समीक्षा: RSS पृष्ठभूमि के BJP अध्यक्ष सतीश पूनियां क्यों गए मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह?

जयपुर। आमतौर पर आरएसएस को मुस्लिम विरोधी कहा जाता है। खासतौर से कांग्रेस और भाजपा विरोधी पार्टियों के द्वारा लगातार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को मुसलमानों का गौर दुश्मन बताया गया है। शायद इसी के चलते भाजपा के संघ पृष्ठभूमि के नेता मुस्लिम धार्मिक स्थलों से हमेशा दूरी बनाए रखते हैं।

एक बार पाकिस्तान गए लालकृष्ण आडवाणी के द्वारा जब मोहम्मद अली जिन्ना की मजार पर जाना हुआ और वहां पर उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना को लेकर प्रशंसा की थी। उसके बाद से ही कहा जाता है कि भाजपा में लालकृष्ण आडवाणी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समर्थक लगभग समाप्त हो गए।

Rashtriy Swayamsevak Sangh पृष्ठभूमि के कट्टर हिंदू कहे जाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा प्रधानमंत्री बनने से पहले मुस्लिमों के एक संगठन के द्वारा टोपी पहनाई जाने से मना करने पर देश में काफी विवाद हुआ था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा मुस्लिम समुदाय के लोगों की जालीदार टोपी पहनने से इनकार करने के चलते देश के हिंदुओं में उनकी स्वीकार्यता चरम पर पहुंच गई थी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि जब 2014 का लोकसभा चुनाव हुआ तो हिंदुओं ने मोदी में हिंदू प्रधानमंत्री देखा।

भाजपा के कई ऐसे नेता हैं, जिन्होंने जब भी मुसलमानों की प्रशंसा की या फिर मुस्लिम धर्म स्थलों पर जाकर मुस्लिम धर्म गुरुओं की प्रशंसा की तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नजर में उन नेताओं का क्रेज हमेशा के लिए खत्म हो गया। नतीजा यह हुआ कि उनको राजनीतिक तौर पर बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है।

संभवत यही सबसे बड़ा कारण है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पृष्ठभूमि से आने वाले भाजपा के छोटे से छोटे और बड़े से बड़े नेता के द्वारा मुस्लिम धार्मिक स्थलों से दूरी बनाई जाती है, ताकि संघ की नजर में इतने सेकुलर नहीं हो जाएं, कि संघ के द्वारा जो मापदंड तय किए गए हैं उनमें खड़े ही नहीं उतरे।

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राजस्थान के भाजपा के अध्यक्ष सतीश पूनिया ने शुक्रवार को अजमेर में भाजपा के नवनिर्वाचित महापौर और उपमहापौर को पदभार ग्रहण करने के बाद अजमेर में मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में माथा टेकने को लेकर भी एक नई चर्चा शुरू हो गई है।

वैसे तो सतीश पूनिया के लिए कहा जाता है कि राष्ट्र के सम सेवक संघ के पूछे बिना उनके द्वारा कोई कदम नहीं उठाया जाता है, किंतु जिस तरह से सतीश पूनिया ने मोहिद्दीन चिश्ती की दरगाह में माथा टेका और वहां पर उनको फूलों से तौला गया, साथ ही चादर चढ़ाई उसके बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।

सवाल यह उठता है कि राजस्थान में इस वक्त संगठन के मुखिया सतीश पूनिया के द्वारा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में चादर चढ़ाना और माथा टेकना क्या उनके राजनीतिक भविष्य पर काली चादर चढ़ा सकता है या फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वारा पूछने पर ही सतीश पुनिया अजमेर दरगाह गए थे?

राजनीति के जानकार कहते हैं कि अगर सतीश पूनियां के द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से पूछे बिना मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में गए और वहां पर माथा टेका गया, वहां पर चादर चढ़ाई गई है तो निश्चित ही आने वाले समय में सतीश पूनिया का राजनीतिक भविष्य अंधकार में होना शुरू हो जाएगा।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक विंग भी देश के अल्पसंख्यकों के लिए, विशेष रूप से मुसलमानों के लिए सामाजिक कार्य करती है और उनको राष्ट्रवाद से जोड़ने के लिए तमाम प्रयास करती है। ऐसे में सतीश पूनिया का दरगाह पर जाना, वहां पर चादर चढ़ाना सवाल तो खड़े करता है, किंतु जवाब भी संघ की विचारधारा के भीतर ही है।

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