वसुंधरा राजे का अलग कोई संगठन नहीं हैं: किरोड़ीलाल मीणा

– भाजपा अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया के साथ राज्यसभा सांसद डॉ किरोडी लाल मीणा की मीटिंग से गरमाई राजनीति।

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के द्वारा कथित तौर पर भाजपा के समकक्ष टीम वसुंधरा राजे संगठन बनाने के बाद 2 दिन पहले ही भाजपा के अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया से पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद डॉ किरोड़ी लाल मीणा ने मुलाकात की है, जिसके बाद पूर्वी राजस्थान को खासतौर से फोकस करके किरोड़ी लाल मीणा को पार्टी में फ्रंट पर लाने की बातें चल रही है।

दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और निकट भविष्य में राज्य में होने वाली संभावित घटनाओं की तमाम तरह के कयासबाजी लगाई जा रही है।

पूर्वी राजस्थान में बड़ा कद रखने वाले डॉ किरोडी लाल मीणा का कहना है कि ब्लॉक लेवल से लेकर स्टेट लेवल तक सभी जातियां और किसान भारतीय जनता पार्टी के साथ हैं। गुर्जर-मीणा भाईचारे के साथ रहते हैं और इनको कोई भी ना तो अलग कर सकता है और ना ही इनके बीच में किसी तरह की खाई पैदा कर सकता है।

National dunia के “रामगोपाल जाट” ने राज्यसभा सांसद किरोडी लाल मीणा से राजनीतिक हलचल को लेकर तमाम तरह के सवाल किए। आप भी पढ़िए साक्षात्कार के संपादित अंश-

सवाल: अध्यक्ष के साथ आपकी मुलाकात के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं, आपका क्या कहना है?

मीणा: पार्टी अध्यक्ष के साथ एक सामान्य मुलाकात हुई। इसके किसी तरह की कोई मायने नहीं है। किसी तरह की कोई गतिविधि नहीं हो रही है। आने वाले निकाय चुनाव और अगले महीने होने वाले 3 विधानसभा सीटों के उपचुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति से संबंधित बातचीत हुई है।

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सवाल: कहा जा रहा है कि वसुंधरा राजे के द्वारा संगठन बनाने के कारण पार्टी आपके जैसे कद्दावर नेताओं के सहारे वसुंधरा राजे को घेरने की रणनीति बना रही है?

मीणा: वसुंधरा राजे पार्टी के नेता हैं, उनका अलग से कोई संगठन नहीं है। किसी भी नेता को साथ लेकर पार्टी वसुंधरा राजे को घेरने का प्लान नहीं बना रही है, यह सब चर्चा बेवजह की हो रही है।

सवाल: बेरोजगारों को लेकर सरकार की विफलताओं के कारण भर्तियां रदद् हो रही हैं, आप आंदोलन भी करते हैं, क्या कुछ रणनीति है?

मीणा: कांग्रेस पार्टी सत्ता में आने से पहले बेशुमार सरकारी नौकरियों का वादा करती थी, किंतु सरकार को 2 साल पूरे हो चुके हैं इन 2 साल के दौरान बेरोजगारों को ना तो बता दिया जा रहा है और ना ही नौकरी दी जा रही है। इसके उलट आधा दर्जन से ज्यादा भर्तियां रद्द की जा चुकी है आवेदन पेपर लीक हो रहे हैं। इसका नुकसान योग्य अभ्यर्थियों को उठाना पड़ता है और अयोग्य लोग पेपर लीक होने के कारण सरकारी नौकरी पाने में कामयाब हो जाते हैं। मैं खुद भी मुख्य सचिव निरंजन आर्य से मिला हूं और उन्होंने आश्वासन दिया है कि जो भी लंबित भर्तियां हैं, उनको लेकर जल्द से जल्द प्लान बनाकर पूरा करने का काम किया जाएगा। यदि सरकार इसके बाद भी बेरोजगारों की भर्तियों की मांग को लेकर सक्रिय नहीं होती है तो आने वाले दिनों में मैं खुद बेरोजगारों के लिए आंदोलन करूंगा।

सवाल: पायलट-गहलोत की लड़ाई से रोजगार, किसान कर्जमाफी, टॉल फ्री करने की लड़ाई, बिजली बिलों की सब्सिडी बन्द करने जैसे कदम उठे हैं, आपको क्या लगता है?

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मीणा: यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच राजनीतिक लड़ाई हो रही है, जिसके चलते ना मंत्री काम कर रहे हैं ना ब्यूरोक्रेसी काम कर रही है। राज्य में रोजगार के नाम पर बड़े वादे किए गए थे, लेकिन बेरोजगार आज भी सड़कों पर घूम रहे हैं, जबकि राज्य की ब्यूरोक्रेसी बेलगाम हो गई है। भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच चुका है। अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खजाना खाली है का रोना रोते रहते हैं। राज्य में सरकार वसुंधरा राजे की भी रही है, लेकिन कभी भी खजाना खाली है की बातें नहीं कही, ना ही प्रधानमंत्री कभी कहते हैं कि विकास के लिए पैसा नहीं है। निश्चित रूप से अशोक गहलोत और सचिन पायलट की लड़ाई के चलते राजस्थान का विकास अवरूद्ध हो गया है।

सवाल: क्या आपको मीणा वोटर्स को साधने के लिए और जयपुर ग्रेटर महापौर सौम्या गुर्जर को गुर्जर वोटर्स को साधने के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है?

मीणा: राज्य का गुर्जर-मीणा समाज ही नहीं, बल्कि पूरी किसान कौम भाजपा के साथ है। मीणा वोटर्स को साधने के लिए मुझे या फिर गुर्जर वोटर्स को साधने के लिए समय गुजर को आगे बढ़ाने की पार्टियों कोई जरूरत नहीं है, दोनों ही जातियां पहले से ही पार्टी के साथ जुड़ी हुई हैं और इस तरह की बातें केवल चर्चा के लिए हैं, इनमें कोई सच्चाई नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के साथ गुर्जर-मीणा ब्लॉक लेवल से लेकर स्टेट लेवल तक, हर जगह साथ हैं।