यूनुस, सिंघवी, कालीचरण के बाद शेखावत, परनामी की बगावत, 20 नेताओं ने पूनियां को लिखा पत्र

जयपुर। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के समर्थक नेताओं की लिस्ट बड़ी होती जा रही है। सबसे पहले पूर्व मंत्री यूनुस खान, वर्तमान विधायक प्रताप सिंह सिंघवी और पूर्व मंत्री कालीचरण सराफ के साथ ही पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कैलाश चंद मेघवाल के खुलकर वसुंधरा राजे के समर्थन में आने के बाद अब पूर्व मंत्री राजपाल सिंह शेखावत और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी भी खुलकर सामने आ गए हैं।

राजपाल सिंह शेखावत, यूनुस खान और अशोक परनामी के द्वारा भरतपुर में एक दिन पहले ही वसुंधरा राजे के 8 मार्च को मनाए जाने वाले जन्मदिन की तैयारियों को लेकर बैठक की गई। इस कार्यक्रम को फाइनल करने के साथ ही वसुंधरा राज्य की राज्य में यात्रा को लेकर भी मंथन किया गया।

जानकारी में आया है कि वसुंधरा राजा के जन्मदिन के साथ ही उनके प्रदेशभर की यात्रा भी शुरू हो जाएगी। इसको लेकर भी तमाम तरह की तैयारियां की जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि वसुंधरा राजे खेमे के तमाम नेताओं को वाहनों का टारगेट दिया गया है।

इधर, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने तमाम बातों को धत्ता बता कहा है कि किसी नेता के द्वारा क्या किया जा रहा है, इससे उनको कोई फर्क नहीं पड़ता है, वह शीर्ष नेतृत्व के द्वारा अध्यक्ष बनाये गए हैं, और उनका पूरा फोकस संगठन को मजबूत कर पार्टी को सत्ता दिलाने पर है।

20 नेताओं ने लिखा पूनियां को पत्र

खुलेआम बयानबाजी और चिंतन शिविर के बाद पूर्व सीएम मैडम राजे समर्थक 20 विधायकों ने प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को लिखा पत्र, शिकायती पत्र में विधानसभा के अंदर पक्षपात होने के आरोप लगाए हैं। पत्र में कहा गया है कि उन्हें जनता के मुद्दे उठाने का मौका नहीं दिया जा रहा है। इसलिए पक्षपात दूर कर सभी को बोलने का समान अवसर दिया जाए। तय किया गया था कि सदन में स्थगन प्रस्ताव लगाने के लिए नेता प्रतिपक्ष और उपनेता प्रतिपक्ष रोजाना आठ विधायकों के नाम देंगे, लेकिन कुछ विधायक तो रोजाना स्थगन प्रस्ताव लगाकर जनहित के मुद्दे उठा रहे हैं और अन्य को नियमित स्थगन लगाने पर भी बोलने का अवसर नहीं मिल रहा है।

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सूत्रों के मुताबिक मांग करते हुए विधायकों ने पत्र में कहा है कि नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ को निर्देश देने के लिए कहा है कि इस व्यवस्था की जाए, जिसमें सभी विधायकों को सदन में बोलने का मिले समान अवसर, पत्र लिखने वाले विधायकों में कैलाश मेघवाल, नरपत सिंह राजवी, पुष्पेन्द्र सिंह, कालीचरण सराफ, प्रतापसिंह सिंघवी, नरेन्द्र नागर, कालू मेघवाल, गोविन्द रानीपुरिया, रामप्रताप कासनियां, बाबूलाल, अशोक डोगरा, गौतमलाल, धर्मेन्द्र मोची, रामस्वरूप लाम्बा, शंकरसिंह रावत, जोराराम कुमावत, शोभा चौहान, छगन सिंह, हरेन्द्र निनामा और गोपीराम मीणा शामिल हैं।