डॉ. सतीश पूनिया को फ्री हैंड, वसुंधरा राजे की राजनीति पर फुलस्टॉप की तैयारी!

नई दिल्ली। राजस्थान की 2003 से 2008 और 2013 से 2018 तक मुख्यमंत्री रहीं भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे की राजनीति के ऊपर सियासी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

भाजपा के दिल्ली सूत्रों का दावा है कि 2 दिन पहले ही राजस्थान इकाई के अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया, प्रदेश के संगठन महामंत्री चंद्रशेखर, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के द्वारा दिल्ली तलब करके वसुंधरा राजे से संबंधित गहन विचार विमर्श किया है।

इन नेताओं की उच्च स्तरीय बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए भाजपा के अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया ने कहा कि निकाय चुनाव और फरवरी के महीने में होने वाले 3 सीटों पर विधानसभा उप चुनाव को लेकर विचार मंथन किया गया है, किंतु सूत्रों का दावा है कि इसके अलावा भी पार्टी में बहुत सारी चर्चा हुई है।

दरअसल, वसुंधरा राजे के खेलने के द्वारा टीम वसुंधरा राजे के नाम से एक नया संगठन खड़ा किया गया है, जिसके प्रदेश के पदाधिकारियों जिला अध्यक्ष समेत तमाम नियुक्तियों का कार्य अंतिम दौर में चल रहा है। नियुक्तियों की सूचियां सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इनको प्रदेश नेतृत्व के पास भी भेजा गया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय नेतृत्व को भी इसकी कॉपी मिलने के बाद भाजपा में एक तरह से हड़कंप मचा है।

भाजपा के दिल्ली मुख्यालय के सूत्रों का कहना है कि 2 दिन पहले ही राजस्थान के टॉप फोर लीडर्स की जेपी नड्डा के साथ हुई बैठक के दौरान वसुंधरा राजे से संबंधित तमाम राजनीतिक बातें हुई हैं, और भाजपा की प्रदेश इकाई अध्यक्ष को निकाय चुनाव के बाद अगले महीने होने वाले 3 सीटों के उपचुनाव के लिए भी बिल्कुल फ्री हैंड दे दिया गया है।

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माना जा रहा है कि डॉ सतीश पूनिया को पहले से ही राष्ट्रीय नेतृत्व के द्वारा फ्री हैंड दिया जा चुका है, जिसके परिणाम स्वरूप उन्होंने प्रदेश की कार्यकारिणी अपने हिसाब से बनाई है और वसुंधरा राजे के समर्थकों को प्रदेश कार्यकारिणी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है, जिसके कारण ही वसुंधरा राजे प्रदेश नेतृत्व से नाराज बताई जा रही हैं।

उल्लेखनीय है कि डॉ. सतीश पूनिया के द्वारा जो कार्यकारिणी बनाई गई है। उसमें वसुंधरा राजे के लोगों को जगह नहीं देने के कारण कई तरह के सवाल तो खड़े हो रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय नेतृत्व के द्वारा जो भी दिशा निर्देश दिए जाते हैं, खासतौर से संघनिष्ठ पूनियां भारती भवन से आने वाले दिशानिर्देशों को मानते हुए ही सतीश पूनिया प्रदेश के संगठन को मजबूत करने में जुटे हुए हैं।

इससे वसुंधरा राजे राजनीतिक तौर पर घबराई हुई हैं। उनको लग रहा है कि प्रदेश की भाजपा इकाई के अंदर उनकी टीम कमजोर पड़ रही है और भविष्य में उनको इसके चलते मुख्यमंत्री बनने से रोका जा सकता है, किंतु अभी भाजपा में इस बारे में कोई भी व्यक्ति वक्तव्य देने को तैयार नहीं है।

इस बीच जानकारी में आया है कि वसुंधरा राजे को भी भाजपा राष्ट्रीय नेतृत्व जल्द ही दिल्ली बुलाएगा। उनके द्वारा बनाए जा रहे संगठन से संबंधित बातों के साथ ही राजस्थान की भविष्य की राजनीति को लेकर भी विचार-मंथन किया जाएगा, किंतु माना जा रहा है कि वसुंधरा राजे इस बार आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में हैं।

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भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के द्वारा दिशा निर्देश देने के बावजूद भी यदि वसुंधरा राजे अपने हिसाब से राजनीतिक गतिविधियां जारी रखती हैं, जिस तरह की बातें सामने आ रही है कि वसुंधरा राजे जल्द ही राजस्थान में देव दर्शन यात्रा निकालने जा रही हैं, तो उसके बाद वसुंधरा राजे की आगे की राजनीति की यात्रा पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं।