भाजपा के समकक्ष वसुंधरा का संगठन तैयार, हो सकती है कार्यवाही

जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की भारतीय जनता पार्टी में वापसी को लेकर तमाम तरह की चर्चा भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच कई तरह के सवाल खड़े कर रही है।

इस बीच वसुंधरा राजे के गुट के द्वारा भारतीय जनता पार्टी के समकक्ष ही एक ऐसे संगठन को खड़ा किया जा रहा है, जो निकट भविष्य में वसुंधरा राजे के लिए भाजपा में दमदार वापसी के लिए जोरदार प्लेटफार्म साबित हो सकता है।

“टीम वसुंधरा राजे” नाम से बने इस संगठन की सभी 28 जिलों इकाइयों का गठन हो चुका है, और मजेदार बात यह है कि इसकी जानकारी प्रदेश भाजपा नेतृत्व व राष्ट्रीय नेतृत्व को भी है।

एक बयान के मुताबिक खुद अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने इस संगठन की मौजूदगी के बारे जानकारी होना स्वीकार किया है। साथ ही कहा है कि राष्ट्रीय नेतृत्व इस बारे में पूरी जानकारी है और जो भी निर्णय दिल्ली से आएगा, उसको अमल में लाया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक वसुंधरा राजे पिछले लंबे समय से धौलपुर स्थित अपने महल में हैं और राजस्थान के उन चुनिंदा नेताओं को चर्चा के लिए बुला रही हैं, जो उनके बेहद करीबी माने जाते हैं, साथ ही भविष्य में उनकी रणनीति में अहम हिस्सेदार हो सकते हैं।

भाजपा सूत्रों द्वारा कहा जा रहा है कि कुछ ऐसी छोटी-छोटी पार्टियों के नेता भी वसुंधरा राजे से धौलपुर मिलने पहुंच रहे हैं, जिनका तहसील स्तर पर या जिला स्तर पर थोड़ा बहुत वजूद है। पिछले दिनों जनता सेना पार्टी के मुखिया रणधीर सिंह भींडर ने वसुंधरा राजे से धौलपुर निवास पर मुलाकात की थी।

आजकल भाजपा कार्यालय से दूर नजर आने वाले राजे के करीबी भाजपाइयों का दावा है कि राज्य में वसुंधरा राजे के खेमे से माने जाने वाले पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कैलाश चंद मेघवाल, पूर्व मंत्री कालीचरण सराफ, विधायक प्रताप सिंह सिंघवी समेत कई नेताओं के साथ राजे की फोन पर बातचीत हो चुकी है।

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इधर, वसुंधरा राजे के लिए “टीम वसुंधरा राजे” के नाम से भाजपा के समकक्ष ही एक नया संगठन तैयार कर लिया गया है।

भाजपा सूत्र दावा करते हुए कहते हैं कि इस संगठन की जिम्मेदारी पूर्व मंत्री यूनुस खान को सौंपी गई है और लगातार यूनुस खान के द्वारा इस संगठन को मजबूत करने व इसके तमाम पदाधिकारियों को नियुक्त करने का काम कर रहे हैं।

टीम वसुंधरा राजे के लिए प्रत्येक जिले मंडल और बूथ स्तर के अध्यक्षों व अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति का कार्य अंतिम दौर में पहुंच चुका है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि वसुंधरा राजे फरवरी या फिर मार्च में राजस्थान में “देव दर्शन यात्रा” के नाम से यात्रा निकालने का प्लान तैयार कर चुकी हैं।

राजे इस संगठन के माध्यम से भाजपा की राज्य इकाई को चुनौती देने के साथ ही राष्ट्रीय नेतृत्व को अपनी ताकत का भी अहसास कराने के मूड में हैं।

हालांकि, अभी तक भाजपा की तरफ से खुद अध्यक्ष डॉ. पूनियां के सिवाय इस बारे में कोई भी पदाधिकारी ज्यादा कुछ नहीं बोलना चाहता है, किंतु इतना तय है कि वसुंधरा राजे के नाम से जो टीम तैयार हो रही है, उसमें कहीं ना कहीं वसुंधरा राजे के बेहद करीबी लोगों का सीधा हस्तक्षेप है।

