मुख्यमंत्री अशोक गहलोत घोषणाजीवी: पूनियां

-पत्र लिखना और मीडिया में सार्वजनिक होना यह पार्टी की परम्परा के विपरीत है- सतीश पूनिया

जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के 20 विधायकों के द्वारा पार्टी अध्यक्ष सतीश पूनिया को नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ के द्वारा प्रश्न पूछने से रोके जाने और स्थगन प्रस्ताव लगाने से रोकने को लेकर लिखे पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया आज जयपुर स्थित विधानसभा के बाहर कहा कि यह एक सामान्य किस्म की बातचीत थी, जो मौखिक रूप से नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और मुझे कही जा सकती थी, पत्र लिखना और मीडिया में सार्वजनिक होना यह पार्टी की परम्परा के विपरीत है।

पूनिया ने कहा कि और जो जानकारी सामने आई है, उसमें से 13 लोग ऐसे थे, जिन्होंने वर्तमान बजट सत्र में स्थगन लगाया ही नहीं था। कुछ लोगों ने इनोसेंटली उस पर केवल स्थगन प्रस्ताव मानकर उस पर हस्ताक्षर किए थे तो कल की बातचीत के बाद सारी चीजें क्लियर हो गई हैं, उसमें इस समय किसी तरीके की कोई गलतफहमी या विरोधाभास का कोई कारण नहीं है।

पत्रकारों से बात करते हुए पूनिया ने गहलोत सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बजट तो चुनावी बजट जैसा था ही, यह दिख ही रहा है, लेकिन किस तरीके की घोषणा है, वह लगातार करते रहे पहले भी और वह करें कि मैं मैंने भाषण में रिकॉर्ड बनाया है।

पूनिया ने चटकी लेते हुए कहा कि 21 सीटें जीतने का भी रिकॉर्ड उन्होंने ही बनाया है। भाजपा अध्यक्ष ने तीखा हमला करते हुए कहा कि जैसे देश में और किस्म के लोग हैं, मुझे लगता है कि हमारे मुख्यमंत्री अब घोषणाजीवी भी हो गए हैं।

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इन घोषणाओं के जरिए जनता के बीच में कुछ छाप छोड़ने की कोशिश करेंगे, लेकिन वह कई बार भूल जाते हैं कि उनकी अपनी घोषणाओं के बारे में विरोधाभास था।

दूसरी तरफ से कुछ नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने भी अशोक गहलोत के बजट पर प्रतिक्रिया स्वरूप लगातार दूसरे दिन हमला किया। उन्होंने कहा है कि अशोक गहलोत सरकार क्या बजट पेश कर रही है, कौन सी घटनाएं हो रही है, पैसा कहां से आएगा, किसी बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं है।

राठौड़ ने कहा कि जो भी बातें भाजपा पार्टी को लेकर की जा रही है, वह हमने हमारी बैठकों में क्लियर कर लिया है किसी तरह की भाजपा में खेमेबाजी नहीं है।

उल्लेखनीय है कि पिछले 4 दिन से लगातार भाजपा के 20 विधायकों के द्वारा सतीश पूनिया को लिखे गए पत्र के बाद में जबरदस्त विवाद सामने आया है, किंतु पहले कोर कमेटी की बैठक और फिर 24 फरवरी को विधायक दल की बैठक में पार्टी के भीतर तमाम विधायकों को सख्त हिदायत दी गई है।

विधायक दल की बैठक में तो नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष कैलाश चंद मेघवाल आमने-सामने हो गए। कटारिया ने तो यहां तक कह दिया कि उनको पद पर रहने का कोई शौक नहीं है, 2 मिनट में वह इस्तीफा दे सकते हैं।

दूसरी तरफ मेघवाल का कहना है कि कटारिया 2 पदों पर बैठे हुए हैं, उनको एक पद छोड़ना चाहिये। इस प्रकरण में विधायक दल की बैठक के दौरान ही काफी बहस हुई थी।