शराब की बिक्री का पूरा काम अब केवल पूंजीपतियों को, आम आदमी नहीं ले सकता लाइसेंस

जयपुर। राजस्थान सरकार ने नई आबकारी नीति जारी की है, जिसमें शराब की बिक्री का पूरा काम अब केवल मुझे पतियों के हाथों में चला जाएगा। जो आम आदमी अब तक लाइसेंस के लिए आवेदन कर लाटरी के माध्यम से दुकान खोल शराब बेचने का काम करता था, वह केवल पूंजीपति के नौकरी कर सकता है।

राज्य सरकार की नई आबकारी नीति के अनुसार दुकानों को नीलाम किया जाएगा। सबसे ज्यादा बोली दाता को दुकान 2 साल के लिए नीलाम की जाएगी। राज्य सरकार ने इसके लिए तीन कैटेगरी बनाई है। सबसे कम 50 लाख तक, दूसरी एक करोड़ तक और तीसरी दो करोड़ से ऊपर।

इसके साथ ही राज्य सरकार ने देसी शराब और विदेशी शराब की अलग-अलग दुकानें खोलने के मापदंड भी खत्म कर दिए हैं। अब एक ही दुकान में देसी और विदेशी दोनों तरह की शराब मिलेगी।

राज्य सरकार ने लंबे समय बाद, करीब दो दशक बाद यह आबकारी नीति जारी की है। इससे पहले भी राज्य में इसी तरह से पूंजीपतियों के जरिए पूरी राज्य में शराब बिक्री का कार्य होता था, लेकिन 2003 में वसुंधरा राजे की सरकार गठन के बाद लाइसेंस नीति जारी की गई थी।

इसके साथ ही राजस्थान सरकार ने टैक्स में कुछ कमी की है, जिसके चलते बीयर की बोतल पर करीब ₹25 मूल्य कम होने की संभावना है। इसी तरह से विदेशी शराब का मूल्य भी घटने की उम्मीद है।

राज्य सरकार को पिछले वित्त वर्ष के बजाए इस नए वित्त वर्ष में शराब से करीब 500 करोड रुपए अतिरिक्त राजस्व आय की उम्मीद है। जबकि चालू वित्त वर्ष में अधिकांश समय कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी के चलते शराब की बिक्री पर विपरीत प्रभाव पड़ा है।

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नई आबकारी नीति 1 अप्रैल 2021 से प्रदेश भर में लागू हो जाएगी। उससे पहले मार्च के महीने में राज्य सरकार के द्वारा ठेका प्रथा के तहत दुकानों की नीलामी की जाएगी।