वसुंधरा राजे की योजना को डॉ. ,पूनियां ने किया हाईजैक!

जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की योजना को भाजपा के अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया ने हाईजैक कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक फरवरी के महीने में वसुंधरा राजे राजस्थान में देवदर्शन के नाम से यात्रा शुरू करके भाजपा राष्ट्रीय नेतृत्व के ऊपर दबाव बनाने की योजना को अमलीजामा पहना ही रही थीं।

इसकी सूचना भाजपा के संगठन मुखिया को मिल गई और वसुंधरा राजे की संभावित योजना पर पानी फेरते हुए अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया ने लगभग एक महीने पहले ही सालासर बालाजी दर्शन के नाम पर देवदर्शन यात्रा शुरू भी कर दी।

इसको लेकर पिछले दिनों वसुंधरा राजे के गुट से माने जाने वाले भाजपा विधायक प्रतापसिंह सिंघवी के घर पर वसुंधरा गुट के तमाम विधायकों और सांसदों की गुप्त मीटिंग हुई थी। सूत्र बताते हैं इस बैठक में अशोक परनामी, अरुण चतुर्वेदी जैसे पूर्व अध्यक्षों की उपस्थिति रही।

भाजपा सूत्रों के मुताबिक इस गुप्त बैठक में मालवीय नगर विधायक कालीचरण सराफ, पूर्व विधानसभा व भीलवाड़ा के शाहपुरा से वर्तमान विधायक अध्यक्ष कैलाश चंद मेघवाल, प्रताप सिंह सिंघवी के अलावा तमाम उन विधायकों को शामिल किया गया था, जो वसुंधरा राजे के साथ पार्टी छोड़ने और नई पार्टी में शामिल होने के लिए तैयार बैठे हैं।

हालांकि, इस मीटिंग में भी वसुंधरा राजे की भविष्य की संभावित योजना को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया। बताया जाता है कि इस मीटिंग में वसुंधरा राजे खुद भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वर्चुअली जुड़ी हुई थीं।

जानकारी में आया है कि जो लोग इस बैठक में शामिल हुए थे, उनमें से कुछ की राय यह थी कि वसुंधरा राजे अपना अलग से राजनीतिक दल बनाए और भाजपा-कांग्रेस दोनों के खिलाफ राजस्थान में 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए तैयारी शुरू कर दें, किंतु अन्य लोग इसके लिए तैयार नहीं थे।

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उनका मानना था कि वसुंधरा राजे को पार्टी के अंदर रहकर ही 2008 से 2013 तक पार्टी में दबाव बना कई नेताओं को अपने पक्ष में लेकर केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव बनाने का जो काम किया गया था, उसी तरह से देवदर्शन यात्रा और तमाम दूसरे कार्य कर प्रेशर पॉलिटिक्स करनी चाहिए, जिससे राजस्थान के भाजपा नेतृत्व को बदला जा सके और 2023 के चुनाव से पहले वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने को मजबूर हो जाए।

बताया जाता है कि इस बैठक में सभी नेता एक बात पर सहमत थे, कि वसुंधरा राजे को केंद्रीय नेतृत्व से अनुमति लेकर देवदर्शन यात्रा शुरू कर देनी चाहिए और यदि केंद्रीय नेतृत्व अनुमति नहीं देता है तो भी देवदर्शन यात्रा के नाम पर राजस्थान के प्रमुख देव स्थानों की यात्रा करके भाजपा पर दबाव बनाना चाहिए।

साथ ही राष्ट्रीय नेतृत्व को अपनी ताकत का एहसास करा उनके नाम पर मुख्यमंत्री उम्मीदवार की सहमति जताने के लिए मजबूर कर देना चाहिए। किन्तु बताया जाता है कि इस बात का ध्यान जैसे ही राष्ट्रीय नेतृत्व को चला तो तुरंत प्रभाव से राजस्थान के प्रदेश मुखिया सतीश पूनिया, संगठन महामंत्री चंद्रशेखर, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौर को दिल्ली तलब कर लिया।

