राजस्थान की एकमात्र सेंट्रल यूनिवर्सिटी क्वारंटाइन!

जयपुर। राजस्थान का एकमात्र केंद्रीय विश्वविद्यालय, जोकि जयपुर-अजमेर रोड पर बांदर-सिंदरी में स्थित है, यह सेंट्रल यूनिवर्सिटी इन दिनों एक तरह से क्वारंटाइन है।

राजधानी जयपुर से करीब 80 किलोमीटर दूर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति कोरोने काल में 6 अक्टूबर 2020 को रिटायर हो गए थे, उसके बाद से ही विश्वविद्यालय का सरकारी तंत्र एक तरह से क्वॉरेंटाइन है।

केंद्र और राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा केंद्रों को खोलने के आदेश जारी कर दिए हैं, किंतु सेंट्रल यूनिटी में अभी भी अकादमी गतिविधियां शुरू नहीं हुई है। विद्यार्थियों को यूनिवर्सिटी कैंपस में क्लास शुरू होने का इंतजार है तो विश्वविद्यालय का प्रबंधन कह रहा है कि धीरज रखो, सब सही हो जाएगा।

सैकड़ों की संख्या में विद्यार्थियों विद्यार्थी 1 वर्ष डिप्लोमा कोर्सेज में प्रवेश ले चुके हैं। बीते 6 माह के दौरान ऑफलाइन पढ़ाई की सूरत अभी तक नजर नहीं आ रही है। दूसरी तरफ से प्रैक्टिकल सब्जेक्ट वाले विद्यार्थियों का स्किल डेवलपमेंट तो दूर की बात है। स्टूडेंट्स विश्वविद्यालय प्रबंधन से मिलकर अपनी आपत्ति दर्ज करा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई एक्शन नहीं हो रहा है।

ऐसे में केंद्र सरकार और एमएचआरडी को शिकायत करने की तैयारी में चर्चा है, कि कार्यवाहक कुलपति अपनी मनमर्जी से काम करके विश्वविद्यालय के सारे जमे जमाए प्रबंधन को बिगाड़ने में जुटे हुए हैं।

पिछले साल 6 अक्टूबर को रिटायर हुए थे कुलपति

केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति रहे प्रोफेसर अरुण कुमार पुजारी पिछले साल को रोना काल के दौरान 6 अक्टूबर 2020 को रिटायर हो गए थे।

कुलपति के विधायक के बाद विश्वविद्यालय में डीन ऑफ एकेडमिक्स प्रोफेसर नीरज गुप्ता के पास विश्वविद्यालय के कुलपति का चार्ज है।

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देशभर में 1 फरवरी से सभी वेस्टीज खोलने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी सेंटर यूनिवर्सिटी में ऑफलाइन अध्ययन अध्यापन का कार्य शुरू नहीं किया गया है।

ऐसा लगता है कि कुलपति के रिटायर होने के साथ ही राजस्थान की यह सेंट्रल यूनिवर्सिटी भी क्वॉरेंटाइन हो गई है और यहां के मैनेजमेंट को इस बात की कोई चिंता नहीं है।

कार्यवाहक कुलपति के पास है अभी चार्ज

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा निर्देशों के अनुसार विश्वविद्यालयों में आदेश जारी किया गया है कि अपनी जिम्मेदारी के साथ सुरक्षा के सभी इंतजामों को ध्यान में रखकर विश्वविद्यालय परिसर में अध्ययन कार्य शुरू करवा सकते हैं।

ऐसे में केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रबंधन ने पुराने विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय में हॉस्टल तो खाली करवा लिया, पर नए स्टूडेंट्स या रेगुलर स्टूडेंट के लिए अभी तक दरवाजे बंद कर रखे हैं।

ऐसे में डिप्लोमा कोर्सेज के एक वर्ष में से 6 महीने की भी चुके हैं। अगर यूनिवर्सिटी में अकादमी की गतिविधियां शुरू नहीं की गई तो प्रैक्टिकल स्किल डेवलपमेंट करना मुश्किल हो जाएगा।

विश्वविद्यालय में कक्षा, छात्रावास और यहां तक कि मुख्य द्वार पर भी नो एंट्री

केंद्रीय विश्वविद्यालय में 1 वर्षीय डिप्लोमा कोर्स के स्टूडेंट ने बताया कि प्रैक्टिकल बेस्ट डिप्लोमा है, पहले 6 माह बीत चुके हैं। ऐसे में अभी तक विश्वविद्यालय में अकादमी के गतिविधियां शुरू नहीं हुई है, तो कौशल विकास भूली जाइए। मैनेजमेंट का कोई सदस्य मिलने तक को तैयार नहीं है, शिकायत करने गए तो बोला तुम्हें बहुत जल्दी है।

एक अन्य स्टूडेंट ने बताया कि लगातार ऑनलाइन पढ़ाई से आंखों की रोशनी कम हो गई है। गांव में रहना पड़ता है, वहां नेटवर्क नहीं है, जिसके चलते पढ़ाई डिस्टर्ब हो रही है क्लास भी ढंग से अटेंड नहीं कर पा रहे हूं। प्रबंधन के द्वारा विश्वविद्यालय के बाहर फेंकने की धमकी दी गई है। ऐसे में अधिकतर स्टूडेंट्स सामने आने को तैयार नहीं हैं।

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केंद्र और राज्य सरकार की यूनिवर्सिटी में खुल चुकी हैं

राजस्थान में पहले ही विश्वविद्यालय और महाविद्यालय खोले जा चुके हैं। हाल ही में केंद्र सरकार ने केंद्रीय विश्वविद्यालय और अन्य कॉलेज को भी खोलने के निर्देश जारी कर दिए हैं। अधिकांश केंद्रीय विश्वविद्यालय खोले जा चुके हैं दिल्ली यूनिवर्सिटी समेत केरल, जम्मू कश्मीर और दिल्ली के ही जेएनयू खुल चुके हैं, लेकिन राजस्थान के केंद्रीय विश्वविद्यालय को खोलने की प्रक्रिया फिलहाल शुरू नहीं हो पाई है।

कार्यवाहक वीसी प्रो. नीरज गुप्ता का कहना है कि विश्वविद्यालय में स्टेप बाय स्टेप अकादमी गतिविधियां शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है। सभी विद्यार्थियों को तो संतुष्ट नहीं किया जा सकता है, कुछ विद्यार्थियों को ऐसा लगता है जल्दबाजी है, ऐसे में शिकायत करते रहते हैं। जल्द ही विश्वविद्यालय की सभी गतिविधियां शुरू कर देंगे।