कांग्रेस किसानों को भड़का रही है और भाजपा किसान आंदोलन की तैयारी कर रही है

जयपुर। तीन कृषि कानूनों को लेकर 2 महीने से पंजाब और हरियाणा समेत विभिन्न राज्यों के किसान दिल्ली को घेर कर बैठे हुए हैं। 26 जनवरी को किसानों के द्वारा आउटर रिंग रोड पर ट्रैक्टर परेड का आयोजन किया गया है।

किसानों के इस आंदोलन को एक तरफ जहां दिल्ली की आम आदमी पार्टी तो दूसरी तरफ कांग्रेस के ऊपर भड़काने का आरोप लग रहा है। इस बीच राजस्थान की भाजपा इकाई के द्वारा विधानसभा सत्र शुरू होने के बाद राजस्थान में बड़ा किसान आंदोलन शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

राजस्थान की भाजपा इकाई के द्वारा जब रविवार को राज्य में कोर कमेटी की पहली बैठक हुई तो उसमें सबसे पहले किसान कर्ज माफी को लेकर आंदोलन करने का फैसला लिया गया है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां का कहना है कि वीसीआर और फ्यूल सरचार्ज के नाम पर किसानों और
आमजन पर लूट बंद गहलोत सरकार करे और मोदी सरकार की आयुष्मान भारत योजना को जल्द लागू कर प्रदेश के आमजन को राहत प्रदान राज्य सरकार करे।

साथ ही कहा है कि प्रदेश में पेट्रोल-डीजल पर वैट कम कर आमजन को गहलोत सरकार राहत दे। डाॅ. पूनियां ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा कि गहलोत सरकार ने सत्ता में आते ही पेट्रोल-डीजल पर वैट, बिजली बिलों पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाकर प्रदेश की आम जनता पर भार डाला है, जिससे प्रदेश की जनता त्रस्त है।

राज्य सरकार पेट्रोल-डीजल पर वैट घटाए एवं बिजली बिलों पर फ्यूल सरचार्ज को खत्म कर प्रदेश की आम जनता को राहत प्रदान करने का काम करें।

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डाॅ. पूनियां ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार में किसानों को कृषि बिलों में 833 रूपये प्रतिमाह की सब्सिडी (10 हजार रूपये वार्षिक) देकर राहत प्रदान की थी, जिसे कांग्रेस सरकार ने आते ही बंद कर दी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के लिए बिजली बिलों पर सब्सिड़ी वापस शुरू करें और वीसीआर के नाम पर किसानों को प्रताड़ित करना बंद कर राज्य सरकार राहत प्रदान करें।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि दुर्भावना से प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना को प्रदेश में लागू ही नहीं किया, जिससे गरीब व्यक्ति अस्पतालों में मुफ्त इलाज के लिए भटक रहा है।

गहलोत सरकार आयुष्मान भारत योजना को तुरन्त प्रभाव से प्रदेश में लागू कर आमजन को राहत प्रदान करें। माना जा रहा है कि पिछले दिनों जिस तरह से डॉ पूनियां के नेतृत्व में देवदर्शन यात्रा निकालकर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की योजना को विफल बनाने का काम कर रहे हैं, तो साथ ही 4 सीटों पर फरवरी-मार्च में संभावित उपचुनाव के लिए प्रचार का आगाज कर चुके हैं।

इसके साथ ही दिसंबर 2018 में सम्पूर्ण कर्जमाफी का वादा कर सत्ता में आई कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार को उसी कर्जमाफी के मुद्दे पर सड़क के आंदोलन से आइना दिखाने का प्लान बना लिया है।

वैसे तो इस वक्त अध्यक्ष डॉ. पूनियां और पूर्व मुख्यमंत्री राजे के बीच सीधी सियासी टक्कर चल रही है, किन्तु भाजपा की प्रदेश इकाई इस मुद्दे को साइड लाइन कर सरकार से दो-दो हाथ कर अशोक गहलोत व पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच की राजनीतिक लड़ाई को हवा देने की फिराक में जुटी है।

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कर्जमाफी, फ्यूल चार्ज, आयुष्मान भारत योजना और बिजली सब्सिडी के बहाने वर्तमान सरकार के खिलाफ पहले बड़े प्रदर्शन के जरिये अध्यक्ष डॉ. पूनियां भी खुद के संघर्ष की ताकत भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व को दिखाना चाहते हैं।

इससे जहां एक ओर वसुंधरा राजे की जनता में पकड़ कमजोर होगी तो साथ ही अबतक संगठन मुखिया के तौर पर खुद को साबित कर चुके अध्यक्ष स्वयं को जनता के नेता के तौर पर पेश करने का काम करेंगे।

भाजपा सूत्रों का कहना है कि अध्यक्ष के रूप में पहले चरण में करीब सवा साल तक पूनियां ने राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष अपनी संगठन मुखिया की काबिलियत को साबित करने का काम कर मोदी, शाह, नड्डा के मुंह से वाहवाही लूट चुके हैं, तो 2023 या उससे भी पहले मध्यावधि चुनाव में प्रदेश का सबसे बड़ा नेता दिखाने के लिए जनता की भीड़ का सहारा लेने के लिए आंदोलन की रुपरेखा तैयार कर रहे हैं।

वैसे भी संघनिष्ठ पूनियां को आरएसएस का फुल सपोर्ट होने के कारण पीछे मुड़कर संगठन में देखने की जरूरत नहीं पड़ती है। विपक्ष में रहते हुए भाजपा के द्वारा हमेशा बड़े आंदोलन किए गए हैं।

यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार अध्यक्ष के नेतृत्व में बड़ा सफल आंदोलन किया जा सका तो वसुंधरा राजे को परोक्ष रूप से कमजोर करने में जुटे संघ को कितनी सफलता मिल पाती है?

यदि डॉ पूनिया ने अपने राजनीतिक रण कौशल का परिचय देते हुए सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा करने में कामयाबी पाई, तो निश्चित ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए राज्य में आगे की राजनीति करना कठिन हो जाएगा।

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