आशा सहयोगिनियों की गिरफ्तारी निंदनीय: राठौड़-पूनियां

जयपुर। राजस्थान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने वक्तव्य जारी कर राजधानी जयपुर में पिछले 15 दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से स्थायीकरण और मानदेय में बढ़ोतरी सहित विभिन्न मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रही आशा सहयोगिनियों की गिरफ्तारी की कड़ी भर्त्सना करते हुए कहा कि किसानों के धरने पर उनके तथाकथित हितैषी बनकर केन्द्र सरकार को बार-बार संवेदनहीनता का पाठ पढ़ाने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की नाक के नीचे आशा सहयोगिनियों की गिरफ्तारी होना संवेदनहीन, निंदनीय व दुर्भाग्यपूर्ण कृत्य है।

राठौड़ ने कहा कि महिलाओं के प्रति अपराधों में देशभर में दूसरे स्थान पर आने वाले राजस्थान में कांग्रेस सरकार महिलाओं पर अत्याचार की सारी सीमाएं लांघ रही हैं।

जनघोषणा पत्र में आशा सहयोगिनियों का मानदेय बढ़ाने का वादा करने वाली कांग्रेस सरकार के कुशासन में विगत एक पखवाड़े से कड़ाके की ठंड में धरना देने को मजबूर सैकड़ों आशा सहयोगिनियों के साथ सकारात्मक वार्ता की पहल नहीं करना और उन पर दमनकारी रवैया अपनाते हुए इनकी गिरफ्तारी करना न्यायसंगत नहीं है।

राठौड़ ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में एकत्रित हुई आशा सहयोगिनियां जयपुर स्थित महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यालय के सामने अपना मानदेय बढ़ाने और स्थायीकरण करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत है लेकिन विभाग के अधिकारी सकारात्मक वार्ता करने के लिए गंभीर नहीं दिख रहे हैं।

राठौड़ ने कहा कि वोट बटोरने के उद्देश्य से जन घोषणा पत्र में राजस्थान के विभिन्न विभागों में कार्यरत करीब डेढ़ लाख संविदाकर्मियों को स्थायी करने के चुनावी वादे से सत्ता में आई सरकार ने कल्ला कमेटी का गठन कर महज खानापूर्ति करने का काम किया है जो दो कदम भी आगे नहीं चल सकी है।

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राज्य सरकार ने विगत 2 वर्षों में संविदाकर्मियों सहित विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों की समस्याओं पर यथोचित समाधान नहीं निकालकर इन्हें धोखे में रखने का कुत्सित प्रयास किया है।

राठौड़ ने कहा कि कड़ाके की सर्दी में आशा सहयोगिनी बहनें राजधानी जयपुर में धरने पर बैठने को मजबूर हैं, लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आशा सहयोगिनियों के गतिरोध पर कोई हल निकालने की बजाय संवेदनहीन रवैया अपनाये हुए हैं।

वहीं राज्य सरकार अब आशा सहयोगिनियों को मानदेय सेवा से पृथक करने का नोटिस देकर अनुचित दबाव बनाकर इनके आंदोलन को कुचलने का प्रयास भी कर रही है।

राठौड़ ने कहा कि कोरोना काल में आशा सहयोगिनियों ने अपने जीवन को खतरे में डालते हुए कोरोना वाॅरियर्स के रूप घर-घर जाकर सर्वे किया था। किसानों के कथित हितैषी होने का ढोंग करने वाले कांग्रेस सरकार के मुखिया अशोक गहलोत को भयंकर सर्दी में अपना परिवार छोड़कर शांतिपूर्वक धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर आशा सहयोगिनियों की पीड़ा को समझते हुए उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने का उदार दिल दिखाना चाहिए।

डाॅ. सतीश पूनियां ने आशा सहयोगिनी बहनों की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की। कहा: गहलोत सरकार आशा सहयोगिनी बहनों से ना वार्ता कर रही है, ना ही समाधान निकाल रही है: डाॅ. पूनियां

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने आशा सहयोगिनियों की गिरफ्तार की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि लगभग 15 दिनों से राजधानी जयपुर में आशा सहयोगिनी बहनें मानदेय सहित विभिन्न मांगों को लेकर धरना दे रही हैं, लेकिन गहलोत सरकार ना वार्ता कर रही है, ना ही समाधान निकाल रही है, बल्कि दमनकारी तरीके से आंदोलन को कुचलने का षडयंत्र कर रही है।

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डाॅ. पूनियां ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एवं इनके विधायक और मंत्रियों ने पिछले दिनों जयपुर में धरना दिया था, जिसमें लगभग 300 लोगों के आने जानकारी मिली, क्या यह धरना आपदा प्रबन्धन अधिनियम, राजस्थान महामारी अध्यादेश का उल्लंघन नहीं था? उन्होंने कहा कि क्या यह अध्यादेश सिर्फ आम आदमी और आशा सहयोगिनी बहनों को डराने-धमकाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है?

डाॅ. पूनियां ने कहा कि गहलोत सरकार ने आशा सहयोगिनियों से उनकी मांगों को पूरा करने का वादा किया था, अब सरकार वादाखिलाफी क्यों कर रही है? इससे गहलोत सरकार की संवेदनहीनता जाहिर होती है। मुख्यमंत्री गहलोत ने किसानों, युवाओं से भी वादाखिलाफी की है, जिसका जनता आगामी निकाय, पंचायतीराज, विधानसभा उपचुनाव और विधानसभा चुनाव में कड़ा जवाब देगी।