भाजपा के टॉप 3 लीडर्स दिल्ली तलब, गहलोत सरकार फिर सकते में

जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के टॉप 3 लीडर्स अध्यक्ष सतीश पूनिया, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ शुक्रवार को दिल्ली पहुंच गए हैं।

भाजपा के शीर्ष तीनों नेताओं के दिल्ली पहुंचने के साथ ही राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार सकते में आ गई है। कहा जा रहा है कि यकायक भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के द्वारा इन तीन नेताओं को दिल्ली तलब किए जाने के बाद एक बार फिर से अशोक गहलोत को लगने लगा है कि भाजपा उनकी सरकार गिराने के लिए कोई षड्यंत्र रच रही है।

उल्लेखनीय है कि जुलाई 2020 के वक्त, जब राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के ऊपर संकट आया था और तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट समेत कांग्रेस के कई विधायक गुरुग्राम में मनोहर लाल खट्टर सरकार की मेहमाननवाजी में पहुंच गए थे, उससे पहले भी भाजपा के इन तीन नेताओं को दिल्ली तलब किया गया था।

यही कारण है कि भाजपा के टॉप 3 लीडर्स के दिल्ली पहुंचने के साथ ही राजस्थान की अशोक गहलोत की सरकार असहज महसूस करने लगी है। हालांकि, राजस्थान में दो बार मुख्यमंत्री रहीं और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे को इन तीन नेताओं के साथ दिल्ली बैठक में नहीं बुलाया गया है, उसके कारण भी कई तरह की चर्चा हो रही है।

भाजपा के सूत्र कहते हैं कि यदि अशोक गहलोत की सरकार को अस्थिर करने का कोई प्लान चल रहा है, तो क्योंकि जुलाई-अगस्त के महीने में जब गहलोत की सरकार गिरने की नौबत आई थी, तब कथित तौर पर आरोप लगे थे कि वसुंधरा राजे के द्वारा गहलोत की सरकार को बचाया गया है, उसी को ध्यान में रखते हुए संभवत इस प्लान में वसुंधरा राजे को शामिल नहीं किया जा रहा है।

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दिल्ली बुलाए जाने की बात को लेकर भाजपा के अध्यक्ष सतीश पूनिया का कहना है कि अगले महीने में राजस्थान की 3 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं और जनवरी के 28 तारीख को 90 नगर निकाय के चुनाव होने जा रहे हैं, उसके मद्देनजर राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ बैठकर रणनीतिक चर्चा होगी।

इधर, कांग्रेस के लोगों का भी दावा है कि भले ही भाजपा के अध्यक्ष केवल चुनाव की चर्चा का दावा कर रहे हों, किंतु इतना तय है कि राजस्थान में 2 दिन पहले प्रदेश कार्यकारिणी का गठन करने के बाद एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस में बगावत की आशंका जोर पकड़ने लगी है।

यही कारण है कि भाजपा कांग्रेस की इस संभावित बगावत में खुद को किस तरह से शामिल कर सकती है, संभवत इसी को लेकर तीनों नेताओं को चर्चा के लिए बुलाया गया है। गौरतलब है कि पिछले दिनों वसुंधरा राजे के बेहद धुर विरोधी रहे पार्टी के पूर्व विधायक घनश्याम तिवाड़ी कि वापसी हुई है।

साथ ही पार्टी के कुछ पूर्व नेता देवीसिंह भाटी, सुरेंद्र गोयल, राजकुमार रिणवा, मानवेन्द्र सिंह समेत जो दिसंबर 2018 में टिकट नहीं मिलने के कारण बागी हो गए थे और उनको पार्टी से निलंबित कर दिया गया था, उनको भी भाजपा में वापस लेने के लिए प्रयास चल रहे हैं, जिसकी चर्चा करने के लिए तीनों नेता दिल्ली बुलाए गए हैं।

इधर, चर्चा यह भी है कि घनश्याम तिवाड़ी की पार्टी में वापसी होने के बाद वसुंधरा राजे खासी नाराज बताई जा रही हैं और अपने करीबी भाजपा नेताओं से मुलाकात कर भाजपा को चुनौती देने की स्थिति में पहुंच सकती हैं, जिसके मद्देनजर पार्टी पहले से ही तैयारी करना चाहती है, संभवत तीनों नेताओं को इसी सिलसिले में दिल्ली बुलाया गया है।

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