वसुंधरा राजे फिर नहीं, बहाना फिर वही बहु के बीमार होने का

-वसुंधरा राजे ही हैं सर्वमान्य नेता, उनकी अनदेखी पार्टी के लिए सही नहीं-सिंघवी

जयपुर। राजस्थान भाजपा में गुटबाजी का सिलसिला अब भी जारी है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे मंगलवार को विधायक दल की बैठक में नहीं पहुंचीं। इससे पहले वसुंधरा राजे कोर कमेटी की बैठक में भी नहीं पहुंची थी।

वसुंधरा राजे ने लगातार दूसरी बार अपनी बहू को बीमार होने का दावा किया है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि वसुंधरा राजे दिल्ली में हैं, जबकि उनकी बहू धौलपुर महल में हैं।

विधायक राजे खेमे के विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने एक बार फिर कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ही मेरी और पार्टी की सर्वमान्य नेता हैं। यदि उन्हें इग्नोर किया जाता है तो मैं समझता हूं कि यह पार्टी के लिए अच्छा नहीं है।

विधानसभा में विधायक दल की बैठक के बाद सिंघवी ने कहा कि वसुंधरा राजे किसी ग्रुप की सदस्य नहीं। पूरे राजस्थान की नेता हैं। पार्टी की व्यवस्था के हिसाब से किसी को उपाध्यक्ष महामंत्री, प्रदेशाध्यक्ष बनाया जाता है, लेकिर वसुंधरा ही सर्वमान्य नेता हैं।

कोटा और प्रदेश की अन्य नगरपालिकाकों में पार्टी की हार के लिए सिंघवी ने आपसी संवाद की कमी को कारण बताया। उन्होंने कहा कि कोटा नगरीय क्षेत्र में भाजपा को मजबूत माना जाता है, लेकिन हमसे सभी नगरपालिकाएं खिसक गई हैं।

कोटा जनसंघ और भाजपा का गढ़ था। हमने कोटा हारा, बूंदी हारा। इस पर संगठन को विचार करना चाहिए। कहीं ना कहीं आपसी संवाद की कमी है। सबको मिलकर बैठकर विचार करना चाहिए।

वहां के जनप्रतिनिधि हैं और पुराने लोग हैं, उनसे चर्चा करनी चाहिए। अगर आप सब लोगों से बात नहीं करोगे तो चंद लोगों से बात करके निर्णय कर लोगे तो इस प्रकार की स्थिति बनेगी।

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विशेष लोगों से बात करके ही टिकट बांट दिए

सिंघवी ने कहा कि चुनाव के लिए जयपुर से कमेटियां बनी और जिन लोगों को टिकट का निर्णय लेने के लिए भेजा, उनके संवाद में कमी रही। विशेष लोगों से बात करके टिकट बांट दिए। जबकि हारे और जीते हुए विधायक और ऐसे कुछ लोग जिन्होंने चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन उनका तजुर्बा इन छोटे चुव में काम आता। उनको दरकिनार किया गया है।

सदन में क्या मुददा उठाना है, रोज सुबह 10 बजे तय होंगे मुददे, भाजपा ने बनाई कोर कमेटी

राजस्थान विधानसभा के बुधवार से शुरू हो रहे बजट सत्र को लेकर भाजपा ने कमर कस ली है। अपराध, बेरोजगारी, किसानों की कर्जमाफी सहित जनमानस से जुड़े सभी मुददों को लेकर भाजपा सदन में सरकार का घेराव करेगी।

पार्टी ने नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया की अध्यक्षता में एक कोर कमेटी का गठन किया है जो सत्र के दौरान रोजाना सुबह 10 बजे बैठकर सदन में उठाए जाने वाले मुददे तय करेगी। भाजपा विधायक दल की मंगलवार को हुई बैठक में यह निर्णय किए गए।

विधायक दल की बैठक की शुरुआत में किरण माहेश्वरी सहित चार दिवंगत विधायकों और उत्तराखंड त्रासदी को लेकर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद विधायकों को सत्र के दौरान शत-प्रतिशत उपस्थिति के निर्देश दिए गए।

साथ ही कटारिया की अध्यक्षता में एक कोर कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां सहित वरिष्ठ विधायक शामिल किए गए हैं।

तय समय से लेट पहुंचे कई विधायक, कुछ नदारद

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भाजपा विधायक दल की बैठक में करीब एक दर्जन विधायक देरी से पहुंचे। यही नहीं कई विधायक बैठक से नदारद भी रहे। हालांकि उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि अनुपस्थित रहने वाले विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष को नहीं आने का कारण बता दिया था।

बैठक में देर से आने वाले नेताओं में विधायक धर्म नारायण जोशी, निर्मल कुमावत, रामलाल शर्मा सहित करीब एक दर्जन विधायकों के नाम शामिल हैं। राठौड़ के अनुसार इन विधायकों से पार्टी कुछ राशि पेनल्टी के रूप में भी लेती है, जो देर से आते हैं।

उठा राम मंदिर का मुद्दा

बैठक बीजेपी विधायक दल की बैठक में भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर भी शामिल हुए। अपने संबोधन में उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए चलाए जा रहे समर्पण निधि अभियान का भी जिक्र किया और पार्टी विधायकों द्वारा इसमें पूर्ण सहयोग करने की अपील भी की।

सरकार का आधा कार्यकाल गुजर चुका है। बचा हुआ कार्यकाल बेहद कठिन रहेगा। सवा दो साल के कुशासन में इतने वर्ग पीड़ित है। वो सरकार से सड़क पर जवाब मांगेंगे। हम सदन में जवाब मांगेंगे। इन्हें ना लोकतंत्र और ना शासन की परवाह हैं। सरकार पर जिस तरह की अंगुलियां उठने लगी है। मुझे लगता है कि ये सरकार को ले डूंबेंगे।

सतीश पूनियां, प्रदेशाध्यक्ष भाजपा

50 से ज्यादा मुददों को भाजपा ने छांटा है, जिन्हें सदन में उठाकर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। राहुल गांधी ने दस तक की गिनती करने वाले राहुल गांधी राजस्थान में किसान आंदोलन को हवा देने आ रहे हैं। हम जवाब मांगेंगे कि किसानों की कर्जमाफी का क्या हुआ।

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राजेंद्र राठौड़, उपनेता प्रतिपक्ष

सरकार अपना आधा कार्यकाल लगभग गुजार चुकी है, लेकिन पूर्व में की गई 70 फीसदी घोषणाओं पर भी अब तक अमल नहीं हो पाया है। ऐसे में मौजूदा बजट सत्र के दौरान सरकार विपक्षियों के साथ अपनों से भी घिरी नजर आएगी।

अशोक लाहोटी, भाजपा विधायक