सचिन पायलट को मंच से उतारना अशोक गहलोत को भारी पड़ा, मामला प्रियंका गांधी के संज्ञान में पहुंचा

नई दिल्ली। राजस्थान की राजनीति में 2 दिन पहले दो दिवसीय दौरा कर राहुल गांधी (Rahul gandhi) भले ही वापस दिल्ली लौट गए हों, लेकिन लेकिन इसके साथ ही सचिन पायलट (Sachin pilot) और अशोक गहलोत (Ashok gehlot) के खेमे के बीच जो शीत युद्ध चल रहा था, उसको खुलकर बाहर निकालने में भी कामयाब हो गए।

अजमेर जिले के रूपनगढ़ (Ajmer rupangarh) में राहुल गांधी की किसान महापंचायत (Kisan mahapanchayat) के दौरान मंच पर केवल राहुल गांधी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को रखने की माइक से की गई घोषणा को लेकर प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka gandhi wadra) के आध्यात्मिक गुरु कहे जाने वाले कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम (Acharya pramod krishnam) के द्वारा किया गया ट्वीट अब तो अशोक गहलोत प्रशासन के लिए गले की हड्डी बनता जा रहा है।

दरअसल जब रूपनगढ़ में ट्रैक्टर परेड हो रही थी तभी मंच ट्रैक्टर ट्रॉली से बनाया गया था, जहां माइक से बाकायदा घोषणा की गई कि मंच पर केवल राहुल गांधी और अशोक गहलोत ही रहेंगे। इसके बाद सचिन पायलट, गोविंद सिंह डोटासरा (Govind singh dotasara), अजय माकन (Ajay makan) समेत तमाम कांग्रेसी नेताओं को नीचे उतार दिया गया।

इसी को लेकर आचार्य प्रमोद कृष्णम के द्वारा ट्वीट करके कहा गया कि किसानों की पंचायत में सचिन पायलट को मंच से उतारा जाना केवल सचिन पायलट की इज्जत से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि ऐसे कार्यों के द्वारा कांग्रेस पार्टी किसानों को अपने साथ नहीं जोड़ सकती और इससे कांग्रेस को भारी नुकसान होगा।

आचार्य प्रमोद कृष्णम क्रिएटिविटी काफी वायरल हो रहा है और शुरुआती चार-पांच घंटे के दौरान ही इस ट्वीट को 2500 से ज्यादा लोगों ने रिट्वीट किया है। आचार्य प्रमोद कृष्णम के साथ प्रियंका वाड्रा और राहुल गांधी भी ट्वीट पर जुड़े हुए हैं। ऐसे में मुनासिब है कि उन दोनों के द्वारा भी इस मामले को संज्ञान में लिया गया होगा।

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आचार्य प्रमोद कृष्णम कांग्रेस पार्टी के टिकट पर 2014 में उत्तर प्रदेश के संभल जिले से और 2019 में राजनाथ सिंह (Defence minister Rajnath singh) के सामने लखनऊ से चुनाव हार चुके हैं, हालांकि एक मंदिर के पीठाधीश्वर हैं।

इससे पहले पिछले सप्ताह ही जब भरतपुर के बयाना में सचिन पायलट की किसान महापंचायत हुई थी और वहां पर लाखों की संख्या में लोग पहुंचे थे। उसका एक वीडियो पायलट के द्वारा ट्वीट किए जाने पर उसे रिट्वीट करते हुए प्रमोद कृष्ण ने मुख्यमंत्री भवः लिखा था, जिसके बाद भी राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार में हड़कंप मच गया था।

कांग्रेस के जानकारों का कहना है कि आचार्य प्रमोद कृष्णम के दोनों ट्वीट को लेकर प्रियंका गांधी वाड्रा ने संज्ञान में लिया है और इस प्रकरण को लेकर राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार के साथ ही गोविंद सिंह डोटासरा के संगठन से भी स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है।

कहा जा रहा है कि जिस तरह से पूरे 2 दिन के दौरे के दौरान सचिन पायलट को राहुल गांधी से दूर रखने का और उनको कमतर दिखाने का प्रयास किया गया है, उसके बाद पायलट के समर्थकों में काफी गुस्सा है। इस गुस्से का इजहार उनके द्वारा रूपनगढ़ की सभा के दौरान जबरदस्त नारेबाजी करते हुए किया जा चुका है।

राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है और पिछले दिनों में ही अशोक गहलोत की सरकार के द्वारा स्पष्ट किया गया था कि उनके मंत्रिमंडल में किसी तरह का फेरबदल कम से कम 15 मार्च तक नहीं होगा, उससे भी राज्य के कांग्रेस समेत उन्हें निर्दलीय विधायकों में तनाव है, जिन्होंने 1 महीने तक होटलों में रहकर अशोक गहलोत की सरकार बचाई थी।

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देखना यह होगा कि सचिन पायलट को जिस तरह से दरकिनार करने की कोशिशें हुई है और आचार्य प्रमोद कृष्णम के द्वारा एक सप्ताह में दो जबरदस्त ट्वीट करके पायलट के पक्ष में माहौल बनाने का काम किया है, उससे राज्य की अशोक गहलोत सरकार और कांग्रेस आलाकमान के ऊपर क्या प्रभाव पड़ता है?