।

कह सकते हैं कि दल के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र सिंह राठौड़ के बयान आये हैं।

पत्रकारों के सवाल पर बोलते हुए नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने विधानसभा के बाहर कहा कि “मैं एक सामान्य कार्यकर्ता हूं, हमेशा इसी काम में रहा हूं पार्टी जो भी उपयोग समझे मुझे काम दे, मैं करूंगा, मैं कभी मांगने के लिए गया नहीं नहीं जाता हूं, और कभी किसी व्यक्ति की सिफारिश नहीं मैं सामान्य व्यक्ति हूं, मैं अपने काम से काम रखता हूं। मेरी किसी व्यक्ति विशेष के कारण कोई ज्यादा पहुंच नहीं है।”

कटारिया ने आगे कहा, “यह जिस प्रकार का घटनाक्रम हुआ है यह कहीं ना कहीं किसी न किसी के दिमाग का सोचा समझा घटनाक्रम है, लेकिन भाजपा आज तक किसी व्यक्ति के आधार पर नहीं चली, अगर कोई सोच रहा है तो वह गलत सोच रहा है, गुलाबचंद कटारिया की भी दम हो तो पार्टी के बाहर होकर उदयपुर का चुनाव लड़े तो जमानत नही बचा पाएगा।”

गुलाबचंद कटारिया के इस बयान को दो तरह से देखा जा रहा है एक तरफ जहां उन्होंने कैलाश चंद मेघवाल पर हमला किया है और वसुंधरा राजे के द्वारा पिछले दिनों से जितनी भी गतिविधि की जा रही है, उसको लेकर इशारों में कहा है कि पार्टी से दूर होकर कोई चुनाव नहीं जीत सकता तो इसके साथ ही घनश्याम तिवाड़ी के द्वारा पार्टी से बाहर जाने के बाद सांगानेर विधानसभा क्षेत्र में दिसंबर 2018 के चुनाव के दौरान जमानत जप्त करवाई गई थी, उसका भी उदाहरण सामने रख दिया है।

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ऐसा माना जा रहा है कि गुलाबचंद कटारिया ने स्पष्ट रूप से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कैलाश चंद मेघवाल पर कटाक्ष करते हुए यह बात कही है।

इस मामले को लेकर अब तक पार्टी अध्यक्ष सतीश पूनिया, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने भी उन 20 विधायकों के ऊपर राजनीतिक हमला किया है, जिन्होंने लेटर लिखा था।

माना जा रहा है कि वसुंधरा राजे के इशारे पर ही इन विधायकों के द्वारा लेटर लिखकर सतीश पूनिया, गुलाबचंद कटारिया और राजेंद्र राठौड़ के बीच बन रहे त्रिकोणीय गठबंधन को तोड़ने के लिए प्रयास किए थे, लेकिन मामला उल्टा पड़ता नजर आ रहा है।

हमेशा की भांति गुलाबचन्द कटारिया ने गुस्सा जाहिर किया है तो राजेंद्र राठौड़ ने सधे हुए शब्दों में साफ का है कि अगर किसी की भी बोलने की हिम्मत है और तैयारी है तो विधानसभा में बोलें, हम मौका देंगे, साबित करें कि बजट पर बोलने के लिए उनके पास सब कुछ है।