क्या वसुंधरा राजे इतनी कमजोर हो गई हैं?

जयपुर। राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी कोर कमेटी की दूसरी बैठक मंगलवार को पार्टी कार्यालय में हुई, जिसमें 16 सदस्यों में से 12 सदस्य शामिल हुए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोर कमेटी के गठन के बाद यह दूसरी बैठक थी, जिसमें राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे भी शामिल हुईं। राजे पहली बैठक में नहीं पहुंचीं थीं।

पीएम मोदी से मिले थे दोनों नेता

इससे पहले कोर कमेटी की पहली बैठक में वसुंधरा राजे शामिल नहीं हुई थी। 2 दिन पहले वसुंधरा राजे और पार्टी अध्यक्ष सतीश पूनिया की फोटो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं।

वसुंधरा राजे के पार्टी कार्यालय में आने के साथ ही चर्चा भी शुरू हो गई। मजेदार बात यह है कि वसुंधरा राजे की पिछले 17 साल के दौरान पहली बार निजी कार भाजपा कार्यक्रम के अंदर पोर्च में खड़ी नहीं हुई।

सड़क मार्ग पर वसुंधरा, हवाई मार्ग से सतीश

वसुंधरा राजे पहली बार बड़ी मीटिंग में शामिल होने के लिए हवाई मार्ग से जयपुर आईं, तो दूसरी ओर अमूमन सड़क मार्ग का इस्तेमाल करने वाले पार्टी अध्यक्ष सतीश पूनियां ने सड़क मार्ग के बजाए हवाई मार्ग को चुना। इसको लेकर भी पार्टी कार्यकर्ताओं में तरह-तरह की चर्चा रही।

स्वागत हुआ कमजोर

वसुंधरा राजे के खेमे के द्वारा दिल्ली से लेकर जयपुर तक उनकी यात्रा के दौरान जगह-जगह पर भव्य स्वागत कर पार्टी नेतृत्व को अपनी ताकत दिखाने की तैयारी थी, लेकिन मन मुताबिक भीड़ नहीं हो पाने के कारण उनके समर्थकों की यह मंशा भी अधूरी ही रह गई।

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दिल्ली से लेकर जयपुर मार्ग के दौरान जगह-जगह पर वसुंधरा राजे के खेमे के लोगों के द्वारा स्वागत सत्कार के लिए भीड़ जुटाई गई थी, किंतु समर्थकों की संख्या कम होने के कारण स्वागत को लेकर भी पार्टी कार्यकर्ताओं में चर्चा हो रही है।

पोर्च में नहीं पहुंची गाड़ी

सबसे मजेदार और रोचक बात जयपुर में पार्टी कार्यालय में वसुंधरा राजे के पहुंचने के बाद देखने को मिली। वर्ष 2003 से लेकर अब तक वसुंधरा राजे जब भी पार्टी कार्यालय में आती थीं, तब हर बार उनकी कार पार्टी के पोर्च में खड़ी होती थी, किंतु इस बार पोस्ट में पार्टी अध्यक्ष सतीश पूनिया की कार खड़ी थी।

गाड़ी का रुतबा भी पड़ा कमजोर

जिसको लाख कोशिशों के बाद भी नहीं हटाया गया। इसके बाद वसुंधरा राजे गाड़ी से उतरकर कार्यालय के अंदर चली गईं। परंतु वसुंधरा राजे के ड्राइवर, गनमैन और निजी सहायक के द्वारा सतीश पूनिया की गाड़ी हटाने के तमाम प्रयास भी विफल साबित हुए।

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की गई है कि पिछले डेढ़ दशक के दौरान वसुंधरा राजे की गाड़ी आखिर पार्टी कार्यालय के पोर्च में खड़ी क्यों नहीं हुई और पार्टी अध्यक्ष सतीश पूनिया की गाड़ी जो कि पिछले मीटिंग के दौरान हट गई थी, इस बार क्यों नहीं हटी?

फीकी पड़ी वसुंधरा की चमक

पार्टी कार्यालय में हुई इस छोटी सी गतिविधि को लेकर पार्टी के कार्यकर्ताओं में चर्चा है कि क्या वसुंधरा राजे राजनीतिक तौर पर कमजोर हो गई है या फिर सतीश पूनियां का कद बड़ा हो गया है, जिनके आगे वसुंधरा राजे की चमक फीकी नजर आने लगी है?

