सचिन पायलट को राहुल गांधी के मंच से क्यों उतारा गया?

जयपुर। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का 12 व 13 फरवरी को राज्य का दो दिवसीय दौरा पूर्ण हो गया, किंतु साथ ही यह दौरा राजस्थान की राजनीति को एक नया विवाद भी दे गया।

दरअसल, राहुल गांधी के दौरे के दूसरे दिन अजमेर के रूपनगढ़ में किसान महापंचायत का आयोजन किया गया था, जिसमें ट्रॉली के ऊपर राहुल गांधी के लिए मंच बनाया गया था। इस मंच पर राहुल गांधी के साथ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अजय माकन, गोविंद सिंह डोटासरा और सचिन पायलट भी थे।

इसी दौरान माइक पर अनाउंसमेंट किया गया कि मंच के ऊपर राहुल गांधी के अलावा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ही रहेंगे, बाकी तमाम नेता मंच से नीचे उतर जाएंगे। इसके साथ ही सचिन पायलट समेत सभी नेता मंच से नीचे उतर गए।

किंतु सचिन पायलट का मंच से नीचे उतरना उपस्थित भीड़ को नागवार गुजरा और राहुल गांधी, अशोक गहलोत, गोविंद सिंह डोटासरा के खिलाफ नारेबाजी होने लगी। सचिन पायलट जिंदाबाद के नारे लगाए गए, जिसको लेकर अशोक गहलोत राहुल गांधी काफी असहज हो गए और राहुल गांधी के द्वारा मंच से ही युवाओं को शांत रहने के लिए कहा गया।

राहुल गांधी के कहने पर भी उपस्थित महापंचायत में किसान और युवा शांत नहीं हुए और राहुल गांधी जिंदाबाद के सचिन पायलट जिंदाबाद के नारे लगाते रहे। इसके बाद सचिन पायलट ने भी युवाओं को चुप कराने का प्रयास किया, लेकिन चुप नहीं हुए।

राहुल गांधी का दो दिवसीय दौरा इसके बाद समाप्त हो गया, लेकिन इसके बाद राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के आध्यात्मिक गुरु कहे जाने वाले कांग्रेस के नेता आचार्य प्रमोद कृष्णन के द्वारा ट्वीट करके राजस्थान की कांग्रेस की राजनीति को जबरदस्त हवा दे दी गई।

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आचार्य प्रमोद कृष्णम ने सचिन पायलट के माध्यम से कहा कि राजस्थान में सचिन पायलट की इज्जत और सम्मान की बात भले ही न हो, लेकिन इस तरह की हरकतों के कारण कांग्रेस पार्टी कभी भी वापस अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा अर्जित नहीं कर सकती है।

आचार्य प्रमोद कृष्णम के ट्वीट के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पार्टी मुखिया गोविंद सिंह डोटासरा समेत कांग्रेस आलाकमान तक हड़कंप मच गया। कहा जाता है कि आचार्य प्रमोद कृष्णम के ट्वीट के बाद पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के द्वारा संज्ञान लिया गया है और इस मामले में राजस्थान की सरकार व गोविंद सिंह डोटासरा से जवाब मांगा गया है।

पूरे प्रकरण की बात की जाए तो सबसे पहली रैली हनुमानगढ़ के पीलीबंगा में आयोजित की गई थी। जिसमें सचिन पायलट को मंच से बोलने तक का अवसर नहीं दिया गया था। हालांकि, सचिन पायलट उन 7 नेताओं में से थे जो राहुल गांधी के साथ मंच पर बैठे हुए थे।

इसके बाद दूसरी रैली श्रीगंगानगर में आयोजित की गई। यहां पदमपुर में सचिन पायलट को मंच पर स्थान भी मिला और उनको मंच से बोलने का भी अवसर दिया गया। किसानों में सचिन पायलट के बोलने से खुशी की लहर भी थी, लेकिन हनुमानगढ़ की रैली को लेकर सोशल मीडिया पर युवाओं के द्वारा जोरदार गुस्सा भी निकाला गया था।

उपस्थित लोगों का कहना है कि 13 फरवरी को जब वीर तेजाजी के मंदिर सुरसुरा में राहुल गांधी समेत तमाम कांग्रेस के नेता पूजा अर्चना कर रहे थे, तब भी अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा के लोगों के द्वारा सचिन पायलट को राहुल गांधी से दूर दिखाने के तमाम प्रयास हुए थे।

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यहां पर पूजा अर्चना करने के बाद राहुल गांधी की पहली किसान महापंचायत आयोजित की गई, जिसमें सचिन पायलट राहुल गांधी के बगल में बैठे हुए थे और बाएं तरफ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बैठे थे। यहां पर सचिन पायलट के साथ ही उनके करीबी विधायक मुकेश भाकर ने भी सभा को संबोधित किया।

आखरी सभा अजमेर के रूपनगढ़ में आयोजित की गई थी। ट्रॉली पर बने मंच पर से राहुल गांधी और अशोक गहलोत के अलावा तमाम नेताओं को नीचे उतरने की बात उपस्थित किसानों और युवाओं की भीड़ को इतनी नागवार गुजरी कि राहुल गांधी और अशोक गहलोत के खिलाफ नारेबाजी की गई, साथ ही सचिन पायलट जिंदाबाद के नारे भी लगे।

यहां पर उल्लेखनीय यह है कि दिसंबर 2018 में जब राजस्थान में कांग्रेस की सत्ता आई थी और अशोक गहलोत तीसरी बार मुख्यमंत्री बने थे, तब से लेकर खुलेआम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच राजनीतिक अदावत अपने चरम पर चल रही है।

हालांकि, तमाम तरह की बातें होने के बावजूद भी सचिन पायलट के द्वारा किसी तरह की असंयमित बयानबाजी नहीं की गई, किंतु जैसे ही जुलाई के महीने में सचिन पायलट और उनके लोगों के द्वारा अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ बगावत की गई, तब अशोक गहलोत और उनके मंत्रियों के द्वारा सचिन पायलट को लेकर तमाम तरह की अनर्गल बातें करी गई।

बताया जाता है कि सबसे पहले अपने विधानसभा क्षेत्र टोंक में उसके बाद दौसा और आखिर में भरतपुर में जो विशाल किसान महापंचायत सचिन पायलट के द्वारा की गई, उससे घबराकर ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा ने राहुल गांधी की राजस्थान में किसान पंचायतें कराने का फैसला किया गया था।

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सचिन पायलट द्वारा आयोजित की गई किसान महा पंचायतों को कमजोर दिखाने के लिए अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा ने रणनीति अपनाई थी, किंतु सारी रणनीति इसलिए धराशाई हो गई कि राहुल गांधी के लिए जो किसानों की भीड़ जुटाने का प्रयास किया गया था, वह भी नहीं जुटी और उसके साथ ही अशोक गहलोत एवं सचिन पायलट के बीच की राजनीति अदावत भी खुलकर फिर से सामने आ गई।

अब इस प्रकरण को लेकर राजस्थान की सियासत गर्म है और मामला कांग्रेस आलाकमान तक पहुंच चुका है। ऐसे में आने वाले दिनों में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के लिए कांग्रेस आलाकमान की तरफ से कोई नया आदेश आ सकता है या फिर कांग्रेस में इसी तरह से गुटबाजी चलती रहेगी, यह देखने का विषय है।