वसुंधरा ने की डॉ. पूनियां की शिकायत और बेटे दुष्यंत को मंत्री बनाने की वकालत

जयपुर। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने एक दिन पहले जब दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह और अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की तो राजस्थान में सियासी हलचल तेज हो गई।

इस उच्च स्तरीय मुलाकात के अलग अलग मायने निकाले गये हैं, किंतु भाजपा के दिल्ली सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वसुंधरा राजे ने भाजपा के प्रदेश नेतृत्व, यानी अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां की एक बार फिर से शिकायत की है।

दरअसल, अब यह तो साफ हो गया है कि डॉ. पूनियां और राजे के बीच भाजपा में बीते करीब डेढ दशक का सबसे बड़ा सियासी युद्ध चल रहा है, लेकिन पिछले लगभग दो साल से गृहमंत्री अमित शाह ने राजे को मिलने का समय नहीं दिया गया था और अब, जब मुलाकात हुई है तो राजे समर्थकों की बाछें खिल गईं हैं।

भाजपा के दिल्ली कार्यालय सूत्रों ने बताया कि राजे ने एक बार फिर से पहले की भांति जेपी नड्डा को डॉ. पूनियां की शिकायत की है तो साथ ही अमित शाह को भी अपनी अनदेखी, कोर कमेटी में युनूस खान व अशोक परनामी को शामिल नहीं करने जैसी शिकायतें की हैं।

बता दें कि इससे पहले करीब तीन चार माह पहले जब राजे दिल्ली में डेरा डाले हुये थीं, तब भी उन्होंने नड्डा से भाजपा अध्यक्ष की शिकायतें की थीं।

एक बार फिर से राजे ने नड्डा के साथ ही शाह को भी शिकायत की है कि प्रदेश नेतृत्व उनको तवज्जो नहीं देता है, सीनियर होने के बाद भी उनसे कोई भी राय नहीं ली जाती है, तमाम चुनाव में टिकट वितरण, कार्यकारिणी और जिलाध्यक्ष से लेकर मोर्चा अध्यक्षों की नियुक्ति भी अपनी मर्जी से की है।

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इसके साथ ही सूत्रों ने दावा किया है कि राजे ने झालावाड़ से लगातार चौथी बार सांसद अपने बेटे दुष्यंत सिंह को मोदी सरकार में मंत्री बनाने, उनको कम से कम राज्यमंत्री बनाने की मांग भी रखी है।

उल्लेखनीय है कि फिलहाल राज्य में किसी बड़े सियासी या सत्ता के उलटफेर की संभावना नहीं है, ऐसे में राजे चाहती हैं कि कम से कम अपने बेटे को एक बार मंत्री बनाकर कार्यकर्ताओं को अपनी जादूगरी का परिचय करवाया जाये, क्योंकि दो साल में राजे को ना तो केंद्रीय नेतृत्व पूछ रहा और ना ही प्रदेश नेतृत्व कोई तवज्जो दे रहा है।

इसके चलते अब भाजपा के बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं में राजे के सियासी दिन लदने की बातें आम हो गईं हैं।