साथ में डॉ सतीश पूनियां को निर्देश दिया गया कि वसुंधरा राज्य की संभावित देवदर्शन योजना को नाकाम करने के लिए वह खुद उनसे पहले ही देव स्थानों की यात्रा शुरू कर दें, जिससे वसुंधरा की योजना धरी की धरी रह जाएगी।

इसके बाद डॉ सतीश पूनिया के द्वारा अपनी कोरोना बीमारी के दौरान की गई प्रार्थना के तहत सालासर बालाजी की यात्रा और चूरू में सुजानगढ़ में होने वाले उपचुनाव के लिए चुनाव प्रचार शुरू करने की योजना बनाई गई। पार्टी के तमाम मोर्चों को निर्देश दिया गया कि जयपुर से लेकर सीकर होते हुए सालासर बालाजी व आखिर में सुजानगढ़ में कार्यकर्ता सम्मेलन किया जाएगा।

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माना जा रहा है कि अध्यक्ष के तौर पर डॉ सतीश पूनिया ने अपनी राजनीतिक ताकत का एहसास कराने के लिए ही सैकड़ों वाहनों की रैली निकाली, जिसके लिए राष्ट्रीय नेतृत्व के द्वारा उनको पहले ही अनुमति दी जा चुकी थी।

फिर राजसमंद, सहाड़ा विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए 21 जनवरी को जाने की योजना बनाई, जो सीटें भाजपा की पूर्व विधायक किरण माहेश्वरी कांग्रेस के विधायक कैलाश त्रिवेदी का निधन होने से सीटें खाली हो गई थीं।

किंतु इसी दरमियान कांग्रेस के उदयपुर की वल्लभनगर सीट से विधायक गजेंद्र सिंह शक्तावत का निधन हो गया और सतीश पूनिया की बांसवाड़ा में त्रिपुरा सुंदरी की यात्रा एक दिन बाद शुक्रवार को आयोजित की गई। आपको बता दें कि त्रिपुरा सुंदरी के दर्शन करने के लिए वसुंधरा राजे काफ़ी प्रसिद्ध हैं।

ऐसे में सतीश पूनिया का त्रिपुरा सुंदरी जाना और उसके साथी वल्लभनगर के पूर्व विधायक गजेंद्र सिंह शक्तावत के घर जाकर उनको श्रद्धासुमन अर्पित करना, राजसमंद और सहाड़ा में भाजपा के कार्यकर्ताओं चुनाव की तैयारी के लिए दिशा-निर्देश देना इस बात का साफ संकेत है कि भाजपा का संगठन वसुंधरा राजे के खिलाफ उन्हीं हथियारों को प्रयोग ले रहा है जो वसुंधरा राजे को दो बार मुख्यमंत्री बना चुके हैं। उन्हीं सियासी वैपन्स से वसुंधरा राजे को राजनीतिक तौर पर नियंत्रित किया जा सकता है।

यह भविष्य के गर्भ में है कि वसुंधरा राजे की देवदर्शन यात्रा से पहले डॉ सतीश पूनिया के द्वारा निकाली जा रही इन देवदर्शन यात्राओं के माध्यम से वसुंधरा राजे की योजना फ्लॉप होगी या नहीं होगी, किंतु इतना तय है कि वसुंधरा राजे को सियासी तौर पर कंट्रोल करने के लिए भाजपा के प्रदेश नेतृत्व के माध्यम से राष्ट्रीय नेतृत्व योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा है।

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राजनीति के जानकार कहते हैं कि जिस तरह से कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच राजनीतिक तौर पर शीतयुद्ध चरम पर है, तो भाजपा में भी वसुंधरा राजे और संगठन मुखिया के नाते डॉ सतीश पूनियां के बीच भी सियासी संग्राम जोरों पर चल रहा है, जिसके और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।