यही कारण है कि टीम वसुंधरा के नाम से संगठन तैयार होने, उसके पदाधिकारियों की नियुक्ति होने और सोशल मीडिया पर भी टीम वसुंधरा के नाम से प्रदेश के सभी जिलों की अलग-अलग ग्रुप्स के द्वारा टीमें भी तैयार की जा चुकी है।

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जनता सेना के अध्यक्ष रणधीर सिंह भिंडर, जो कभी भाजपा के ही विधायक थे और बाद में टिकट नहीं मिलने की वजह से बगावत कर चुनाव लड़ चुके हैं, उनकी व उनके दल के प्रधान व पार्षद विजेताओं के साथ धौलपुर स्थित महल में मुलाकात सोशल मीडिया के माध्यम से चर्चा का विषय बनी हुई है।

इधर, टीम वसुंधरा राजे के तमाम पदाधिकारियों की नियुक्ति के बाद अब उनको जिम्मेदारी के साथ जनता के बीच में जाकर वसुंधरा राजे के द्वारा सरकार में रहते हुए कार्यों के बारे में जानकारी देना और इसके साथ ही भाजपा को यह बताने का काम भी वसुंधरा राजे करने के मूड में हैं कि राजस्थान में उनका राजनीतिक कद कितना बड़ा है?

इसके बारे में भी इन पदाधिकारियों को जानकारी जुटाने का लक्ष्य दिया गया है। गौरतलब है कि राजस्थान में सत्ता से बेदखल होने के बाद भले ही वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया गया हो, लेकिन जिस तरह से उनकी प्रदेश कार्यालय से दूरी बनी हुई है और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भी उनको लगभग दरकिनार किया गया है, उससे साफ है कि राजस्थान में वसुंधरा राजे की राजनीति के दिन अब लद गए हैं।

बहरहाल, वसुंधरा राजे को भी शायद इस बात का एहसास है और यही कारण है कि पिछले करीब एक साल से वसुंधरा राजे, क्योंकि वर्तमान भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया को वसुंधरा राजे अध्यक्ष बनाने के मूड में नहीं थीं, फिर भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वारा सतीश पूनिया को अध्यक्ष बनाया गया, तब से वसुंधरा राजे खुद को राजस्थान की राजनीति में सियासी तौर पर कमजोर होने लगी थीं।

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इसके चलते उन्होंने पहले राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष अपना पक्ष रखा, लेकिन जब तमाम प्रयास के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से उनकी मुलाकात नहीं हो पाई, तो वसुंधरा राजे ने राजस्थान की राजनीति के माध्यम से अपनी शक्ति का परिचय देने के लिए खुद के नाम से भाजपा के समकक्ष एक नया संगठन खड़ा करने का कार्य शुरू कर दिया था।

वसुंधरा राजे की देव दर्शन यात्रा की तैयारियां जोरों पर चल रही है, लेकिन भाजपा में चर्चा यह भी है कि अगर राष्ट्रीय नेतृत्व के द्वारा वसुंधरा राजे की इस यात्रा को निकालने के लिए अनुमति नहीं दी जाती है तो फिर वसुंधरा पार्टी के साथ बगावत भी कर सकती हैं, या फिर अपने लिए सम्मानजनक स्थिति पाने की शर्त भी रख सकती हैं, किंतु इसके साथ ही यह भी चर्चा है कि राष्ट्रीय नेतृत्व के द्वारा वसुंधरा राजे को इस बारे में अनुमति दी जानी लगभग असंभव है।

खासतौर से, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सतीश पूनिया के माध्यम से अपनी रीति-नीति से भाजपा के संगठन को संचालित कर रहा है। एक दिन पहले ही अध्यक्ष डॉ पूनियां, संगठन महामंत्री चंद्रशेखर, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र सिंह राठौड़ को दिल्ली तलब किया गया था।

जानकारों का कहना है कि अब इसी सिलसिले में वसुंधरा राजे को भी अगले कुछ दिनों में दिल्ली बुलाकर उनका पक्ष जाना जाएगा या उनको निर्देशित किया जाएगा। यदि उसके बाद भी वसुंधरा राजे अपने तल्ख तेवर जारी रहेंगे, तो फिर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा सकती है।