सचिन पायलट खेमे के आगे नतमस्तक हुआ अशोक गहलोत गुट!

जयपुर। राजस्थान विधानसभा में मुख्य सचेतक महेश जोशी ने राजस्थान हाईकोर्ट के 24 जनवरी 2020 के अंतरिम आदेश को चुनौती देने वाली एसएलपी को सुप्रीम कोर्ट से वापस लेने की तैयारी शुरू कर दी है।

मुख्य सचेतक के एडवोकेट की पूरी तैयारी कर चुके हैं और मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी वापस लेने के लिए प्रार्थना पत्र दायर किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों ही मुख्य सचेतक की एसएलपी पर सुनवाई करते हुए मामले में पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित अन्य एमएलए व केंद्र सरकार से जवाब देने के लिए कहा था।

मुख्य सचेतक ने एसएलपी में हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें विधानसभा स्पीकर द्वारा पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित उनके खेमे के कांग्रेस के बागी गुट ने इस हमले को 14 जुलाई को दिए गए अयोग्यता नोटिस आदेश की क्रियान्वित पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया गया था।

बताया जाता है कि दिल्ली से बने दबाव के चलते अब राजस्थान सरकार को इस मामले में यह कदम उठाया पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि जुलाई 2020 में राजस्थान में कांग्रेस के अंदर चले आंतरिक विरोध और खेमेबाजी के दौरान जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की ओर से बाड़ेबंदी का दौर चल रहा था।

उसी दौरान राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी की ओर से 19 विधायकों को नोटिस जारी किए गए थे। नोटिस जारी किए जाने के आदेश को राजस्थान हाईकोर्ट में सचिन पायलट के नजदीकी विधायक पीआर मीणा की ओर से चैलेंज किया गया था और उसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने यथास्थिति के आदेश दिए थे।

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राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश के बाद राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष और सरकार की ओर से मुख्य सचेतक महेश जोशी ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करते हुए 19 विधायकों को अयोग्य ठहराने का मामला उठाया था। जिस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार था।

राजस्थान में चल रही खींचतान को पार्टी के लिए नुकसानदायक मानते हुए प्रभारी अजय माकन ने पार्टी आलाकमान के सामने सारी स्थिति रखी थी। इन दिनों जिस तरह के पूर्व मुख्यमंत्री सचिन पायलट की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी नेता राहुल गांधी के किसान आंदोलन के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किसान महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है और आयोजनों में विशाल भीड़ उमड़ रही है।

इसका संदेश भी प्रभारी अजय माकन के जरिए आलाकमान तक पहुंचा है। इसके बाद निर्देश दिल्ली की ओर से दिए गए हैं कि वे आपस में तनाव की स्थिति को जितनी जल्दी हो सके खत्म करें, ताकि इसका असर आने वाले दिनों में 4 विधानसभा क्षेत्र में होने वाले उपचुनाव को नहीं पड़े।

आलाकमान को फीडबैक मिल रहा था कि यदि पार्टी में खेमेबाजी रहती है तो इसका असर उप चुनाव पर पड़ेगा और यह संदेश मतदाताओं पर गलत असर डाल सकता है और इसका खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ सकता है।

यही कारण है कि राज्य सरकार की ओर से एसएलपी वापस लेने के लिए महेश जोशी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

जानकारों का कहना है कि पिछले दिनों राहुल गांधी की राजस्थान यात्रा के दौरान जिस तरह से सरकार और कांग्रेस संगठन की ओर से पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के साथ जो रवैया अपनाया गया था, उस पूरे रवैया को राहुल गांधी ने नोटिस किया।

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भले ही यहां उन्होंने इस बारे में कोई चर्चा नहीं की, लेकिन दिल्ली जाकर पूरी वस्तुस्थिति पर प्रभारी अजय माकन के साथ चर्चा की। इस चर्चा के बाद मिले निर्देशों के अनुसार ही प्रदेश प्रभारी अजय माकन ने बताया है कि राजस्थान कांग्रेस को जिस तरह की स्थितियां पार्टी में बनी हुई हैं, उसे तुरंत की किया जाना चाहिए।

इसी के साथ पार्टी आलाकमान के पास यह संदेश भी दिया गया कि जिस तरह से सचिन पायलट की ओर से आयोजित किसान महा पंचायतों में भीड़ उमड़ रही है, उसका सीधा संदेश जा रहा है कि जनता का रुख क्या है।

इस कारण भी पार्टी आलाकमान राजस्थान में चल रही कि खेमेबाजी को जल्द खत्म करना चाहता है। दूसरी ओर कहा यह भी जा रहा है कि राजस्थान सरकार और मुख्यमंत्री की खेमा इस एसएलपी को वापस लेकर लिए संदेश देना चाहता है कि वह अपनी ओर से खेमेबाजी खत्म करने के लिए तैयार है, लेकिन पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट खेमा भी अब अलग से कोई आयोजन ना करें।

हालांकि, इस बारे में कोई भी पुष्टि नहीं कर रहा है, लेकिन चर्चा हो रही है। एसएलपी वापस लेने को लेकर वास्तव में कोई दबाव है या नहीं सरकार आगे बढ़कर खुद का यह कदम उठा रही है, इस बारे में स्पष्ट तौर पर कोई भी नेता बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन दोनों खेमों के बीच चल रही तनाव की स्थिति में एसएलपी वापस लेने की अर्जी दायर होना निश्चित तौर पर कांग्रेस के लिए आने वाले दिनों में राहत की ख़बर हो सकती है।

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