गहलेात सरकार का बजट कट, काॅपी, पेस्ट है: डाॅ. सतीश पूनियां

नेहरू, इन्दिरा और राजीव के नाम पर टाइटल रखने के अलावा बजट में कुछ नहीं है: डाॅ. पूनियां

मुख्यमंत्री गहलोत भयाक्रांत हैं, चुनावी मायने में घोषणा करने से कुछ नहीं होगा, जनता सब जानती है: डाॅ. पूनियां

मुख्यमंत्री ने बजट में ना बेरोजगारों के बारे में कुछ कहा और ना ही सम्पूर्ण किसान कर्जमाफी के बारे में: डाॅ. पूनियां

जयपुर। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा पेश किये गये बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मीडिया से बातचीत में कहा कि इनकी घोषणाओं एवं अमल में बहुत बड़ा विरोधाभास है और आज का बजट कट, काॅपी, पेस्ट है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि गहलोत सरकार की नीयत सही नहीं है। मुख्यमंत्री गहलोत घोषणा कर के घोषणावीर तो हो गये, लेकिन इस बजट में आंदोलनरत बेरोजगारों के बारे में कुछ नहीं कहा गया।

संविदाकर्मियों के नियमितिकरण की मंशा पूरी नहीं की गई, जो स्कूल, काॅलेज एवं तमाम इन्स्टीट्यूशन खोले गये हैं उनके इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में सरकार भ्रमित है। पिछले बजट में स्कूल, काॅलेजों के खोलने की जो घोषणा की गई है, उनकी बिल्डिंगें नहीं हैं और स्टाफ भी नहीं है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि यह बजट राजस्थान की जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। मुख्यमंत्री गहलोत बजट पेश करने के दौरान बार-बार कोरोना कालखण्ड का हवाला देते रहे, लेकिन कोरोना महामारी से तो पूरा देश एवं दुनिया प्रभावित हुआ, जिससे राजस्थान भी अछूता नहीं था।

उन्होंने कहा कि इस सरकार ने नया क्या किया, इसके बारे में मुख्यमंत्री कुछ नहीं बता पाये, केवल नेहरू, इन्दिरा और राजीव के नाम पर टाइटल रखने के अलावा कुछ नहीं किया।

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डाॅ. पूनियां ने कहा कि राजस्थान की जनता कोरोना के बाद जिस तरीके की इच्छाशक्ति के बजट की उम्मीद रखती थी, वो पूरी नहीं हुई।

अवैध बजरी खनन को रोकने के लिए कोई एक्शन प्लान नहीं बनाया, बंद की गई बिजली सब्सिडी को शुरू करने के बारे में कोई बात नहीं की गई, सम्पूर्ण किसान कर्जमाफी का वादा पूरा नहीं किया।

पिछले बजट की घोषणाओं में से लगभग 78 घोषणाएं अभी तक कागजों में ही हैं, बजट का कोई रोडमैप नहीं है, कोई ब्लू प्रिंट नहीं है। मुख्यमंत्री गहलोत ने इस बजट के माध्यम से स्वयं की राजनीतिक तौर पर फेस सेविंग की कोशिश की है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि मुख्यमंत्री को डीजल-पेट्रोल पर वैट कम कर आमजन को राहत देनी चाहिए थी। मुख्यमंत्री गहलोत आगामी उपचुनावों को लेकर पूरी तरह भयाक्रांत है, जिन चार क्षेत्रों में विधानसभा उपचुनाव होने थे, क्या उन लोगों के हितों के बारे में गहलोत को पहले पता नहीं था।

चुनावी मायने में घोषणा करने से कुछ नहीं होगा, जनता सब जानती है। इन चार उपचुनावों में जनता जनविरोधी कांग्रेस सरकार को सबक सिखायेगी और आगामी 2023 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो जायेगा।