किसान आंदोलन नहीं, मुख्यमंत्री गहलोत हैं पायलट के निशाने पर

जयपुर। पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट भले ही किसान महापंचायत में तीन कृषि कानूनों को लेकर मोदी सरकार पर हमलावर हों, किन्तु हकीकत यह है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार उनके निशाने पर है।

पायलट ने शुक्रवार को दौसा में किसानों को संबोधित किया, जहां पर मुरारीलाल मीणा और पीआर खटाना ने इन महापंचायत का आयोजन किया था। इस मौके पर पायलट अपने पिता स्व. राजेश पायलट को याद कर भावुक भी हुए तो मोदी सरकार की जमकर आलोचना की।

इस अवसर पर सचिन पायलट ने दौसा में किसान महापंचायत को संबोधित किया। उनके खेमे के विधायक मुरारी लाल मीणा, विधायक गजराज खटाना, विधायक सुरेश मोदी, विधायक हरीश मीणा, विधायक पी.आर मीणा, विधायक राकेश पारीक, विधायक वेदप्रकाश सोलंकी, दौसा ज़िला कांग्रेस के निवर्तमान अध्यक्ष रामजीलाल ओढ़, एवं हजारों की संख्या किसान उपस्थित रहे।

सचिन पायलट ने अपने संबोधन में कहा कि इन कानूनों की बारीकियो को समझना जरुरी है, केंद्र सरकार ने इन कानून को जबरदस्ती और जल्दबाजी में पारित कर थोपे हैं। इन कानूनों का विरोध पूरे देश भर में हो रहा, सैंकड़ों किसान शहीद हो गए हैं, वो कहते है फसल कहीं भी बेच सकते हैं, पर मंडियों को समाप्त करना है।

आगे कहा कि यदि कोई किसान और व्यापारी में विवाद होने पर SDM के पास जाओ, जिस SDM को हम जानते नहीं हैं, वो SDM हमारी क्या मदद करेगा?
छोटे किसान की रक्षा की बात कानूनों में नही, किसानों ने गांधीवादी होने का परिचय दिया है, केंद्र सरकार ने 11 बार न्यौता दिया वार्ता के लिए, पर केंद्र की क्या मज़बूरी हैं कि वापस कानून नही लेना चाहते।

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सोनिया गांधी ने 22 राजनैतिक दलों से चर्चा की और सबको एक साथ लाकर खड़ा किया, इस कानून के विरोध में
गणतंत्र दिवस पर जो घटना हुई, उसकी हमे निंदा करनी चाहिए, लेकिन उस दिन की आड़ में सैंकड़ों किसानों को पाबन्द कर दिया, जो दिल्ली की बॉर्डर पर कीलबंदी की गई है, वैसा हिन्दुस्थान और पाकिस्तान की बॉर्डर पर भी नहीं होता हैं, जो प्रस्ताव हमने पास किया,
उसको मनवाकर छोड़ेंगे।

सचिन पायलट ने अपने पूरे संबोधन में कहीं पर भी अशोक गहलोत सरकार की प्रशंसा नहीं की। इसके साथ ही उन्होंने राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार के द्वारा किए गए किसी भी कार्य का उल्लेख नहीं किया और ना ही पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की प्रशंसा की।