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बड़े नेता हुए आमने-सामने

पिछले दिनों वसुंधरा राजे के खेमे के द्वारा भरतपुर और कोटा में बैठक करने और मीडिया में बयानबाजी करने के बाद यह पहला अवसर है, जब राजस्थान प्रदेश कार्यालय में अरुण सिंह, वसुंधरा राजे, सतीश पूनियां, गुलाबचंद कटारिया, राजेंद्र राठौड़, गजेंद्र सिंह शेखावत, कैलाश चौधरी जैसे नेता आमने सामने बैठे हैं।

20 विधायकों का पत्र बना चर्चा का विषय

उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले ही 20 विधायकों का अध्यक्ष सतीश पूनियां को लिखा गया वह पत्र भी वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के द्वारा उनके द्वारा सदन में प्रश्न पूछने और स्थगन प्रस्ताव लगाने से रोकने की गतिविधि का आरोप लगाया गया था।

बना दिया समकक्ष संगठन

एक दिन बाद, यानी बुधवार को राजस्थान सरकार के द्वारा अपना बजट पेश किया जाएगा और उससे पहले भाजपा कोर कमेटी की यह बैठक काफी महत्वपूर्ण रही, किंतु सबसे ज्यादा चर्चा वसुंधरा राजे के शामिल होने को लेकर रही। क्योंकि उनके नाम से एक अलग संगठन भाजपा के समकक्ष ही खड़ा करने की चर्चा हो रही है।

उपचुनाव से पहले कलह पड़ेगी भारी

सम्भवतः मार्च या अप्रैल के महीने में राजस्थान की सहाड़ा, राजसमंद, वल्लभनगर और सुजानगढ़ की सीट पर उपचुनाव होने हैं, जिसको लेकर पार्टी रणनीति बना रही है। अगर उससे पहले वसुंधरा राजे के द्वारा 8 मार्च को अपने जन्मदिन के साथ ही देवदर्शन यात्रा शुरू की जाती है तो निश्चित रूप से भाजपा मुश्किलों में आ सकती है।

संघनिष्ठ लोगों को मिली तवज्जो

माना जा रहा है कि पार्टी अध्यक्ष सतीश पूनिया के द्वारा पिछले करीब 1 साल के दौरान न केवल प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारियों की नियुक्ति में, बल्कि जिला अध्यक्षों और जिलों की कार्यकारिणी की नियुक्ति में भी ऐसे लोगों को तवज्जो दी गई है, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पृष्ठभूमि के हैं या फिर वर्षों से संगठन की सेवा कर रहे हैं।

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टिकट देकर दिया मान-सम्मान

यह भी सर्वविदित है कि सतीश पूनियां के द्वारा जयपुर जोधपुर और कोटा के सभी छह नगर निगम में संघ पृष्ठभूमि और संगठन के वफादार लोगों को टिकट देकर उनको मान सम्मान देने का प्रयास किया है। साथ ही पंचायत समिति व जिला परिषद में कांग्रेस को हराकर इतिहास भी रचा है।

भाजपा को सीधी चुनौती

पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि सतीश पूनिया के दौरान जिस तरह से संगठन को मजबूत किया जा रहा है, वह वसुंधरा राजे के लिए भविष्य के हिसाब से शुभ संकेत नहीं है। यही कारण है कि वसुंधरा राजे के समर्थकों के द्वारा अलग से एक मंच बनाया गया है और इस मंच के माध्यम से संगठन को चुनौती दी जा रही है।

क्या कमजोर हुईं हैं वसुंधरा राजे?

बहरहाल, वसुंधरा राजे के भाजपा कार्यालय में पहुंचने के साथ ही उनके समर्थकों गाना भी कार्यालय में शुरू हो गया। दर्जनों की संख्या में ऐसे कार्यकर्ता पार्टी में करीब एक साल बाद नजर आए जो वसुंधरा राज्य के मुख्यमंत्री रहने और सतीश पूनिया के अध्यक्ष नहीं होने तक पार्टी कार्यालय में मुख्य रुप से दिखाई देते थे।